Q. मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन शुरू करने में, प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स, दोनों ही दृष्टियों से मुख्य बाधाएँ क्या हैं? इसका आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • तकनीकी बाधाओं को स्पष्ट कीजिए।
  • लॉजिस्टिक बाधाओं का वर्णन कीजिए।
  • बताइए कि चुनौतियाँ क्यों बनी रहती हैं।
  • आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

आर्टेमिस II मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए चरण का संकेत देता है, किंतु मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान अब भी जटिल तकनीकी आवश्यकताओं और भारी लॉजिस्टिक बोझ से सीमित है, जिससे यह रोबोटिक मिशनों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बनी रहती है।

तकनीकी बाधाएँ

  • जीवन समर्थन प्रणाली: अंतरिक्ष में निरंतर ऑक्सीजन आपूर्ति, तापमान नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करना अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण होता है।
    • उदाहरण: गगनयान मिशन के तहत स्वदेशी क्रू जीवन समर्थन प्रणाली विकसित की जा रही है।
  • क्रू सुरक्षा: अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण और प्रक्षेपण जोखिमों से सुरक्षित रखना अत्यंत उन्नत तथा त्रुटिरहित प्रणालियों की माँग करता है।
    • उदाहरण: आर्टेमिस मिशनों में नासा द्वारा एबॉर्ट सिस्टम और विकिरण सुरक्षा उपाय विकसित किए गए हैं।
  • सटीकता आधारित प्रणालियाँ: नेविगेशन, डॉकिंग और पुनः प्रवेश जैसी प्रक्रियाओं में अत्यधिक सटीक और विश्वसनीय तकनीक की आवश्यकता होती है, जो चरम परिस्थितियों में कार्य करती है।
    • उदाहरण: आर्टेमिस मिशनों में चंद्र कक्षा में सटीक प्रवेश और सुरक्षित पृथ्वी वापसी सुनिश्चित करनी होती है।

लॉजिस्टिक बाधाएँ

  • उच्च लागत: मानवयुक्त मिशनों के लिए दीर्घ अवधि तक बहु-अरब डॉलर का निवेश आवश्यक होता है।
    • उदाहरण: आर्टेमिस कार्यक्रम की लागत वर्ष 2012–2025 के बीच 90 अरब डॉलर से अधिक आँकी गई है, जबकि प्रत्येक प्रक्षेपण पर लगभग 4.1 अरब डॉलर का खर्च आता है।
  • बहु-पक्षीय समन्वय: अनेक देशों और एजेंसियों की भागीदारी से निर्णय-निर्माण और समय-सीमा जटिल हो जाती है।
    • उदाहरण: आर्टेमिस समझौतों में 25 से अधिक साझेदार शामिल हैं, जिससे क्रियान्वयन धीमा हो सकता है।
  • अवसंरचना की माँग: प्रक्षेपण, प्रशिक्षण और मिशन समर्थन के लिए व्यापक और संसाधन-गहन अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
    • उदाहरण: इसरो गगनयान मिशन के लिए बंगलूरू में मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र तथा रूस के सहयोग से अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रहा है।

चुनौतियाँ क्यों बनी रहती हैं

  • मानव जोखिम: अंतरिक्ष यात्रियों की उपस्थिति के कारण सुरक्षा मानक अत्यंत कठोर होते हैं और किसी भी विफलता की कोई गुंजाइश नहीं होती।
    • उदाहरण: क्रू मॉड्यूल में खराबी सीधे जीवन हानि का कारण बन सकती है, जबकि उपग्रह मिशनों में ऐसा जोखिम नहीं होता।
  • विकसित होती तकनीक: गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों से जुड़ी कई तकनीकें अभी भी प्रयोगात्मक और पूर्णतः सिद्ध नहीं हैं।
  • वित्तीय अनिश्चितता: लंबी समयावधि के कारण बजट में कटौती और परियोजना में देरी की संभावना बनी रहती है।
    • उदाहरण: आर्टेमिस कार्यक्रम में बार-बार लागत वृद्धि देखी गई है।
  • रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा: भूराजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा सहयोग को सीमित करती है और मिशनों पर दबाव बढ़ाती है।
    • उदाहरण: चंद्रमा पर प्रभुत्व को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्द्धा।

आगे की राह

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: वाणिज्यिक कंपनियों की भागीदारी से लागत कम की जा सकती है और नवाचार को गति मिलती है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: साझा मिशन और डेटा साझेदारी से संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है तथा जोखिम कम होते हैं।
    • उदाहरण: भारत का आर्टेमिस समझौतों में शामिल होना।
  • चरणबद्ध मिशन दृष्टिकोण: क्रमिक प्रगति से क्षमता निर्माण होता है और विफलता का जोखिम कम होता है।
    • उदाहरण: गगनयान मिशन का प्रारंभिक ध्यान निम्न पृथ्वी कक्षा पर केंद्रित है।
  • स्वदेशी क्षमता निर्माण: घरेलू तकनीकी क्षमता विकसित करने से दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता और स्थिरता सुनिश्चित होती है।
    • उदाहरण: इसरो द्वारा स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियों का विकास।

निष्कर्ष

यद्यपि तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं, फिर भी नवाचार, सहयोग और चरणबद्ध क्षमता निर्माण का संतुलित दृष्टिकोण जोखिमों को कम कर सकता है। इससे बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के बीच पृथ्वी से परे मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को सतत् और सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है।

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