प्रश्न की मुख्य माँग
- लैंगिक समानता, गरीबी और कुपोषण के चक्र को तोड़ना : तंत्र और उदाहरण
- संबंधित चुनौतियाँ
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उत्तर
भूमिका
लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण का ‘दुष्चक्र’ एक अंतर-पीढ़ीगत जाल है, जहाँ सामाजिक हाशिए पर होना एक महिला की आर्थिक क्षमता को सीमित करता है, जिससे घरेलू गरीबी और बाद में पोषण संबंधी कमियाँ उत्पन्न होती हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से सूक्ष्म वित्तपोषण महिलाओं के हाथों में पूँजी पहुँचाकर एक ‘सर्किट ब्रेकर’ के रूप में कार्य करता है, जो सांख्यिकीय रूप से अन्य व्ययों की तुलना में स्वास्थ्य तथा पोषण को प्राथमिकता देती हैं।
मुख्य भाग
चक्र को तोड़ना : तंत्र और उदाहरण
- आर्थिक सशक्तीकरण: सूक्ष्म ऋण महिलाओं को नैनो-उद्यम शुरू करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे मौसमी श्रम पर निर्भरता में कमी और घरेलू “व्यय योग्य आय” बढ़ती है।
- उदाहरण: लखपति दीदी पहल (DAY-NRLM) ने जून 2025 तक 1.48 करोड़ से अधिक महिलाओं को वार्षिक कम-से-कम ₹1 लाख आय अर्जित करने हेतु सशक्त बनाया है।
- निर्णय शक्ति: वित्तीय स्वतंत्रता घरेलू शक्ति-संबंधों को परिवर्तित करती है, परिणामस्वरूप महिलाएँ स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा से जुड़े निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाने लगती हैं।
- उदा: केरल के कुदुम्बश्री मॉडल ने दिखाया है, कि 90% SHG सदस्य घरेलू वित्तीय निर्णयों में भागीदारी बढ़ने की रिपोर्ट करती हैं।
- सामाजिक पूँजी: SHG स्वच्छता और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता के लिए मंच के रूप में कार्य करते हैं, जो कुपोषण के अज्ञानता संबंधी पहलू से निपटते हैं।
- उदाहरण: बिहार का जीविका मिशन सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए “स्वास्थ्य और पोषण सखियों” का उपयोग करता है।
संबंधित चुनौतियाँ
- क्षेत्रीय असमानता: दक्षिण और पूर्व (प्रत्येक 30%) की तुलना में उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में SHG की पहुँच कम (लगभग 6% प्रत्येक) बनी हुई है।
- अत्यधिक ऋणग्रस्तता: विभिन्न सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) द्वारा कई बार ऋण लेने से परिसंपत्ति निर्माण की बजाय “ऋण जाल” की स्थिति बन सकती है।
- डिजिटल विभाजन: हालाँकि ‘बैंक सखियाँ’ इस अंतराल में कमी लाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कई ग्रामीण महिलाओं में अभी भी आधुनिक फिनटेक प्लेटफॉर्मों के लिए आवश्यक डिजिटल साक्षरता की कमी है।
- सामाजिक विरोध: अत्यधिक पितृसत्तात्मक क्षेत्रों में, पुरुष सदस्य ऋण राशि को नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे महिलाएँ केवल ऋण लेने के लिए “मुखौटा” बनकर रह जाती हैं।
निष्कर्ष
सूक्ष्म वित्तपोषण एक आवश्यक उपकरण है, लेकिन पर्याप्त नहीं। इस चक्र को वास्तव में तोड़ने के लिए, इसे कौशल-उन्नयन और बाजार संबंधों (जैसे- सरस मेला) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। ऋण-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर मूल्य-शृंखला एकीकरण पर बल देना आवश्यक है, ताकि महिला-नेतृत्व वाले SHG स्थायी ग्रामीण उद्यम बन सकें और दीर्घकालिक पोषण तथा सामाजिक समानता को साकार किया जा सके।
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