प्रश्न की मुख्य माँग
- सिविल सेवा में समस्याओं को रेखांकित कीजिए।
- प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाइए।
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उत्तर
भारत की सिविल सेवाएँ, जिन्हें कभी शासन की “स्टील फ्रेम” कहा जाता था, आज संरचनात्मक अक्षमताओं और बदलती अपेक्षाओं का सामना कर रही हैं। भर्ती, प्रशिक्षण और जवाबदेही से जुड़ी प्रणालीगत कमियों को दूर करना इन्हें एक उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित प्रशासनिक तंत्र में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक है।
सिविल सेवाओं में समस्याएँ
- रटंत आधारित चयन: भर्ती प्रक्रिया में व्यावहारिक कौशल के बजाय सैद्धांतिक ज्ञान पर अत्यधिक जोर दिया जाता है।
- उदाहरण: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को स्मृति-आधारित माना जाता है, जो निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल की उपेक्षा करती है।
- विलंबित प्रवेश: लंबी तैयारी और भर्ती प्रक्रिया के कारण युवा प्रतिभाओं का प्रवेश देर से होता है।
- उदाहरण: औसत प्रवेश आयु 28 वर्ष से अधिक होती है तथा भर्ती प्रक्रिया लगभग 18 महीने तक चलती है।
- सेवा असंगति: अभ्यर्थियों को प्रायः उनकी पसंदीदा सेवाएँ नहीं मिलतीं, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
- उदाहरण: केवल लगभग 30% अभ्यर्थी सेवा आवंटन से संतुष्ट होते हैं; कई बार-बार परीक्षा देते हैं।
- स्थानांतरण संबंधी समस्याएँ: बार-बार और मनमाने स्थानांतरण से निरंतरता और जवाबदेही प्रभावित होती है।
- उदाहरण: राजनीतिक प्रभाव से होने वाली नियुक्तियाँ अल्पकालिक कार्यकाल और कमजोर प्रशासनिक परिणामों का कारण बनती हैं।
- कौशल असंगति: अधिकारियों की नियुक्ति उनके विशेषज्ञता क्षेत्र से असंबंधित पदों पर की जाती है।
- उदाहरण: कैडर प्रबंधन की कमी के कारण मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।
प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय
- समग्र चयन प्रक्रिया: शैक्षणिक ज्ञान से परे बहुआयामी मूल्यांकन को शामिल किया जाए।
- उदाहरण: परिस्थितिजन्य निर्णय परीक्षण, मनोमितीय उपकरण तथा मूल्यांकन केंद्रों की सिफारिश।
- तीव्र भर्ती प्रक्रिया: तकनीक के उपयोग से प्रक्रियाओं को सरल बनाकर विलंब कम किया जाए।
- उदाहरण: ब्लॉकचेन आधारित दस्तावेज सत्यापन और एकीकृत अभ्यर्थी प्रणाली का प्रस्ताव।
- प्रशिक्षण में सुधार: सैद्धांतिक ज्ञान के साथ क्षेत्रीय अनुभव और निरंतर अधिगम को जोड़ा जाए।
- उदाहरण: क्षेत्रीय प्रशिक्षण, प्रकरण-आधारित अध्ययन तथा मार्गदर्शन कार्यक्रम।
- स्थिर कार्यकाल: निरंतरता के लिए निश्चित कार्यकाल और योग्यता-आधारित नियुक्तियाँ सुनिश्चित की जाएँ।
- उदाहरण: प्रदर्शन-आधारित पदस्थापन और राजनीतिक हस्तक्षेप में कमी।
- नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण: जवाबदेही और सेवा भावना को बढ़ावा दिया जाए।
- उदाहरण: 360-डिग्री मूल्यांकन, ई-शासन मंच तथा नागरिक सहभागिता तंत्र।
निष्कर्ष
सिविल सेवाओं में सुधार केवल क्रमिक परिवर्तनों तक सीमित न रहकर व्यापक प्रणालीगत परिवर्तन की दिशा में होने चाहिए। भर्ती, प्रशिक्षण और जवाबदेही को आधुनिक शासन की आवश्यकताओं के अनुरूप समन्वित कर एक ऐसी गतिशील नौकरशाही का निर्माण किया जा सकता है, जो दक्षता और संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए प्रभावी एवं समावेशी लोक सेवा प्रदान करे।