//php print_r(get_the_ID()); ?>
उत्तर:
दृष्टिकोण:
|
परिचय:
भारत सहित कई देशों में महिलाओं के खिलाफ यौन-उत्पीड़न एक व्यापक मुद्दा है। यौन-उत्पीड़न की घटनाओं की बढ़ती संख्या समाज के अंतर्निहित पितृसत्तात्मक रवैये के कारण है जो महिलाओं को मां, बहन और पत्नी की पारंपरिक भूमिका निभाने और परिवार और समुदाय के नाम और सम्मान की वाहक बनने में विश्वास करती है। यह रवैया कामकाजी महिलाओं को ‘आसान‘ और निम्न नैतिक चरित्र के रूप में देखने में प्रकट हुआ है, इसलिए उन्हें वस्तु के रूप में देखा जाता है।
मुख्य विषयवस्तु:
इस खतरे से निपटने के लिए नवीन उपाय अपनाए जा सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय हैं:
निष्कर्ष:
ऐसे उपाय देश में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने में मदद कर सकते हैं। अंततः, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि यौन-उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई एक सामूहिक जिम्मेदारी है, और इसमें सार्थक और स्थायी प्रभाव डालने के लिए सभी हितधारकों-व्यक्तियों, समुदायों, नागरिक समाज संगठनों और सरकार की भागीदारी और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Managing General Agents (MGAs) in Insurance: Insur...
Lunar Governance and Multilateralism: Artemis Miss...
Noida Labour Unrest: Wage Disparity, Labour Codes ...
Chambal Sand Mining Crisis: Supreme Court Action, ...
Welfare vs Development in India: Understanding the...
Right to Be Forgotten (RTBF) in India: Legal Frame...
<div class="new-fform">
</div>
Latest Comments