संदर्भ
भारत के कृषि निर्यात में वर्ष 2025-26 में 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा उच्च शुल्क आरोपित किए गए थे।
कृषि निर्यात क्षेत्र संबंधी प्रमुख निष्कर्ष
- सुदृढ़ निर्यात वृद्धि
- भारत के कृषि निर्यात में वृद्धि होकर $52 अरब (2024-25) से $53.1 अरब (2025-26) हो गई।
- कृषि निर्यात ने भारत के कुल माल निर्यात की 0.9% वृद्धि की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

- ऐतिहासिक उच्च स्तर के निकट
- वर्ष 2025-26 में कृषि निर्यात वर्ष 2022-23 में दर्ज $53.2 अरब के सर्वकालिक उच्च स्तर के निकट बना रहा।
- यह प्रवृत्ति वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्द्धात्मकता को दर्शाती है।
- समुद्री उत्पादों की सफलता
- समुद्री उत्पाद निर्यात में 13.9% की वृद्धि होकर यह $8.4 अरब से अधिक हो गया, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका को भेजी जाने वाली आपूर्ति में कमी आई थी।
- चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों में उच्च निर्यात ने अमेरिकी बाजार में हुई कमी की भरपाई की।
- उच्च प्रदर्शन करने वाली वस्तुएँ
- बफेलो मीट, कॉफी और ताजे फल एवं सब्जियाँ ने वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड निर्यात स्तर प्राप्त किए।
- एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया में माँग वृद्धि ने निर्यात विस्तार को समर्थन दिया।
ट्रंप द्वारा आरोपित शुल्कों का नकारात्मक प्रभाव
- उच्च शुल्क बाधाएँ: संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई भारतीय निर्यातों पर उच्च शुल्क आरोपित किए, जिनकी दरें कम होने से पहले 50% तक पहुँच गई थीं।
- प्रभावित क्षेत्रों में औषधि, वस्त्र, आभूषण, चमड़ा और कृषि उत्पाद शामिल थे।
- संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात में गिरावट: समुद्री उत्पाद, मसाले, बासमती चावल और प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियों के भारतीय निर्यात में गिरावट देखी गई।
- समुद्री निर्यात वर्ष 2025-26 के दौरान $2.7 अरब से घटकर $2.3 अरब रह गया।
निर्यात वृद्धि को समर्थन देने वाले कारक
- बाजार विविधीकरण: निर्यात का व्यापक भौगोलिक विस्तार संरक्षणवादी उपायों के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है।
- भारतीय निर्यातकों ने चीन, वियतनाम, जापान, बेल्जियम, थाईलैंड, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की ओर अपने निर्यात को विविधीकृत किया।
- एकल निर्यात गंतव्य पर निर्भरता कम होने से शुल्क संबंधी तनावों के प्रति लचीलापन बढ़ा।
- प्रतिस्पर्द्धी मूल्य निर्धारण: भारतीय कृषि उत्पाद कम उत्पादन लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्द्धी मूल्य पर बने रहे।
- मूल्य संवर्द्धन और प्रसंस्करण: प्रसंस्कृत और मूल्य-संवर्द्धित कृषि उत्पादों में वृद्धि ने निर्यात आय और बाजार पहुँच को बढ़ाया।
- सरकारी समर्थन उपाय: निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ, लॉजिस्टिक्स सुधार और व्यापार सुविधा उपायों ने कृषि निर्यातकों को समर्थन प्रदान किया।
शेष चुनौतियाँ
- बाह्य बाजारों पर निर्भरता: कृषि निर्यात अभी भी भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ वॉर और वैश्विक माँग में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हैं।
- गुणवत्ता और SPS मानक: भारतीय निर्यात को विकसित बाजारों में ‘स्वच्छता और पादप स्वच्छता’ (SPS) मानकों से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- जलवायु और आपूर्ति जोखिम: जलवायु परिवर्तनशीलता, इनपुट लागत और आपूर्ति शृंखला व्यवधान निर्यात की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत के कृषि निर्यात का लचीलापन बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद के बीच बाजार विविधीकरण, प्रतिस्पर्द्धी उत्पादन और रणनीतिक व्यापार अनुकूलन के महत्त्व को दर्शाता है।