प्रश्न की मुख्य माँग
- महिलाओं पर केंद्रित बिना शर्त नकद अंतरण के लाभ
- राज्य सरकारों के समक्ष राजकोषीय चुनौतियों तथा दीर्घकालिक वित्तीय संधारणीयता से संबंधित चिंताएँ
- आगे की राह।
|
उत्तर
परिचय
महिला-केंद्रित बिना शर्त नकद अंतरण योजनाएँ भारत के राज्यों द्वारा संचालित एक प्रमुख कल्याणकारी हस्तक्षेप के रूप में उभरी हैं, जो वित्तीय समावेशन को सामाजिक सशक्तीकरण के साथ जोड़ती हैं। महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना तथा ओडिशा की सुभद्रा योजना से प्राप्त हालिया साक्ष्य घरेलू व्यय, बचत तथा कल्याणकारी परिणामों में सुधार को दर्शाते हैं। तथापि, राजकोषीय अनुशासन के बिना ऐसी योजनाओं का विस्तार राज्यों के ऋण, निवेश क्षमता तथा दीर्घकालिक वित्तीय संधारणीयता के संबंध में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करता है।
IAS coaching
महिला-केंद्रित नकद अंतरण के विकासात्मक लाभ
- महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को बढ़ावा: प्रत्यक्ष नकद अंतरण से महिलाओं का घरेलू संसाधनों एवं बचत पर नियंत्रण बढ़ता है।
- उदाहरण: महाराष्ट्र की योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के माह के अंत में बैंक खाते की औसत शेष राशि में 84% (₹6,884) की वृद्धि दर्ज की गई।
- घरेलू कल्याण परिणामों में सुधार: नकद अंतरण से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवश्यक उपभोग पर व्यय में वृद्धि होती है।
- उदाहरण: महाराष्ट्र एवं ओडिशा की योजनाओं से घरेलू व्यय में क्रमशः 46% एवं 28% की वृद्धि हुई, जिसमें चिकित्सा एवं शिक्षा पर अधिक खर्च दर्ज किया गया।
- वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करना: डिजिटल माध्यम से नकद अंतरण महिलाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ता है।
- उदाहरण: महाराष्ट्र की योजना के लाभार्थियों में यूपीआई (UPI) के उपयोग में वृद्धि देखी गई।
- आर्थिक संकट के विरुद्ध लचीलापन विकसित करना: नियमित आय सहायता, परिवारों को बीमारी, बेरोजगारी एवं महँगाई जैसी आकस्मिक परिस्थितियों का बेहतर ढंग से सामना करने में सहायता करती है।
राजकोषीय चुनौतियाँ एवं दीर्घकालिक संधारणीयता संबंधी चिंताएँ
- राज्य वित्त पर दबाव: बड़े पैमाने पर बिना शर्त नकद अंतरण से उत्पादक क्षमता में प्रत्यक्ष वृद्धि किए बिना आवर्ती व्यय (Recurring Expenditure) बढ़ता है।
- उदाहरण: आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, महिलाओं को दिए जाने वाले बिना शर्त नकद अंतरण के कारण वित्त वर्ष 2025–26 में राज्यों के बजट पर 1.7 लाख करोड़ रुपये का भार पड़ेगा, जो अत्यधिक ऋणग्रस्त राज्यों में कुल बजटीय व्यय का 8.26% तक है।
- विकासोन्मुख व्यय का विस्थापन: अत्यधिक कल्याणकारी व्यय के कारण अवसंरचना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर होने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है।
- उदाहरण: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेतावनी दी है कि राज्यों का बढ़ता ऋण निवेश-आधारित आर्थिक विकास को बाधित कर सकता है।
- ऋण की दीर्घकालिक संधारणीयता संबंधी चिंता: अनेक राज्य पहले से ही उच्च ऋण बोझ का सामना कर रहे हैं।
- उदाहरण: यद्यपि राज्यों का समेकित ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 29.2% है, फिर भी संरचनात्मक असमानता बढ़ी है। अत्यधिक ऋणग्रस्त राज्य असममित ऋण जाल (Asymmetric Debt Trap) का सामना कर रहे हैं, जैसे—
- पंजाब: 46.4% (GSDP)
- पश्चिम बंगाल: 38.9% (GSDP)
- बिहार: 36.8% (GSDP)
- विकासोन्मुख लक्ष्य के बजाय राजनीतिक लक्ष्यीकरण का जोखिम: बिना शर्त नकद अंतरण योजनाएँ साक्ष्य-आधारित कल्याणकारी उपायों के बजाय अल्पकालिक चुनावी वादों का स्वरूप ग्रहण कर सकती हैं।
आगे की राह: सतत महिला-केंद्रित कल्याण की दिशा में
- कैश-प्लस मॉडल अपनाना: आय सहायता को कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता तथा आजीविका के अवसरों के साथ जोड़ा जाए।
- उदाहरण: लाभार्थियों को दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा जाए।
- आवधिक समीक्षा एवं मुद्रास्फीति के अनुरूप संशोधन: अंतरण राशि में संशोधन मुद्रास्फीति तथा परिवारों की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाए, न कि बिना योजना के विस्तार के आधार पर।
- लक्षित वितरण एवं राजकोषीय दक्षता में सुधार: डिजिटल डेटाबेस का उपयोग कर अपवर्जन (Exclusion) एवं दोहराव (Duplication) को कम किया जाए, साथ ही कमजोर वर्गों की पहुँच सुनिश्चित की जाए।
- नकद अंतरण को उत्पादक सशक्तीकरण से जोड़ना: लाभार्थियों के बीच उद्यमिता, रोजगार तथा संपत्ति सृजन को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: बैंक-समर्थित आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ऋण सुविधा (Credit Linkage) प्रदान की जाए।
- राजकोषीय उत्तरदायित्व ढाँचा अपनाना: राज्य सरकारें कल्याणकारी व्यय और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अवसंरचना में निवेश के बीच संतुलन बनाए रखें।
Click to Know UPSC OnlyIAS Coaching Centres
निष्कर्ष
महिला-केंद्रित नकद अंतरण योजनाएँ महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता एवं घरेलू कल्याण को सुदृढ़ कर समावेशी विकास का एक प्रमुख माध्यम हैं। तथापि, इनकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिना शर्त उपभोग-आधारित सहायता से आगे बढ़कर सशक्तीकरण-उन्मुख कल्याणकारी मॉडल अपनाया जाए, जिसमें नकद अंतरण को क्षमता निर्माण, राजकोषीय अनुशासन तथा दीर्घकालिक आर्थिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए।