Q. शीत युद्ध के बाद के युग में बदलती वैश्विक शक्ति गतिशीलता को न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति कैसे दर्शाती है? न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति मौजूदा वैश्विक परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण संरचना के लिए क्या चुनौतियाँ पेश करती है? (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बदलती वैश्विक शक्ति गतिशीलता का उल्लेख कीजिए।
  • परमाणु अप्रसार संरचना के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित कीजिए। 
  • निरस्त्रीकरण संरचना के समक्ष चुनौतियों का वर्णन कीजिए। 

उत्तर

फरवरी 2026 में ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि की समाप्ति संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच अंतिम बड़े द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते के अंत का प्रतीक है। यह शीत युद्ध कालीन सहकारी संयम से हटकर एक तेजी से बढ़ती बहुध्रुवीय परमाणु व्यवस्था में नवीनीकृत भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की ओर बदलाव का संकेत देता है।

बदलती वैश्विक शक्ति गतिशीलता का प्रतिबिंब

  • द्विध्रुवीयता से बहुध्रुवीयता की ओर झुकाव: शीत युद्ध के हथियार नियंत्रण ने अमेरिका-रूस समानता को दर्शाया था; आज चीन का विस्तारित शस्त्रागार द्विपक्षीय सीमाओं को जटिल बना रहा है।
    • उदा: अमेरिका का यह आग्रह कि भविष्य की किसी भी संधि में चीन के बढ़ते परमाणु भंडार को शामिल किया जाना चाहिए।
  • महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता का पुनरुत्थान: भू-राजनीति अब सहकारी सुरक्षा के बजाय क्षेत्रीय दावे और आर्थिक राष्ट्रवाद के पुनरुद्धार को दर्शाती है।
    • उदा: समकालीन ‘टैरिफ वॉर’ (शुल्क युद्ध) और रणनीतिक मुद्रा का ‘देतांत’ (détente) जैसे जुड़ाव का स्थान लेना।
  • द्विपक्षीयता का क्षरण: कई परमाणु हितधारकों वाले विश्व में ‘स्टार्ट’ (START) का द्विपक्षीय मॉडल अपर्याप्त है।
  • विश्वास और सत्यापन मानकों में गिरावट: निरीक्षणों का निलंबन पारदर्शिता और विश्वास बहाली तंत्र को कमजोर करता है।
    • उदा: हाल के वर्षों में ‘न्यू स्टार्ट’ के तहत स्थल निरीक्षणों का रुकना।
  • रणनीतिक आधुनिकीकरण की दौड़: संख्यात्मक कटौती के बजाय अब हथियारों के गुणात्मक आधुनिकीकरण की ओर बदलाव हुआ है।
    • उदा: हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों और सामरिक परमाणु प्रणालियों (tactical nuclear systems) का विकास।

परमाणु अप्रसार संरचना के समक्ष चुनौतियाँ 

  • NPT की विश्वसनीयता में कमी: परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रयास न करना अनुच्छेद VI (Article VI) की प्रतिबद्धताओं को कमजोर करता है।
  • CTBT व्यवस्था पर दबाव: हथियारों में कटौती के बाध्यकारी समझौतों के अभाव में परमाणु परीक्षणों के प्रति प्रोत्साहन पुनः बढ़ सकता है।
    • उदा: CTBT के लागू न होने के बावजूद प्रमुख शक्तियों द्वारा परीक्षण क्षमताओं को बनाए रखना।
  • शस्त्रागार विस्तार का वैधीकरण: शर्त-आधारित संयम (Conditional restraint) प्रतिस्पर्धी निर्माण को बढ़ावा देता है।
    • उदा: अमेरिका का यह संकेत देना कि यदि चीन विस्तार करता है, तो वह भी सीमाओं का पालन नहीं करेगा।
  • पारदर्शिता में कमी: डेटा-साझाकरण की समाप्ति से संदेह और गलत गणना (miscalculation) का जोखिम बढ़ जाता है।
    • उदा: START के तहत अनिवार्य वारहेड और प्रक्षेपास्त्र प्रक्षेपण यंत्र डेटा विनिमय का अंत।
  • सीमांत देशों को प्रोत्साहन: महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता छोटे देशों को अपने विस्तार के लिए औचित्य प्रदान करती है।
    • उदा: उत्तर कोरिया द्वारा अपने कार्यक्रम को सही ठहराने के लिए अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा का हवाला देना।

निरस्त्रीकरण अवसंरचना के समक्ष चुनौतियाँ 

  • क्रमिक कटौती मॉडल का पतन: 1980 के दशक से जारी स्थिर और चरणबद्ध कटौतियाँ, किसी उत्तराधिकारी समझौते के अभाव में पलट सकती हैं।
    • उदा: ‘न्यू स्टार्ट’ के तहत 10,000+ से 1,550 वारहेड्स तक आई कमी अब अनिश्चितता का सामना कर रही है।
  • हथियार नियंत्रण मानकों का क्षरण: हथियारों में कटौती की दिशा में SALT से START तक की ऐतिहासिक प्रगति अब बाधित हो गई है।
  • बहुपक्षीय मंचों का हाशिए पर जाना: मौजूदा निरस्त्रीकरण निकाय पहले से ही गतिरोध (paralysis) का सामना कर रहे हैं।
    • उदा: निरस्त्रीकरण सम्मेलन में रुकी हुई बातचीत।
  • भेदभावपूर्ण ढाँचे पर बहस: बिना सुधार के NPT में असमानता की धारणा मतभेदों को और गहरा करती है।
    • उदा: गैर-परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा P5 (सुरक्षा परिषद) देशों के स्थायी विशेषाधिकारों की आलोचना।
  • नए हथियार दौड़ का जोखिम: सीमाओं (caps) के अभाव में संख्यात्मक और तकनीकी, दोनों प्रकार की वृद्धि शुरू हो सकती है।
    • उदा: हाइपरसोनिक और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ वारहेड की संख्या में विस्तार।

निष्कर्ष

‘न्यू स्टार्ट’ (New START) की समाप्ति व्यवस्थित द्विध्रुवीय संयम से अनिश्चित बहुध्रुवीय प्रतिद्वंद्विता की ओर संक्रमण को दर्शाती है। जब तक इसे व्यापक और अधिक न्यायसंगत शर्तों पर पुनर्कल्पित नहीं किया जाता, तब तक सत्यापन तंत्र, कटौती की प्रतिबद्धताओं और बहुपक्षीय विश्वास का कमजोर होना वैश्विक अप्रसार और निरस्त्रीकरण व्यवस्था को अस्थिर कर सकता है।

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