संदर्भ
हाल ही में केंद्र सरकार ने बढ़ती सड़क दुर्घटना जनित मृत्यु की पृष्ठभूमि में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 215B के अंतर्गत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (NRSB) का गठन किया है।
संबंधित तथ्य
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की भारत में सड़क दुर्घटनाएँ, 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में 1,77,175 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई, जो अब तक दर्ज की गई सर्वाधिक संख्या है।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं एवं मृत्यु की उच्च संख्या के कारण
- मानवीय त्रुटियाँ: अत्यधिक गति, नशे की अवस्था में वाहन चलाना, असावधानीपूर्वक वाहन चलाना, हेलमेट/सीट बेल्ट का उपयोग न करना तथा यातायात नियमों का उल्लंघन इसके प्रमुख कारण हैं।
- असुरक्षित सड़क अवसंरचना: सड़क अभिकल्पन की कमियाँ, ब्लैक स्पॉट, अपर्याप्त सड़क संकेतक, पैदल यात्रियों की सुविधाओं का अभाव तथा सड़क रखरखाव की खराब स्थिति।
- कमजोर प्रवर्तन एवं सुशासन: यातायात कानूनों का अपर्याप्त प्रवर्तन, चालक लाइसेंस प्रणाली की कमियाँ तथा सड़क सुरक्षा एजेंसियों के मध्य संस्थागत समन्वय का अभाव।
- असुरक्षित वाहन एवं मोटर वाहनों का तीव्र प्रसार: वाहनों की जर्जर अवस्था, अतिभारण, मोटर वाहनों की संख्या में तीव्र वृद्धि तथा उनके अनुरूप सड़क अवसंरचना के अभाव के कारण मिश्रित यातायात की समस्या सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाती है।
- दुर्घटना के बाद अपर्याप्त देखभाल: आपातकालीन प्रतिक्रिया में विलंब, ट्रॉमा सेंटरों की कमी, अपर्याप्त एंबुलेंस सेवाएँ तथा गोल्डन ऑवर में दुर्घटना ग्रस्त व्यक्तियों को सुमुचित चिकित्सकीय सेवा न प्राप्त होना, इन मृत्यु की संख्या में बढोतरी करता है।
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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (NRSB) के बारे में:
- गठन: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (NRSB) एक वैधानिक सलाहकारी निकाय है, जिसका गठन मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 215B के अंतर्गत किया गया है, जिसे मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा जोड़ा गया था।

- संरचना: बोर्ड में सड़क अभियांत्रिकी, वाहन सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, विधि प्रवर्तन तथा लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले विशेषज्ञों एवं केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
- उद्देश्य: सड़क सुरक्षा में सुधार, सड़क दुर्घटनाओं में कमी तथा सड़क सुरक्षा शासन को सुदृढ़ करने के उपायों पर सरकारों को परामर्श देना।
बोर्ड का अधिदेश:
- केंद्र एवं राज्य सरकारों को सड़क सुरक्षा से संबंधित विषयों पर परामर्श देना।
- तकनीकी विशेषज्ञों एवं सरकारी अधिकारियों का मिश्रित प्रतिनिधित्व होना।
- प्रवर्तन संबंधी शक्तियों से युक्त नियामक निकाय के स्थान पर एक समन्वयकारी एवं परामर्शदात्री निकाय के रूप में कार्य करना।
संबद्ध अंतरराष्ट्रीय रूपरेखा
- सड़क सुरक्षा हेतु संयुक्त राष्ट्र कार्रवाई दशक (2021–2030): वर्ष 2030 तक सड़क यातायात दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु एवं चोटों की संख्या में कम-से-कम 50% की कमी लाने का लक्ष्य रखता है।
- सतत् विकास लक्ष्य (SDG) 3.6: सड़क यातायात दुर्घटनाओं से होने वाली वैश्विक मृत्यु एवं दुर्घटनाओं की संख्या को आधा करने का प्रावधान करता है।
- सतत् विकास लक्ष्य (SDG) 11.2: सभी के लिए सुरक्षित, किफायती, सुलभ एवं सतत परिवहन प्रणालियों तक पहुँच सुनिश्चित करने पर बल देता है।
- सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण (WHO/UN): सड़कों, वाहनों, गति सीमा तथा दुर्घटना के बाद की देखभाल को इस प्रकार अभिकल्पित करने की वकालत करता है कि मानवीय त्रुटियाँ होने पर भी मृत्यु की संभावना न्यूनतम रखा जा सके।
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संबद्ध संवैधानिक एवं विधिक उपबंध
- संवैधानिक उपबंध:
- अनुच्छेद-21: न्यायिक व्याख्या के अनुसार, जीवन के अधिकार में सुरक्षित सड़कें तथा सुरक्षित आवागमन का अधिकार भी शामिल है।
- अनुच्छेद-38: राज्य को न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करके जनकल्याण को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद-47: राज्य को लोक स्वास्थ्य में सुधार करने का दायित्व सौंपता है, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु एवं चोटों की रोकथाम भी शामिल है।
- सातवीं अनुसूची: सड़क परिवहन एवं यातायात केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी का विषय है, जिसके लिए प्रभावी सड़क सुरक्षा शासन हेतु सहकारी संघवाद आवश्यक है।
- विधिक उपबंध:
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988: सड़क परिवहन, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, सड़क सुरक्षा तथा यातायात विनियमन के लिए विधिक ढाँचा प्रदान करता है।
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019: धारा 215B को सम्मिलित करते हुए राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड की स्थापना का प्रावधान किया तथा यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए दंडों को अधिक कठोर बनाया।
- केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989: वाहन सुरक्षा, पंजीकरण, लाइसेंसिंग तथा उत्सर्जन मानकों से संबंधित प्रावधान निर्धारित करते हैं।