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Q. तुलनीय शैक्षणिक प्रदर्शन के बावजूद, STEM करियर में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है। उन प्रमुख संरचनात्मक और सांस्कृतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए जो महिलाओं को STEM क्षेत्रों में दीर्घकालिक करियर बनाने से रोकती हैं। (10 अंक, 150 शब्द)

July 10, 2025

GS Paper IIndian Society

प्रश्न की मुख्य माँग

  • प्रमुख संरचनात्मक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
  • STEM क्षेत्रों में दीर्घकालिक करियर बनाने से रोकती हैं।

उत्तर

शैक्षणिक प्रदर्शन में समानता हासिल करने के बावजूद, दुनिया भर में STEM करियर में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी काफी कम है। UNESCO की वर्ष 2023 की रिपोर्ट बताती है कि STEM स्नातकों में महिलाओं की संख्या केवल 35% है, और पिछले एक दशक में इसमें बहुत कम वृद्धि हुई है। यह अंतर योग्यता की कमी के बजाय गहरी जड़ें जमाए हुए संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाओं से उपजा है।

प्रमुख संरचनात्मक और सांस्कृतिक चुनौतियाँ

  • समान प्रदर्शन के बावजूद आत्मविश्वास में कमी: लड़कियाँ गणित/विज्ञान में समान रूप से अच्छा प्रदर्शन करती हैं, लेकिन समय के साथ उनका आत्मविश्वास कम होता जाता है। 
    • उदाहरण: UNESCO ने महिलाओं में STEM की पढ़ाई में बाधा के रूप में उनकी योग्यता में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास में कमी को पहचाना है।
  • शिक्षा प्रणालियों में लैंगिक रूढ़िवादिता: STEM को एक पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता है, जिसे पक्षपातपूर्ण शिक्षण पद्धति और परामर्श द्वारा और बल मिलता है। 
    • उदाहरण: STEM की व्यावहारिक शिक्षा और प्रत्यक्ष रोल मॉडल की कमी के कारण लड़कियाँ बहिष्कार को आत्मसात कर लेती हैं।
  • शिक्षा से कार्यबल में गिरावट: उच्च स्नातक दरों के बावजूद, बहुत कम महिलाएं दीर्घकालिक STEM नौकरियों में संलग्न होती हैं। 
    • उदाहरण: भारत में 43% महिला STEM स्नातक हैं (AISHE 2021–22), लेकिन टेक कार्यबल में केवल 26% (Nasscom 2022)।
  • कार्यस्थल पर लचीलेपन की कमी और पूर्वाग्रह: कठोर कार्यक्रम, कमज़ोर मातृत्व नीतियाँ और पक्षपातपूर्ण पदोन्नति, बीच करियर में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर करती हैं। 
    • उदाहरण: ‘लीकी पाइपलाइन’ (Leaky Pipeline) प्रभाव के कारण STEM भूमिकाओं से महिलाओं का पलायन बढ़ रहा है।
  • सामाजिक-आर्थिक और क्षेत्रीय बाधाएँ: सामाजिक मानदंड, देखभाल की अपेक्षाएँ और ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त पहुँच विकल्पों को सीमित करती हैं। 
    • उदाहरण: अर्ध-शहरी भारत में, सामाजिक दबाव के कारण महिलाएँ अक्सर करियर की बजाय परिवार को प्राथमिकता देती हैं।
  • पुरुष-प्रधान नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र: प्रौद्योगिकी स्टार्टअप और उन्नत क्षेत्रों में समावेशिता का अभाव है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र नवाचार के लिए प्रशंसित है, लेकिन यह अभी भी मुख्यतः पुरुषों के नेतृत्व में है।

