संदर्भ
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि भारत के नागरिक ‘वॉच (Watch)’ श्रेणी की शक्तिशाली प्रतिजैविक (Antibiotics) औषधियों का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जबकि ‘एक्सेस (Access)’ तथा ‘रिजर्व (Reserve)’ श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का अपेक्षाकृत कम उपयोग किया जा रहा है।
संबंधित तथ्य
- यह देशों में संक्रमण के बोझ तथा रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) के प्रतिरूपों के आधार पर उनकी एंटीबायोटिक आवश्यकताओं का आकलन करने हेतु विकसित विश्व का पहला वैश्विक रूपरेखा (Framework) है।
एंटीबायोटिक (Antibiotics) के बारे में:
- एंटीबायोटिक ऐसे रोगाणुरोधी औषधियाँ हैं, जिनका उपयोग जीवाणु (बैक्टीरियल) संक्रमणों के उपचार के लिए किया जाता है। ये जीवाणुओं को नष्ट करके या उनकी वृद्धि को रोककर कार्य करती हैं।
- ये सामान्य सर्दी, इन्फ्लुएंजा अथवा गले के अधिकांश वायरल संक्रमणों जैसे विषाणु (वायरल) संक्रमणों पर प्रभावी नहीं होती हैं।
- रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR): यह ऐसी स्थिति है, जिसमें सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक एवं परजीवी) रोगानुरोधी औषधियों के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं, जिससे संक्रमणों का उपचार अधिक कठिन हो जाता है तथा रोग के प्रसार, गंभीर बीमारी और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
WHO का ‘अवेयर’ (AWaRe) वर्गीकरण
- ‘अवेयर’ (AWaRe) वर्गीकरण: यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित एंटीबायोटिक वर्गीकरण प्रणाली है, जो एंटीबायोटिक्स को उनकी कार्य-परास (Spectrum of Activity), रोगाणुरोधी प्रतिरोध को बढ़ावा देने की क्षमता तथा अनुशंसित उपयोग प्रतिरूपों के आधार पर एक्सेस (Access), वॉच (Watch) और रिजर्व (Reserve) श्रेणियों में वर्गीकृत करती है।
| श्रेणी |
उद्देश्य |
जोखिम स्तर |
| एक्सेस (Access) |
सामान्य संक्रमणों के उपचार हेतु प्रथम विकल्प की एंटीबायोटिक औषधियाँ |
रोगानुरोधी प्रतिरोध विकसित होने का अपेक्षाकृत कम जोखिम |
| वॉच (Watch) |
विशिष्ट संक्रमणों के उपचार हेतु व्यापक-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक औषधियाँ |
एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा देने का अधिक जोखिम |
| रिजर्व (Reserve) |
बहुऔषधि-प्रतिरोधी संक्रमणों के उपचार हेतु अंतिम विकल्प की एंटीबायोटिक औषधियाँ |
केवल तब उपयोग किया जाए, जब अन्य सभी उपचार विकल्प विफल हो जाएँ। |
- एंटीबायोटिक्स के उदाहरण:
- सामान्यतः उपयोग की जाने वाली वॉच (Watch) श्रेणी की एंटीबायोटिक: सेफ्ट्रियाक्सोन (Ceftriaxone), सेफिक्सीम (Cefixime), एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin), सिप्रोफ्लॉक्सासिन (Ciprofloxacin), लेवोफ्लॉक्सासिन (Levofloxacin), पाइपेरासिलिन-टैजोबैक्टम (Piperacillin–Tazobactam)।
- रिजर्व (Reserve) श्रेणी की एंटीबायोटिक: मेरोपेनेम (Meropenem), कोलिस्टिन (Colistin), सेफ्टाजिडीम–एविबैक्टम (Ceftazidime–Avibactam), सेफिडेरोकोल (Cefiderocol), एज़ट्रियोनैम–एविबैक्टम (Aztreonam–Avibactam)।
