संदर्भ
हाल ही में भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति (FTP) में संशोधन करते हुए पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से बलात् श्रम के माध्यम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
संबंधित तथ्य
- यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत द्वारा बलात् श्रम से संबंधित व्यापारिक उपायों के प्रवर्तन के संबंध में धारा 301 के अंतर्गत की गई जाँच के आधार पर भारतीय निर्यातों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया है।
भारत की विदेश व्यापार नीति (FTP) के बारे में
- FTP का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना, आयात को सुगम बनाना, व्यवसाय सुगमता में सुधार करना तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ भारत के एकीकरण को सुदृढ़ करना है।
- विधिक ढाँचा: इसका निर्माण केंद्र सरकार द्वारा विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत किया जाता है तथा इसका क्रियान्वयन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा किया जाता है।
- वर्तमान नीति: विदेश व्यापार नीति, 2023 ने पूर्ववर्ती पंच-वर्षीय नीति चक्र का स्थान लेते हुए निश्चित समाप्ति तिथि के बिना गतिशील एवं दीर्घकालिक ढाँचा अपनाया है।
- निर्यात संवर्द्धन योजनाएँ: यह एडवांस ऑथराइजेशन, एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) तथा शुल्क परिहार योजनाओं (जैसे RoDTEP एवं RoSCTL) के माध्यम से लाभ प्रदान करती है।
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प्रमुख बिंदु
- आयात पर प्रतिबंध: विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेश व्यापार नीति (FTP) में एक नया प्रावधान सम्मिलित करते हुए पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से बलात् श्रम के माध्यम से उत्पादित अथवा विनिर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- सरकारी अधिसूचना: केंद्र सरकार, जाँच के निष्कर्षों अथवा अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों के आधार पर, प्रतिबंध हेतु विशिष्ट वस्तुओं को अधिसूचित कर सकती है।
- जाँच तंत्र: विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT), हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स, 2023 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, निर्यातित वस्तुओं के उत्पादन में बलात् श्रम के उपयोग की जाँच करेंगे।
बलात् श्रम क्या है?
- अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, बलात् श्रम से आशय ऐसे किसी भी कार्य अथवा सेवा से है, जिसे किसी व्यक्ति से दंड के भय के अधीन तथा उसकी स्वैच्छिक सहमति के बिना कराया जाए।
- पृष्ठभूमि: मार्च 2026 में संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत के विरुद्ध धारा 301 के अंतर्गत दो जाँचें प्रारंभ की थीं।
- प्रथम जाँच के उपरांत, USTR ने भारतीय निर्यातों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव करते हुए आरोप लगाया कि भारत ने बलात् श्रम के माध्यम से निर्मित आयातित वस्तुओं पर प्रतिबंधों का प्रभावी रूप से प्रवर्तन नहीं किया है।
- अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता (Excess Industrial Capacity) से संबंधित द्वितीय जाँच अभी तक पूर्ण नहीं हुई है।
अमेरिका के धारा 301 प्रावधान के बारे में
- संदर्भ: संयुक्त राज्य व्यापार अधिनियम, 1974 के अंतर्गत अधिनियमित धारा 301 संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को ऐसे विदेशी नियामकीय उपायों की जाँच करने तथा उनके विरुद्ध एकपक्षीय कार्रवाई करने का व्यापक अधिकार प्रदान करती है, जिन्हें अमेरिकी वाणिज्य के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण अथवा बाधक माना जाता है।
अमेरिकी धारा 301 की कार्रवाई की प्रमुख कार्यप्रणाली
- प्रवर्तन का आधार: USTR ने धारा 301 के अंतर्गत इस चरण के टैरिफ इस आधार पर प्रारंभ किए कि भारत सहित 53 अन्य देशों में बलात् श्रम के माध्यम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर स्पष्ट एवं व्यापक वैधानिक प्रतिबंध उपलब्ध नहीं हैं।
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वैश्विक संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका: USTR ने लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं को सम्मिलित करते हुए धारा 301 के अंतर्गत जाँच प्रारंभ की है तथा बलात् श्रम से संबंधित आयातों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया है।
- यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ (EU) ने भी बलात् श्रम के माध्यम से उत्पादित आयातित वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने हेतु उपाय लागू किए हैं।
- वैश्विक फोकस: कपास, वस्त्र, सौर पैनल, समुद्री खाद्य उत्पाद, धातुएँ, बैटरियाँ तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी वस्तुएँ, विशेषकर चीन के शिनजियांग क्षेत्र में बलात् श्रम से संभावित संबंधों के कारण, कठोर जाँच-पड़ताल के क्षेत्र में आ गई हैं।