चुनौतियों से निपटने के लिए आगे की राह

  • STEM शिक्षा में प्रारंभिक आत्मविश्वास का निर्माण: गणित और विज्ञान में लड़कियों का आत्मविश्वास, लड़कों के बराबर प्रदर्शन के बावजूद, समय के साथ कम होता जाता है, क्योंकि उनमें सहभागिता की कमी और प्रारंभिक रूढ़िवादिता होती है।
    • उदाहरण: UNESCO (वर्ष 2023) के अनुसार यद्यपि लड़कियाँ समान रूप से अच्छा प्रदर्शन करती हैं, लेकिन सामाजिक धारणाएं और प्रेरणाहीन शिक्षा पद्धति आत्म-संदेह पैदा करती हैं, जिससे STEM गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होती है।
  • स्कूलों में लैंगिक आधारित करियर मार्गदर्शन और पूर्वाग्रह को चुनौती देना: कैरियर परामर्श अक्सर इस विचार को बल देता है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र “पुरुषों का क्षेत्र” है, जो लड़कियों की आकांक्षाओं को सीमित करता है।
    • उदाहरण: लिंग आधारित परामर्श वैश्विक महिला STEM स्नातकों में केवल 35% का योगदान देता है, तथा सुधारों के बावजूद एक दशक में इसमें नगण्य वृद्धि हुई है।
  • STEM क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रोल मॉडल और मेंटरशिप: महिला मेंटरों की अनुपस्थिति इस विचार को पुष्ट करती है कि STEM में महिलाओं के लिए विकल्पों की कमी है, विशेष रूप से अत्याधुनिक क्षेत्रों में।
  • शिक्षा से कार्यबल में गिरावट का समाधान करना: उच्च नामांकन, कार्यबल प्रतिधारण सुनिश्चित नहीं करता है; ऐसी स्थिति में संक्रमण समर्थन अक्सर अनुपस्थित ही रहता है।
  • कार्यस्थल में सुधार से महिलाओं को बनाए रखने में सहायता मिलेगी: कठोर कार्यक्रम, मातृत्व/शिशु देखभाल सहायता का अभाव, तथा पक्षपातपूर्ण पदोन्नति प्रथाएं महिलाओं को STEM भूमिकाओं से बाहर कर देती हैं।
    • उदाहरण: शोधकर्ताओं ने एक ‘लीकी पाइपलाइन’ (Leaky Pipeline) की पहचान की है, जहाँ  महिलाएँ STEM करियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, विशेष रूप से बच्चे के जन्म के बाद या कार्यस्थल की अनम्यता के कारण।
  • नीति और कार्यान्वयन में लैंगिक समानता: STEM नीतियों में प्रायः लागू करने योग्य लैंगिक लक्ष्य या पृथक डेटा का अभाव होता है, जिससे वास्तविक प्रगति को ट्रैक करना कठिन हो जाता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय STEM नीतियों में 50% से भी कम में स्पष्ट रूप से लैंगिक समानता के लक्ष्य शामिल हैं, जिसके कारण प्रतीकात्मक, गैर-परिवर्तनकारी प्रयास होते हैं।
  • प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में सांस्कृतिक परिवर्तन: भारत में नवाचार के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि के बावजूद, महिलाओं को पुरुष-प्रधान स्टार्टअप और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में बहिष्कार का सामना करना पड़ता है।
  • बेहतर परिणामों के लिए समावेशी नवाचार को बढ़ावा देना: विविध टीमें उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से AI में नवाचार और निष्पक्षता में सुधार करती हैं।
    • उदाहरण: UNESCO ने चेतावनी दी है कि समरूप AI विकास टीमें प्रौद्योगिकी बुनियादी ढाँचे में पूर्वाग्रह को समाहित कर देती हैं, जिससे समानता और समावेशिता कमजोर होती है।

निष्कर्ष

इस प्रणालीगत अल्प प्रतिनिधित्व को संबोधित करने के लिए नामांकन बढ़ाने से कहीं अधिक की आवश्यकता है – इसके लिए संरचनात्मक सुधार, समावेशी कार्यस्थल, उत्तरदायी शिक्षाशास्त्र, तथा लागू करने योग्य लैंगिक-समानता अधिदेश की आवश्यकता है, ताकि भविष्य को आकार देने में महिलाओं की पूर्ण क्षमता को उजागर किया जा सके।

Despite comparable academic performance, women remain significantly underrepresented in STEM careers. Analyse the key structural and cultural challenges that deter women from pursuing long-term careers in STEM fields. in hindi

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