//php print_r(get_the_ID()); ?>
उत्तर:
दृष्टिकोण:
|
परिचय:
संवैधानिक नैतिकता का तात्पर्य किसी देश के संविधान में निहित सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति व्यक्तियों, संस्थानों और सरकारों के पालन से है। यह मान्यता है कि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, और सभी नागरिकों और संस्थानों को इसके प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें कायम रखना चाहिए।
मुख्य विषयवस्तु:
लोकतांत्रिक समाज के कामकाज के लिए संवैधानिक नैतिकता को कायम रखना आवश्यक है, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि कानून का शासन कायम रहे और नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा हो।
यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे कोई संवैधानिक नैतिकता को कायम रख सकता है:
संवैधानिक नैतिकता को कायम रखने के कुछ उदाहरण यहां दिए गए हैं:
निष्कर्ष:
इस प्रकार ये उदाहरण बताते हैं कि नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक समाज के कामकाज के लिए संवैधानिक नैतिकता को अनुरक्षित करना कितना आवश्यक है। यह इस विश्वास को दर्शाता है कि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है और सभी नागरिकों और संस्थानों द्वारा इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
India’s AI Strategy: Balancing Global Cooperatio...
Cooperative Federalism in India: Centre–State Im...
Maternity Benefit Act 1961: Progress, Gaps and the...
Trump Revokes Endangerment Finding: Climate Rollba...
India–UAE CEPA: $200 Billion Trade Target and St...
Indian Scientific Service (ISS): Institutionalisin...
Women-Led Decentralized Renewable Energy (DRE) for...
News in Shorts: 17 February 2026
Startup India Fund of Funds 2.0: ₹10,000 Crore B...
CBDC-Based Public Distribution System: Digital Rup...
District Cooling: ICAP Strategy for Energy-Efficie...
NGT Upholds Environmental Clearance for Great Nico...
<div class="new-fform">
</div>
Latest Comments