संदर्भ
केंद्र सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तैयार किए गए भारत के भूकंप क्षेत्र निर्धारण मानचित्र के प्रस्तावित संशोधन को इसकी कार्यप्रणाली और बुनियादी ढाँचे तथा निर्माण लागत में संभावित वृद्धि को लेकर चिंताओं के कारण वापस ले लिया।
संबंधित तथ्य
- अब तक भारत मुख्य रूप से एक सरल स्थिर जोनिंग मॉडल का उपयोग करता रहा है और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रायिकतात्मक भूकंपीय खतरा आकलन (PSHA) जैसे वैश्विक ढाँचे को अपनाने की योजना बना रहा था।
- संस्थागत आपत्ति: निम्नलिखित संस्थानों ने चिंता व्यक्त की:
- आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
- गृह मंत्रालय
- केंद्रीय जल आयोग
- राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण
प्रायिकतात्मक भूकंपीय खतरा आकलन (PSHA)
- प्रायिकतात्मक भूकंपीय खतरा आकलन (PSHA) एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसका उपयोग किसी निश्चित समय अवधि में किसी विशेष स्थान पर भूकंप के कारण होने वाले भूमि कंपन की संभावना और तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
- यह विभिन्न भूकंप तीव्रताओं की संभावना, उनके स्थान, उनकी आवृत्ति तथा संभावित भू-कंपन को शामिल करके भूकंपीय जोखिम का मूल्यांकन करता है।
- निर्धारक भूकंपीय आकलन के विपरीत, जो केवल एक अधिकतम संभावित भूकंप परिदृश्य को मानता है, PSHA कई संभावित भूकंप घटनाओं और उनके प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए सांख्यिकीय तथा प्रायिकता आधारित मॉडल का उपयोग करता है।
- यह दृष्टिकोण भूकंपीय खतरों का अधिक यथार्थवादी और गतिशील आकलन प्रदान करता है।
महत्त्व
- PSHA का उपयोग भूकंप-प्रवण क्षेत्रों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भूकंप-रोधी भवनों, अवसंरचना, बाँधों, परमाणु संयंत्रों और शहरी नियोजन ढाँचों के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।
- यह विधि इंजीनियरों को संभावित भूमि कंपन के स्तर के आधार पर सुरक्षित डिजाइन मानक और भवन निर्माण संहिताएँ निर्धारित करने में सहायता करती है।
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भूकंप जोनिंग के बारे में
- भूकंप जोनिंग किसी देश को भूकंप की तीव्रता और संभावना के आधार पर विभिन्न भूकंपीय क्षेत्रों में विभाजित करती है।
- यह भवन डिजाइन मानकों, आपदा तैयारी और अवसंरचना योजना निर्धारित करने में सहायता करती है।
- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) वर्तमान में भारत को भूकंप जोखिम के आधार पर चार भूकंपीय क्षेत्रों (II, III, IV और V) में वर्गीकृत करता है।
प्रस्तावित परिवर्तन
- BIS संशोधन में एक नई उच्च जोखिम भूकंपीय श्रेणी जोन VI को शामिल करने का प्रयास किया गया।
- शामिल किए जाने वाले प्रस्तावित क्षेत्र
- कश्मीर का अधिकांश भाग
- हिमालयी क्षेत्र के कुछ भाग
- गुजरात का कच्छ क्षेत्र
- पूर्वोत्तर भारत के कुछ भाग
सेस्मिक जोनेशन मैप क्या है?
- ‘सेस्मिक जोनेशन मैप’ एक वैज्ञानिक मानचित्र होता है, जो भूकंप की संभावना और तीव्रता के आधार पर किसी देश या क्षेत्र को विभिन्न भूकंपीय जोखिम क्षेत्रों में विभाजित करता है।
- यह भूकंप जोखिम का आकलन करने, भवन निर्माण कोड का मार्गदर्शन करने और आपदा तैयारी में सहायता करता है।
- इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
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चिंताएँ
- शहरी विकास पर प्रभाव: शहरी योजनाकारों को चिंता है कि ऐसी जोनिंग पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में विकास और अवसंरचना गतिविधियों को धीमा कर सकती है।
- ऐसी योजना अधिक आवास को अनौपचारिक क्षेत्र की ओर धकेल सकती है, जो पहले से ही भारत के लगभग 80% घरों का हिस्सा है।
- निर्माण लागत में वृद्धि: अनुमान है कि एक जोन बढ़ने पर लागत लगभग 20% और दो जोन बढ़ने पर लगभग एक-तिहाई तक बढ़ सकती है।
- मेट्रो रेल प्रणालियों, बाँधों और बिजली संयंत्रों जैसी प्रमुख अवसंरचनाओं के लिए लागत का प्रभाव और अधिक हो सकता है।
- जलवायु और अवसंरचना प्रभाव: भारत में निर्माण क्षेत्र कार्बन उत्सर्जन का एक प्रमुख स्रोत है।
- कड़े भूकंपीय डिजाइन मानकों से सीमेंट और स्टील जैसी सामग्री का उपयोग बढ़ सकता है, जिससे लागत और उत्सर्जन दोनों बढ़ सकते हैं।
भूकंप जोनिंग संशोधन का महत्त्व
- भूकंप जोनिंग का संशोधन महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत:-
- तेजी से शहरी अवसंरचना का विस्तार कर रहा है।
- भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में मेट्रो, राजमार्ग, बाँध और ऊर्जा अवसंरचना का निर्माण कर रहा है।
- जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के कारण बढ़ते आपदा जोखिमों का सामना कर रहा है।