संदर्भ
हाल ही में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनंतिम अनुमान (PE) जारी किए हैं।
संबंधित तथ्य
- वित्त वर्ष 2025–26 की चौथी तिमाही (Q4) में सकल घरेलू उत्पाद और व्यय संबंधी अनुमान: मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के त्रैमासिक अनुमान भी जारी किए हैं, साथ ही इसके व्यय घटकों को स्थिर मूल्यों (2022-23) तथा वर्तमान मूल्यों दोनों पर प्रस्तुत किया है।
भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) प्रदर्शन की प्रमुख विशेषताएँ (वित्त वर्ष 2025–26)
- मजबूत आर्थिक वृद्धि: वास्तविक GDP में 7.7% की वृद्धि हुई, जबकि ‘नॉमिनल’ GDP में 8.9% का विस्तार हुआ।
- आर्थिक गतिविधियों में स्वस्थ विस्तार (GVA): वास्तविक सकल मूल्य वर्द्धन (GVA) में 7.9% वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ‘नॉमिनल’ GVA 9.1% बढ़ा।
- सेवाओं और उद्योग द्वारा संचालित वृद्धि
- तृतीयक (सेवा) क्षेत्र ने 9.3% की वृद्धि के साथ सबसे बड़े विकास कारक के रूप में उभरकर भूमिका निभाई,
- जबकि द्वितीयक (उद्योग) क्षेत्र में 8.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र का समर्थन प्राप्त हुआ;
- वहीं प्राथमिक क्षेत्र ने 3.2% की वृद्धि दर्ज की, जो मुख्यतः कृषि और मत्स्यपालन क्षेत्र से प्रेरित रही।
- उच्च-विकास क्षेत्र: विनिर्माण, व्यापार, मरम्मत, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण सेवाएँ, तथा वित्तीय, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाएँ जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंक (डबल डिजिट) की वृद्धि दर्ज की गई।
- मजबूत उपभोग और निवेश माँग: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.5% से अधिक वृद्धि, जो मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाती है तथा सकल स्थिर पूँजी निर्माण (GFCF) में भी 7.5% से अधिक वृद्धि, जो सुदृढ़ निवेश गतिविधियों को प्रतिबिंबित करती है।
मुख्य अवधारणाएँ
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP): यह किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है।
- वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Real GDP): यह अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को स्थिर कीमतों पर मापता है, जिसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल नहीं होता है।
- ‘नॉमिनल’ सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP): यह वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को वर्तमान बाजार कीमतों पर मापता है, जिसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल होता है।
- सकल मूल्य वर्द्धन (GVA): यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा जोड़े गए मूल्य को मापता है और इसकी उत्पादन − मध्यवर्ती उपभोग के रूप में गणना की जाती है।
- संबंध: GDP = GVA + उत्पादों पर कर − उत्पादों पर सब्सिडी
- निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE): यह परिवारों द्वारा व्यक्तिगत उपभोग के लिए वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को मापता है, जो उपभोक्ता माँग की मजबूती को दर्शाता है।
- सकल स्थिर पूँजी निर्माण (GFCF): यह अवसंरचना, मशीनरी और भवन जैसे स्थिर परिसंपत्तियों में निवेश को मापता है, जो भविष्य की आर्थिक वृद्धि की क्षमता को दर्शाता है।
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चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) का प्रदर्शन
- विकास की गति वृद्धिमान: वास्तविक GDP में 7.8% की वृद्धि हुई तथा ‘नॉमिनल’ GDP में 9.1% की वृद्धि दर्ज की गई।
- GVA वृद्धि मजबूत रही: वास्तविक GVA 7.9% तथा ‘नॉमिनल’ GVA 9.9% रहा।
- उद्योग और सेवाओं ने वृद्धि को आगे बढ़ाया: द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र इस तिमाही में आर्थिक विस्तार के प्रमुख चालक बने रहे।
- उपभोग की तुलना में निवेश को वरीयता
- सकल स्थिर पूँजी निर्माण (GFCF) में 10.8% की वृद्धि, जो मजबूत पूँजी निर्माण को दर्शाती है,
- जबकि निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.1% की वृद्धि, जो स्वस्थ उपभोक्ता व्यय को प्रतिबिंबित करती है।