भारत के रक्षा निर्यात में वृद्धि

4 Apr 2026

संदर्भ

हाल ही में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ (वित्त वर्ष 2025–26) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया, जो स्वदेशी सैन्य उपकरणों की बढ़ती वैश्विक माँग और तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।

रक्षा निर्यात में प्रमुख प्रवृत्तियाँ

  • निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि: रक्षा निर्यात में 62.66% की वृद्धि हुई, जो ₹23,622 करोड़ (वित्त वर्ष 2024–25) से बढ़कर ₹38,424 करोड़ (वित्त वर्ष 2025–26) हो गया।

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  • पाँच वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि: भारत के रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2020–21 से वित्त वर्ष 2025–26 के बीच लगभग तीन गुना बढ़े हैं, जो निरंतर नीतिगत सफलता को दर्शाता है।
  • रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की अग्रणी भूमिका: रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों ने 151% की वृद्धि दर्ज की, और ₹21,071 करोड़ (वित्त वर्ष 2025–26) का योगदान दिया।
  • निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका: निजी क्षेत्र के निर्यात में 14% की वृद्धि हुई और ₹17,353 करोड़ (वित्त वर्ष 2025–26) का योगदान रहा।
  • वैश्विक पहुँच का विस्तार: भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात किए, जिससे वैश्विक उपस्थिति सुदृढ़ हुई।
    • म्याँमार (कुल निर्यात का 28%) सबसे बड़ा गंतव्य बना, इसके बाद फिलीपींस (19%) और आर्मेनिया (15%) रहे, जो मिलकर भारत के कुल निर्यात गंतव्यों का 60% से अधिक हिस्सा बनाते हैं।
  • नौसैनिक प्रभुत्व: वर्ष 2016 से 2025 के मध्य कुल रक्षा निर्यात में जहाजों का हिस्सा 55% रहा, जो अन्य सभी श्रेणियों से अधिक है।
  • निर्यातकों की संख्या में वृद्धि: रक्षा निर्यातकों की संख्या 128 (वित्त वर्ष 2024–25) से बढ़कर 145 (वित्त वर्ष 2025–26) हो गई।

रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु प्रमुख पहलें

  • iDEX (रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवाचार): स्टार्ट-अप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजारों के लिए स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियाँ विकसित करने में समर्थन प्रदान करता है।
  • रक्षा औद्योगिक गलियारे: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में विनिर्माण केंद्रों की स्थापना करके उत्पादन और निर्यात पारितंत्र को सुदृढ़ करता है।
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ: चयनित रक्षा वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित कर घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देती हैं।
  • सरलीकृत निर्यात प्रक्रियाएँ (व्यवसाय सुगमता): विलंब को कम करने और व्यवसाय करने की सुगमता बढ़ाने हेतु ऑनलाइन प्राधिकरण और सरल लाइसेंसिंग की व्यवस्था करती हैं।
  • निर्यात संवर्द्धन तंत्र: नए अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों तक पहुँच के लिए बाजार जानकारी और समर्थन प्रदान करता है।

रक्षा निर्यात का महत्त्व

  • आर्थिक वृद्धि और रोजगार: विनिर्माण को बढ़ावा देता है, उच्च-कौशल रोजगार सृजित करता है और वर्ष 2029 तक ₹50,000 करोड़ के निर्यात का लक्ष्य रखता है।
  • रणनीतिक और भू-राजनीतिक प्रभाव: भारत की एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करता है तथा आर्मेनिया एवं फिलीपींस जैसे देशों के साथ संबंधों को मजबूत करता है।
  • आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत): आयात पर निर्भरता को कम करता है और उन्नत हथियार प्रणालियों के लिए घरेलू क्षमता का निर्माण करता है।
  • वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकरण: भारत को वैश्विक स्तर पर रक्षा घटकों और प्लेटफॉर्म का एक महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनाता है।
  • प्रौद्योगिकीय उन्नति: उन्नत और अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के नवाचार और विकास को प्रोत्साहित करता है।
भारत के रक्षा निर्यात में वृद्धि

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