संदर्भ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला गैसीकरण को तीव्र करने और वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ₹37,500 करोड़ के पैकेज को मंजूरी दी है।
कोयला गैसीकरण योजना के बारे में
- कोयला गैसीकरण योजना एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य कोयला और लिग्नाइट को संश्लेषित गैस तथा मूल्य संवर्द्धित औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करना है।
- उद्देश्य: यह योजना ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, आयात पर निर्भरता को कम करने और घरेलू कोयला संसाधनों के स्वच्छ उपयोग को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य निर्धारित करती है।
- नोडल मंत्रालय: ‘कोयला मंत्रालय’ कोयला गैसीकरण योजना और राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी नोडल मंत्रालय है।
- वित्तीय प्रावधान: ₹37,500 करोड़ का वित्तीय पैकेज 25 से अधिक कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए है, जिनका लक्ष्य 75 मिलियन टन गैसीकरण है।
- योजना की प्रमुख विशेषताएँ
- वित्तीय प्रोत्साहन: परियोजनाओं को प्लांट और मशीनरी लागत के 20% तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो निर्धारित वित्तीय सीमाओं के अधीन होगा।
- परियोजना सीमा: प्रोत्साहन प्रति परियोजना ₹5,000 करोड़ तक सीमित है और सभी परियोजना श्रेणियों में एकल इकाई के लिए ₹12,000 करोड़ की सीमा निर्धारित की गई है।
- निवेश प्रोत्साहन: इस योजना से ₹2.5–3 लाख करोड़ के अनुमानित निवेश के आने और लगभग 50,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।
- प्रतिस्पर्द्धी बोली: धनराशि का आवंटन पारदर्शी प्रतिस्पर्द्धी बोली के माध्यम से किया जाएगा और परियोजना के विभिन्न चरणों (माइलस्टोन) के अनुसार चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (NCGM) के बारे में
- राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (NCGM) का उद्देश्य घरेलू कोयले को क्लीन सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित करना है, जिसका उपयोग औद्योगिक और ऊर्जा अनुप्रयोगों में किया जा सके।
- प्रारंभ: यह मिशन वर्ष 2020–21 के दौरान शुरू किया गया था, ताकि कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके और आयातित जीवाश्म ईंधन-आधारित उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सके।
- नोडल मंत्रालय: ‘कोयला मंत्रालय’ राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए उत्तरदायी नोडल मंत्रालय है।
- लक्ष्य: यह मिशन सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयला गैसीकरण प्राप्त करने के लक्ष्य को निर्धारित करता है।
- उद्देश्य: यह मिशन भारत के बड़े घरेलू कोयला भंडार का उपयोग करके प्राकृतिक गैस, मेथेनॉल, अमोनिया और उर्वरकों के आयात को कम करने का प्रयास करता है।
- प्रौद्योगिकी फोकस: यह मिशन उन्नत गैसीकरण तकनीकों और स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं के माध्यम से उच्च राख युक्त भारतीय कोयले को सिनगैस में परिवर्तित करने को बढ़ावा देता है।
- अपेक्षित परिणाम: इस पहल से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, रोजगार सृजन और रसायन तथा उर्वरक जैसे मूल्य संवर्द्धित उत्पादों का निर्माण संभव है।
- महत्त्व: यह मिशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और संसाधनों के स्वच्छ उपयोग को सुदृढ़ करता है, साथ ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
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कोयला गैसीकरण के बारे में
- कोयला गैसीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें कोयला या लिग्नाइट को उच्च तापमान और उच्च दाब पर अभिक्रियाओं के माध्यम से सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित किया जाता है।
- सिनगैस की संरचना: सिनगैस का निर्माण मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन और जलवाष्प से होता है।
- प्रयुक्त विधियाँ: इस प्रक्रिया में नियंत्रित ऑक्सीजन और वाष्प का उपयोग विशेष गैसीफायर के भीतर किया जाता है, जो लगभग 1,000–1,400°C तापमान पर कार्य करते हैं।
- औद्योगिक उपयोग: सिनगैस का उपयोग मेथेनॉल, अमोनिया, यूरिया, सिंथेसिस नेचुरल गैस, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन में किया जाता है।
कोयला गैसीकरण का महत्त्व
- ऊर्जा सुरक्षा: कोयला गैसीकरण एलएनजी, मेथेनॉल, अमोनिया और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को कम करता है, जिससे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुदृढ़ होती है।
- इन उत्पादों पर भारत की आयात निर्भरता लगभग 80–90% है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में आयात बिल लगभग ₹2.77 लाख करोड़ रहा।
- औद्योगिक विकास: यह प्रौद्योगिकी रसायन, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा देती है, जिससे औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है।
- स्वच्छ कोयला उपयोग: गैसीकरण, प्रत्यक्ष दहन की तुलना में कोयले के अपेक्षाकृत स्वच्छ उपयोग का विकल्प प्रदान करता है और न्यूनतम उत्सर्जन वाली औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सकता है।
- रोजगार सृजन: बड़े स्तर पर गैसीकरण परियोजनाएँ कोयला-समृद्ध क्षेत्रों और औद्योगिक गलियारों में रोजगार और आर्थिक अवसरों का सृजन कर सकती हैं।
चुनौतियाँ
- उच्च पूँजी आवश्यकता: कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और संयंत्र विकास हेतु विशाल स्तर पर निवेश की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन, जल की खपत और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं, जिनके लिए उन्नत शमन उपायों की आवश्यकता है।
- प्रौद्योगिकी निर्भरता: वर्तमान समय में प्रभावी वाणिज्यिक-स्तर के कार्यान्वयन हेतु भारत आयातित गैसीकरण प्रौद्योगिकियों और उन्नत उपकरणों पर काफी सीमा तक निर्भर है।
निष्कर्ष
कोयला गैसीकरण योजना स्वच्छ प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता के साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं औद्योगिक विकास को सुदृढ़ कर सकती है।