संदर्भ
ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) की एक रिपोर्ट में यह बताया गया कि भारत को वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बड़े निवेश और सुधारों की आवश्यकता है।
ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) के बारे में
- TERI एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो ऊर्जा, पर्यावरण और सतत् विकास के क्षेत्रों में कार्य करता है।
- उत्पत्ति: इसकी स्थापना वर्ष 1974 में टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान के रूप में की गई थी और वर्ष 2003 में इसका नाम बदलकर ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान कर दिया गया।
- उद्देश्य: TERI का उद्देश्य नीतिगत अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जलवायु-अनुकूल समाधान के माध्यम से सतत् विकास को बढ़ावा देना है।
- संरचना: इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है तथा इसके क्षेत्रीय केंद्र गुरुग्राम, बंगलूरू, गुवाहाटी, मुंबई, पणजी, नैनीताल और हैदराबाद में हैं।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: इसके प्रमुख क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, संसाधन दक्षता, सतत् कृषि और अपशिष्ट प्रबंधन हैं।
- मुख्य पहलें: महत्त्वपूर्ण पहलों में गृह (GRIHA) ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग, ‘लाइटिंग अ बिलियन लाइव्स’ (LABL) सौर कार्यक्रम तथा जैव प्रौद्योगिकी आधारित पर्यावरणीय समाधान शामिल हैं।
- महत्त्वपूर्ण रिपोर्टें: TERI ऊर्जा संक्रमण, जलवायु परिवर्तन, परमाणु ऊर्जा, सततता तथा भारत के शून्य-उत्सर्जन मार्ग पर विभिन्न रिपोर्टें प्रकाशित करता है।
|
TERI रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- विशाल निवेश की आवश्यकता: भारत को वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार के लिए लगभग ₹23–25 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर फोकस: रिपोर्ट ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) पर जोर दिया, क्योंकि इनमें मॉड्यूलर निर्माण, कम लागत और औद्योगिक तथा दूरस्थ अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्तता होती है।
- ऊर्जा संक्रमण में भूमिका: परमाणु ऊर्जा स्थिर बेसलोड विद्युत प्रदान कर सकती है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, हरित हाइड्रोजन उत्पादन और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का समर्थन करती है।
- दीर्घकालिक थोरियम रणनीति: भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम दीर्घकाल में थोरियम भंडार के उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा तथा आयात निर्भरता में कमी लाने का लक्ष्य रखता है।
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति
- परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का एक महत्त्वपूर्ण घटक है, जो वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
- वर्तमान क्षमता: भारत वर्तमान में 7 परमाणु ऊर्जा स्थलों पर लगभग 8.8 गीगावाट स्थापित क्षमता के साथ 25 परमाणु रिएक्टरों का संचालन कर रहा है।
- परमाणु ऊर्जा का योगदान: भारत के कुल विद्युत उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का योगदान लगभग 3% है, जबकि वर्ष 2024–25 के दौरान परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने लगभग 56,681 मिलियन यूनिट (MUs) विद्युत का उत्पादन किया।
- भविष्य का लक्ष्य: भारत विकसित भारत (Viksit Bharat) दृष्टि के अंतर्गत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखता है, जिसमें SMRs और उन्नत रिएक्टरों पर अधिक निर्भरता होगी।
भारत में प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र
| परमाणु ऊर्जा संयंत्र |
अवस्थिति |
रिएक्टर का प्रकार |
स्थापित क्षमता |
| तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन |
महाराष्ट्र |
BWR एवं PHWR |
1400 MW |
| कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र |
तमिलनाडु |
VVER (PWR) |
2000 MW |
| राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन |
राजस्थान |
PHWR |
1180 MW |
| काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन |
गुजरात |
PHWR |
1140 MW |
| नरौरा परमाणु ऊर्जा स्टेशन |
उत्तर प्रदेश |
PHWR |
440 MW |
| कैगा जनरेटिंग स्टेशन |
कर्नाटक |
PHWR |
880 MW |
| मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन (MAPS) |
तमिलनाडु |
PHWR |
440 MW |
| संक्षेप: PHWR (दाबित भारी जल रिएक्टर), BWR: (बॉइल्ड वाटर रिएक्टर) PWR/VVER: (दाबित जल रिएक्टर)। |
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में चुनौतियाँ
- नियामक और कानूनी बाधाएँ: भारत का परमाणु दायित्व ढाँचा और लंबी स्वीकृति प्रक्रियाएँ परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन तथा निजी निवेश भागीदारी को हतोत्साहित करती हैं।
- ईंधन सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भारत में यूरेनियम का सीमित घरेलू उत्पादन होता है और पर्याप्त थोरियम भंडार होने के बावजूद देश यूरेनियम आयात पर निर्भर है।
- उच्च पूँजी और अवसंरचना लागत: परमाणु संयंत्रों में उच्च प्रारंभिक निवेश, लंबी परिपक्वता अवधि और लागत वृद्धि होती है, जो वित्तीय व्यवहार्यता को प्रभावित करती है।
- सार्वजनिक स्वीकृति और सुरक्षा मुद्दे: परमाणु दुर्घटनाओं, विकिरण जोखिम और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चिंताएँ परमाणु परियोजनाओं के प्रति विरोध उत्पन्न करती हैं।
आगे की राह
- नियामक तंत्र को सुदृढ़ करना: भारत को सरलीकृत लाइसेंसिंग तंत्र और SMR-विशिष्ट विनियम स्थापित करने चाहिए, ताकि त्वरित क्रियान्वयन तथा निजी निवेश आकर्षित किया जा सके।
- सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025, जो दिसंबर 2025 में पारित हुआ, ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाया।
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विस्तार: स्वदेशी SMRs, थोरियम रिएक्टरों और उन्नत ईंधन प्रौद्योगिकियों में अधिक निवेश दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकता है।
- हाल ही में, भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम् में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) (500 MWe) में क्रिटिकलिटी की अवस्था प्राप्त की।
- सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ाना: पारदर्शी सुरक्षा संचार, कार्यबल प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी परमाणु विस्तार के प्रति सार्वजनिक विश्वास को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं।
निष्कर्ष
परमाणु ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का एक विश्वसनीय स्तंभ बन सकती है, यदि इसे नियामक सुधार, स्वदेशी नवाचार और सतत् वित्तपोषण तंत्र का समर्थन प्राप्त हो।