उत्तर:
दृष्टिकोण:
- भूमिका : हितविरोधिता की परिभाषा लिखें ।
- मुख्य विषय-वस्तु :
- वास्तविक और संभावित हितविरोधिता का उल्लेख कीजिये ।
- अपने विचारों को पुष्ट करने के लिए उदाहरण लिखें ।
- निष्कर्ष: तदनुसार निष्कर्ष लिखें ।
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भूमिका :
हितविरोधिता उस स्थिति को व्यक्त करती है, जहाँ किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत हित या वित्तीय हित उनकी व्यावसायिक क्षमता में निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य विषय-वस्तु :
वास्तविक और संभावित हितविरोधिता के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- वास्तविक हितविरोधिता : वास्तविक हितविरोधिता तब उत्पन्न होती है, जब किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत हित प्रत्यक्ष तौर पर उनके पेशेवर कर्त्तव्यों से टकराते हैं।
उदाहरण के लिए:
- एक सरकारी अधिकारी, जो किसी ऐसी कंपनी में शेयर रखता है, जो सरकारी अनुबंध के लिए बोली लगा रही है।
- एक डॉक्टर जो एक दवा कंपनी से उनकी दवाएं लिखने के लिए कमीशन प्राप्त करता है।
- एक न्यायाधीश, जो उस कंपनी में शेयरों का मालिक है, जो उनके समक्ष एक वाद में संलिप्त है।
- एक पुलिस अधिकारी जो जाँच कर रहे किसी संदिग्ध से उपहार या सहायता प्राप्त करता है।
- एक ऑडिट,र जिसे किसी कंपनी द्वारा अपने वित्तीय विवरणों का ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया जाता है, लेकिन वह उसी कंपनी को परामर्श सेवाएँ भी प्रदान करता है।
- हितों का संभावित टकराव : हितों का संभावित टकराव तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत हित संभावित रूप से उनके पेशेवर कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए:
- एक वित्तीय सलाहकार, जो ग्राहकों को कुछ निवेश उत्पादों की सिफारिश करने के लिए कमीशन प्राप्त करता है।
- एक पत्रकार, जिसके पास उस कंपनी के शेयर हैं, जिस पर वे रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
- एक वकील, जो ऐसे मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके हित उनकी अपनी व्यक्तिगत धारणाओं से टकराते हैं।
- एक अकादमिक शोधकर्त्ता, उस कंपनी से धन प्राप्त करता है जो एक ऐसा उत्पाद तैयार करता है, जिस पर वे शोध कर रहे हैं ।
- एक सरकारी अधिकारी, जिसका सरकारी अनुबंध चाहने वाली कंपनी से घनिष्ठ तौर पर व्यक्तिगत या वित्तीय संबंध हो।

निष्कर्ष:
इनमें से प्रत्येक स्थिति में, व्यक्ति के व्यक्तिगत हित संभावित रूप से उनके पेशेवर कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे हितों का टकराव उत्पन्न हो सकता है। पेशेवरों के लिए इन संभावित टकरावों के बारे में जागरूक होना और उन्हें प्रबंधित करने के लिए कदम उठाना महत्वपूर्ण है, जैसे- निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से खुद को अलग करना, संबंधित पक्षों को संभावित टकरावों का खुलासा करना, या एक नैतिक समिति से मार्गदर्शन प्राप्त करना।