Q. मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारत में सड़क दुर्घटना मुआवजा काफी हद तक आय-आधारित है। अनुच्छेद 14 और 21 के तहत यह दृष्टिकोण किस प्रकार समानता और गरिमा के मुद्दों को उठाता है, इसका विश्लेषण कीजिए। कल्याणकारी राज्य में 'उचित मुआवजा' सुनिश्चित करने के लिए सुधारों का सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • समानता और गरिमा: अनुच्छेद-14 और 21 के अंतर्गत मुद्दे
  • उचित मुआवजे के लिए सुझाए गए सुधार।

उत्तर

मोटर वाहन अधिनियम (MVA) के तहत मुआवजा परंपरागत रूप से “गुणक विधि” (Multiplier method) द्वारा निर्धारित किया जाता है, जो पीड़ित की आयु और आय के आधार पर भुगतान की गणना करती है। हालाँकि इसका उद्देश्य परिवार को उनकी पूर्व आर्थिक स्थिति में वापस लाना है, लेकिन यह बाजार-आधारित तर्क एक कल्याणकारी राज्य में मानवीय मूल्यों का पदानुक्रम स्थापित करता है।

समानता और गरिमा: अनुच्छेद-14 और 21 के अंतर्गत मुद्दे

  • मूल्य में भेदभाव: मुआवजे को आय से जोड़ना एक संवैधानिक विरोधाभास उत्पन्न करता है, जहाँ अधिक आय वाले व्यक्ति का जीवन कानूनी रूप से श्रमिक के जीवन से अधिक “मूल्यवान” माना जाता है।
    • उदाहरण: अलग-अलग भुगतान अनुच्छेद-14 के कानून के समक्ष समानता के वादे का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि वे मानव जीवन को एक बाजार वस्तु के रूप में मानते हैं।
  • अवैतनिक श्रम का हाशिए पर जाना: गृहिणियों और बच्चों को अक्सर एक “काल्पनिक आय” दी जाती है, जो उनके वास्तविक सामाजिक और भावनात्मक योगदान को ध्यान में नहीं रखती।
    • उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय ने कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस (वर्ष 2021) मामले में इस बात पर जोर दिया कि एक गृहिणियों का कार्य राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • गरिमा बनाम गणित: किसी मानव जीवन को उसकी कमाई क्षमता के सांख्यिकीय आकलन तक सीमित करना अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त अंतर्निहित गरिमा का हनन करता है।
    • उदाहरण: न्यायालयों ने यह माना है कि “उचित मुआवजा” केवल आर्थिक हानि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें भावनात्मक आघात के लिए “गरिमा क्षतिपूर्ति” भी शामिल होनी चाहिए।
  • तुलनात्मक विसंगति: सड़क क्षेत्र के विपरीत, रेलवे अधिनियम (वर्ष 1989) और हवाई परिवहन अधिनियम पीड़ित की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना समान मुआवजा प्रदान करते हैं।
    • उदाहरण: रेल पीड़ितों को ₹8 लाख की एक निश्चित राशि मिलती है, जो परिवहन के सभी साधनों में मानकीकृत “सुरक्षा के अधिकार” के अभाव को उजागर करती है।

‘उचित मुआवजे’ के लिए सुझाए गए सुधार

  • मानकीकृत आधार मुआवजा: “दोषरहित” दायित्व के लिए एक उच्च अनिवार्य न्यूनतम सीमा लागू करना, ताकि प्रत्येक नागरिक को आय की परवाह किए बिना सम्मानजनक न्यूनतम मुआवजा मिल सके।
  • घरेलू देखभाल का महत्त्व: लैंगिक-आधारित न्यायसंगत भुगतान सुनिश्चित करने के लिए गैर-कमाई करने वाले पीड़ितों की “अवसर लागत” और “सेवा मूल्य” को मोटर वाहन दुर्घटना के मुआवजे की अनुसूची में औपचारिक रूप से एकीकृत करना।
  • स्वचालित मुद्रास्फीति समायोजन: जीवन यापन की लागत के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए “काल्पनिक आय” स्लैब और पारंपरिक मदों (अंतिम संस्कार, संपत्ति की हानि) का आवधिक और अनिवार्य संशोधन।
  • व्यापक कैशलेस सहायता: “स्वास्थ्य के अधिकार” की रक्षा के लिए दीर्घकालिक मुकदमेबाजी के बजाय तत्काल चिकित्सा राहत और आघात देखभाल को प्राथमिकता देना।
    • उदाहरण: कैशलेस उपचार योजना 2025 “गोल्डन ऑवर” के लिए ₹1.5 लाख तक प्रदान करती है, जिससे धन की परवाह किए बिना जीवन रक्षक समानता सुनिश्चित होती है।

निष्कर्ष

एक कल्याणकारी राज्य का दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि ‘हानि का मात्रात्मक आकलन’ ‘न्याय की नैतिकता’ पर वरीयता न प्राप्त कर ले। इस संदर्भ में, एक ऐसे हाइब्रिड प्रतिकर मॉडल की ओर संक्रमण—जो एक समान एवं पर्याप्त आधार भुगतान को आय-आधारित अतिरिक्त पूरकों के साथ समन्वित करता हो। मोटर वाहन अधिनियम को उस संवैधानिक दृष्टिकोण के अधिक निकट ले आएगा, जो प्रत्येक मानव जीवन को स्वाभाविक रूप से, समान रूप से और गरिमामय मूल्य प्रदान करता है।

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