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उत्तर:
दृष्टिकोण:
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परिचय:
1956 में स्वेज संकट, जिसे त्रिपक्षीय आक्रमण के रूप में भी जाना जाता है, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो ब्रिटिश साम्राज्यवादी शक्ति के पतन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यह संकट मिस्र, ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़ी घटनाओं की एक श्रृंखला के कारण उत्पन्न हुआ था और इसके समाधान ने भू-राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया।
मुख्य विषयवस्तु:
स्वेज संकट को पैदा करने वाली घटनाएँ:

ब्रिटेन की प्रतिक्रिया और संकट:
विश्व शक्ति के रूप में ब्रिटेन की स्थिति पर प्रभाव:
निष्कर्ष:
स्वेज़ संकट एक कूटनीतिक और सैन्य पराजय से कहीं अधिक था; यह ब्रिटिश साम्राज्यवाद के एक युग के अंत का प्रतीक था। यह नई विश्व व्यवस्था का एक स्पष्ट रहस्योद्घाटन था जहां संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्राथमिक मध्यस्थ थे, और ब्रिटेन जैसी पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों को अल्प भूमिका में समायोजित करना पड़ा। यह बदलाव वर्तमान मामलों में भी प्रतिध्वनित हो रहा है, जैसा कि ब्रिटेन द्वारा वैश्विक मंच पर, विशेष रूप से ब्रेक्सिट के बाद, अपनी भूमिका के पुनर्मूल्यांकन में देखा जा सकता है। स्वेज़ संकट वैश्विक शक्ति गतिशीलता की जटिलताओं और शाही अतिरेक के परिणामों पर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सबक बना हुआ है।
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