भारत से संबंधित अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- अनुशंसित एवं वास्तविक एंटीबायोटिक उपयोग के बीच असंगति: अध्ययन के अनुसार, भारत को आदर्श रूप से प्रति 1,000 जनसंख्या प्रतिदिन 14.7 डिफाइंड डेली डोज (DID) एंटीबायोटिक की आवश्यकता है, जिसमें:
- एक्सेस (Access): 7.8 DID
- वॉच (Watch): 6 DID
- रिजर्व (Reserve): 0.99 DID
- हालाँकि, वास्तविक एंटीबायोटिक उपभोग 18.3 DID है, जिसमें:
- एक्सेस (Access): 4.5 DID (आवश्यकता से कम)
- वॉच (Watch): 9.3 DID (आवश्यकता से अधिक)
- रिजर्व (Reserve): 0.19 DID (आवश्यकता से बहुत कम)
- ‘एक्सेस (Access)’ श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का कम उपयोग: कुल एंटीबायोटिक उपयोग में एक्सेस (Access) श्रेणी का हिस्सा केवल 27% है, जबकि अनुमानित आवश्यकता 52.3% है।
| मापदंड |
आदर्श (अनुमानित) |
वास्तविक |
| कुल एंटीबायोटिक उपयोग (DID*) |
14.7 |
18.3 |
| एक्सेस (Access) श्रेणी के एंटीबायोटिक (DID) |
7.8 |
4.5 |
| वॉच (Watch) श्रेणी के एंटीबायोटिक (DID) |
6.0 |
9.3 |
| रिजर्व (Reserve) श्रेणी के एंटीबायोटिक (DID) |
0.99 |
0.19 |
| एक्सेस (Access) श्रेणी से एंटीबायोटिक उपयोग का हिस्सा |
52.3% |
27% |
*DID = प्रति 1,000 जनसंख्या प्रतिदिन परिभाषित दैनिक खुराक (Defined Daily Doses)
वैश्विक निष्कर्ष
- अध्ययन का दायरा: शोधकर्ताओं ने 186 देशों एवं क्षेत्रों में एंटीबायोटिक उपयोग का विश्लेषण किया, जो विश्व की 99.8% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक समग्र उपयोग: 72% देशों में अनुमानित आवश्यकता से अधिक एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया गया।
- AMR को बढ़ावा देने वाली एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग: 99% देशों में उन एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग किया गया, जो रोगाणुरोधी प्रतिरोधी (AMR) को सर्वाधिक बढ़ावा देती हैं।
अध्ययन द्वारा सुझाए गए उपाय
- रोगाणुरोधी औषधियों के विवेकपूर्ण उपयोग (Antimicrobial Stewardship) को सुदृढ़ करना: एंटीबायोटिक्स के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने हेतु रोगाणुरोधी औषधियों के विवेकपूर्ण उपयोग कार्यक्रमों को सशक्त बनाया जाए।
- ‘एक्सेस (Access)’ एंटीबायोटिक्स का उपयोग बढ़ाना: जहाँ चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो, वहाँ एक्सेस (Access) श्रेणी की एंटीबायोटिक्स के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
- ‘वॉच (Watch)’ एंटीबायोटिक्स के उपयोग को सीमित करना: वॉच (Watch) श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल विशिष्ट चिकित्सीय आवश्यकताओं तक सीमित रखा जाए।
- ‘रिजर्व (Reserve)’ एंटीबायोटिक्स का संरक्षण: रिजर्व (Reserve) श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल प्रमाणित अथवा प्रबल रूप से संदिग्ध बहुऔषधि-प्रतिरोधी संक्रमणों के मामलों में किया जाए।
- साक्ष्य-आधारित औषधि-निर्धारण को बढ़ावा देना: सूक्ष्मजैविक परीक्षणों (Microbiological Testing) को सुदृढ़ कर साक्ष्य-आधारित एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन सुनिश्चित किए जाएँ।
- संक्रमण नियंत्रण को सुदृढ़ करना: संक्रमण रोकथाम उपायों को मजबूत किया जाए तथा शल्यक्रियात्मक संक्रमण निरोध (Surgical Prophylaxis) का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए।