Q. नवीकरणीय ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इथेनॉल उत्पादन जैसे नए क्षेत्रों के साथ, भारत को विकास के अवसरों के साथ-साथ जोखिमों का भी सामना करना पड़ रहा है, जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में उजागर किया गया है। नीति निर्माता नवाचार-संचालित विकास और उभरते आर्थिक और सामाजिक जोखिमों के शमन के बीच संतुलन कैसे बना सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • उभरते आर्थिक जोखिमों को कम करना।
  • उभरते सामाजिक जोखिमों को कम करना।
  • संबंधित चिंताएँ।

उत्तर

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत के वर्तमान विकास चरण को “स्प्रिंट की गति वाली मैराथन” के रूप में वर्णित किया है। हालाँकि एआई (AI), नवीकरणीय ऊर्जा और एथेनॉल जैसे नए युग के क्षेत्र ‘विकसित भारत @2047’ का मार्ग प्रशस्त करते हैं, लेकिन वे “संरचनात्मक विषमताएँ” भी उत्पन्न करते हैं। अब नीति निर्माताओं का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि यह नवाचार-संचालित गति उभरती आर्थिक कमजोरियों या सामाजिक असमानताओं से न टकराए।

उभरते आर्थिक जोखिमों का न्यूनीकरण 

  • चरणबद्ध एआई अंगीकरण: एक व्यापक कानून के बजाय, नीति निर्माता अपरिपक्व तकनीकों में प्रारंभिक निवेश से उत्पन्न दीर्घकालिक बाध्यताओं से बचने हेतु पहले समन्वय स्थापित करते हैं और बाद में बाध्यकारी नीतियाँ लागू करते हैं।”
    • उदाहरण: सर्वेक्षण कुशल संसाधन उपयोग सुनिश्चित करने और कॉरपोरेट एकाधिकार को रोकने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट, छोटे और ओपन-वेट एआई मॉडल पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश करता है।
  • संतुलित एथेनॉल मूल्य निर्धारण: विसंगतियों को कम करने के लिए, सरकार का ध्यान दूसरी पीढ़ी (2G) के जैव ईंधन की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जो खाद्य फसलों के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं करते हैं।
    • उदाहरण: मक्का-आधारित एथेनॉल की प्रशासित कीमतें 11.7% CAGR (FY22-25) की दर से बढ़ीं, जिससे दलहन और तिलहन के रकबे में कमी के “प्रारंभिक चेतावनी संकेत” मिले।
  • ग्रिड स्थिरता पर फोकस : नवीकरणीय ऊर्जा में, नीति केवल क्षमता जोड़ने से हटकर बेसलोड पर्याप्तता और भंडारण सुनिश्चित करने की ओर जा रही है ताकि विद्युत पारेषण अवरोध को कम किया जा सके।
    • उदाहरण: स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत ने वर्ष 2025 के अंत में 2.3 TWh सौर उत्पादन में कटौती की, जो पारेषण बुनियादी ढाँचे से आगे निकलने वाले संक्रमण के जोखिम को उजागर करता है।

उभरते सामाजिक जोखिमों का शमन 

  • मानव-केंद्रित एआई तैनाती: नीति निर्माता एआई को प्रतिस्थापन के बजाय श्रम संवर्द्धन के उपकरण के रूप में प्राथमिकता दे रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।
    • उदाहरण: सर्वेक्षण बुजुर्गों की देखभाल, नर्सिंग और दस्तकार शिल्प जैसे “एआई-व्यवधान-रोधी” व्यवसायों की पहचान करता है, और इन्हें “फैशनेबल” कॅरियर विकल्प बनाने का आग्रह करता है।
  • खाद्य बनाम ईंधन संतुलन: पोषण सुरक्षा की रक्षा के लिए, सरकार फीडस्टॉक कैप लागू कर रही है ताकि एथेनॉल उत्पादन को मुख्य आहार की कीमतों में मुद्रास्फीति उत्पन्न करने से रोका जा सके।
    • उदाहरण: “ईंधन बनाम खाद्य” दुविधा ने पहले ही पोल्ट्री और पशुपालन उद्योगों के लिए आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर दी है जो मक्का पर निर्भर हैं।
  • हरित नौकरियों के लिए री-स्किलिंग: व्यावसायिक प्रशिक्षण में तर्क और निर्णय जैसी बुनियादी क्षमताओं को एकीकृत करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कार्यबल तेजी से तकनीकी परिवर्तन के अनुकूल हो सके।
    • उदाहरण: सर्वेक्षण ग्रामीण आजीविका को आधुनिक तकनीक के साथ संरेखित करने के लिए एक विधायी पुनर्संरचना के रूप में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को उचित ठहराता है।

संबंधित चिंताएँ

  • संरचनात्मक विषमताएँ: वैश्विक एआई विकास कुछ अग्रणी कंपनियों में केंद्रित है, जिससे भारत के लिए “तकनीकी निर्भरता” का जोखिम उत्पन्न हो रहा है।
  • आयात निर्भरता : एथेनॉल के लिए मक्का पर अत्यधिक ध्यान भारत की खाद्य तेल आयात पर निर्भरता को गहरा कर सकता है, क्योंकि किसान तिलहन की खेती से दूर हट सकते हैं।
  • पूँजी संबंधी बाधाएँ: नवीकरणीय ऊर्जा और एआई हार्डवेयर की उच्च सामग्री तीव्रता के लिए भारी पूँजी की आवश्यकता होती है, जो विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में “जोखिम से बचने वाली” बनी हुई है।
  • नियामक अतिरेक : यह जोखिम है कि कठोर स्थानीयकरण या निर्देशात्मक नियंत्रण उस नवाचार को दबा सकते हैं, जिसका नेतृत्व भारत करना चाहता है।

निष्कर्ष

नीति निर्माताओं को नियामक सैंडबॉक्स बनाकर “रणनीतिक संयम” अपनाना चाहिए, जो सार्वजनिक हित की रक्षा करते हुए प्रयोग को सक्षम बनाते हैं। इसके लिए पीएलआई (PLI) प्रोत्साहनों को सततता ऑडिट से जोड़ना और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने तथा आर्थिक मार्गों का विस्तार करने के लिए विकेंद्रीकृत, अनुप्रयोग-संचालित प्रणालियों में निवेश करना आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि विकास और लचीलापन एक साथ आगे बढ़ें।

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