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ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस, 2026

29 Apr 2026

संदर्भ

ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस, 2026 (GRFC) वैश्विक भुखमरी की स्थिति के और अधिक गंभीर होने को रेखांकित करती है, जहाँ 266 मिलियन से अधिक लोग संघर्ष एवं वित्तीय संसाधनों में कमी के बीच तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

GRFC 2026 के प्रमुख निष्कर्ष

  • वैश्विक भुखमरी स्तर में वृद्धि: वर्ष 2025 में 47 देशों में लगभग 266 मिलियन लोग उच्च स्तर की अत्यधिक खाद्य असुरक्षा से प्रभावित थे, जिसमें वर्ष 2020 के बाद से इसका अनुपात 20% से अधिक बना हुआ है।
  • संघर्ष क्षेत्रों में संकेंद्रण: संघर्ष प्रमुख कारक के रूप में उभरा, जिसने लगभग 147 मिलियन लोगों (56%) को प्रभावित किया, इसने जलवायु-जनित तनावों से भी अधिक प्रभावित किया।
  • गंभीर संकट श्रेणियों में वृद्धि: लगभग 1.4 मिलियन लोग IPC चरण 5 (विनाशकारी स्थिति) में थे, जो वर्ष 2016 की तुलना में नौ गुना वृद्धि दर्शाता है, जबकि 39 मिलियन लोग आपात स्थिति में थे।
  • भुखमरी का क्षेत्रीय संकेंद्रण: केवल 10 देश, जिनमें अफगानिस्तान, सूडान और यमन शामिल हैं, वैश्विक खाद्य असुरक्षा के लगभग दो-तिहाई के लिए उत्तरदायी थे।
  • कुपोषण एवं संवेदनशील समूह: लगभग 35.5 मिलियन बच्चे तथा 9.2 मिलियन महिलाएँ (गर्भवती/स्तनपान कराने वाली) अत्यधिक कुपोषण से प्रभावित थीं।
  • वित्तपोषण में गिरावट एवं आँकड़ों की कमी: मानवीय सहायता हेतु वित्तपोषण घटकर, वर्ष 2016–17 के स्तर तक आ गया, जबकि विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) तथा खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा सर्वेक्षणों में कमी से आँकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
  • वर्ष 2026 संबंधी परिदृश्य
    • संघर्ष एवं आर्थिक अस्थिरता के कारण अनेक क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा का स्तर गंभीर बना हुआ है।
    • पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष वैश्विक कृषि-खाद्य बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि तथा मौजूदा संकट और गहरा सकता है।

खाद्य संकट के बारे में

  • खाद्य संकट उस स्थिति को संदर्भित करता है, जहाँ तीव्र खाद्य असुरक्षा जीवन एवं आजीविका को प्रभावित करती है और स्थानीय या राष्ट्रीय रूप से इस स्थिति का सामना करने की क्षमता से बाहर निकल जाती है।
  • मुख्य कारक:
    • संघर्ष एवं असुरक्षा के कारण खाद्य प्रणालियों में व्यवधान
    • जलवायु आघात जैसे सूखा एवं बाढ़
    • आर्थिक अस्थिरता एवं मुद्रास्फीति
    • कमजोर शासन एवं अवसंरचनात्मक कमियाँ।

पोषण संकट के बारे में

  • पोषण संकट तब उत्पन्न होता है, जब जनसंख्या सुरक्षित, पर्याप्त एवं पोषणयुक्त भोजन के अभाव के कारण तीव्र कुपोषण से ग्रस्त हो जाती है।
  • मुख्य कारक
    • अपर्याप्त आहार सेवन एवं रोग भार
    • अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएँ एवं स्वच्छता
    • संघर्ष एवं विस्थापन
    • बच्चों एवं महिलाओं में उच्च संवेदनशीलता।

ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस (GRFC) के बारे में

  • GRFC एक वार्षिक, बहु-एजेंसी रिपोर्ट है, जो वैश्विक तीव्र खाद्य असुरक्षा, कुपोषण तथा विस्थापन प्रवृत्तियों का आकलन करती है।
  • प्रकाशन: संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ तथा सहयोगी एजेंसियों सहित एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन द्वारा।
  • मुख्य पहलू
    • खाद्य संकट की गंभीरता, परिमाण एवं कारकों को सम्मिलित करती है।
    • संवेदनशील जनसंख्या एवं क्षेत्रों पर केंद्रित रहती है।
    • समय के साथ प्रवृत्तियों का अनुक्रमण करती है।
  • कार्यप्रणाली: यह ‘समेकित खाद्य सुरक्षा चरण’ (IPC) वर्गीकरण तथा ‘कैडर हार्मोनाइजे’ (CH) प्रणालियों का उपयोग करती है।
    • यह विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त आँकड़ों का एकीकरण करती है तथा संकट की गंभीरता के लिए उच्चतम अनुमान प्रस्तुत करती है।
  • विभिन्न IPC/CH वर्गीकरण प्रणाली
    • IPC चरण 1 (न्यूनतम): परिवार अपनी आवश्यक खाद्य एवं गैर-खाद्य आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं।
    • IPC चरण 2 (तनावग्रस्त): परिवारों के पास न्यूनतम पर्याप्त खाद्य उपभोग होता है, परंतु वे कुछ आवश्यक गैर-खाद्य व्यय वहन करने में असमर्थ होते हैं।
    • IPC चरण 3 (संकट): परिवारों में खाद्य उपभोग में कमी होती है या वे संपत्तियों की बिक्री द्वारा ही न्यूनतम खाद्य आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं।
    • IPC चरण 4 (आपात स्थिति): परिवारों में गंभीर रूप से खाद्य की कमी होती है, जिससे उच्च स्तर का कुपोषण एवं अतिरिक्त मृत्यु दर होती है।
    • IPC चरण 5 (विनाशकारी/अकाल): परिवारों में अत्यधिक खाद्य अभाव होता है, जिससे भुखमरी एवं मृत्यु की स्थिति उत्पन्न होती है। वर्ष 2025 में इसमें गाजा पट्टी एवं सूडान सम्मिलित थे।
  • महत्त्व
    • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सहायक
    • मानवीय संसाधनों के आवंटन का मार्गदर्शन
    • एक प्रारंभिक चेतावनी उपकरण के रूप में कार्य करता है।

खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने हेतु प्रमुख सिफारिशें

  • संघर्ष समाधान प्रयासों को सुदृढ़ करना: खाद्य असुरक्षा के मूल कारणों को दूर करने हेतु शांति निर्माण एवं राजनीतिक स्थिरता को बढ़ावा दिया जाए।
  • मानवीय वित्तपोषण में वृद्धि: वित्तीय कटौतियों को कम करते हुए प्रभावी खाद्य सहायता सुनिश्चित की जाए।
  • आँकड़ा प्रणालियों में निवेश: खाद्य सुरक्षा निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ कर सटीक एवं समयबद्ध निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाया जाए।
  • जलवायु एवं आर्थिक लचीलापन निर्माण: सतत् कृषि, सामाजिक सुरक्षा तथा विविध आजीविकाओं को बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष

निरंतर संघर्ष, वित्तीय अंतराल एवं कमजोर प्रणालियाँ वैश्विक भुखमरी को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे समन्वित, आँकड़ा-आधारित एवं सतत् अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता उत्पन्न होती है।

ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस, 2026

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