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वित्तीय सक्षमता: वित्तीय समावेशन से आगे बढ़कर वित्तीय सुरक्षा की ओर

13 Jul 2026

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के वित्तीय सक्षमता संबंधी विशेष अधिवक्ता ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सुधारों का अगला चरण वित्तीय सक्षमता पर केंद्रित होना चाहिए, जिससे नागरिक बचत, निवेश, जोखिम प्रबंधन तथा दीर्घकालिक वित्तीय प्रत्यास्थता विकसित करने में सक्षम हो सकें।

संबंधित तथ्य 

  • विश्व बैंक की ग्लोबल फाइंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बैंक खाता धारक वयस्कों का अनुपात लगभग एक दशक पूर्व 56% से बढ़कर वर्ष 2026 तक लगभग 89% हो गया है।
  • यह परिवर्तन मुख्यतः JAM (जन धन–आधार–मोबाइल) के कारण संभव हुआ है, जिसने बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक नागरिकों की पहुँच का उल्लेखनीय विस्तार किया है।

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वित्तीय सक्षमता क्या है?

  • वित्तीय सक्षमता से आशय किसी व्यक्ति की दैनिक वित्तीय आवश्यकताओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने, अप्रत्याशित वित्तीय तनावों का सामना करने, भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा अपने वित्तीय भविष्य के प्रति आत्मविश्वास बनाए रखने की क्षमता से है
  • यह केवल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच की माप नहीं है, अपितु वित्तीय कल्याण का एक गुणात्मक संकेतक है।
  • वित्तीय सक्षमता व्यक्तियों को वित्तीय अस्तित्व (केवल दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित स्थिति -Financial Survival) की स्थिति से आगे बढ़कर वित्तीय प्रत्यास्थता (Financial Resilience) तथा समृद्धि (Prosperity) की ओर अग्रसर होने में सक्षम बनाती है।

वित्तीय समावेशन बनाम वित्तीय सक्षमता 

पहलू

वित्तीय समावेशन

वित्तीय सक्षमता

अर्थ बैंक खाते, ऋण, बीमा एवं भुगतान जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच।

वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति, वित्तीय आघातों का सामना करने तथा दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु वित्तीय सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने की क्षमता।

प्रमुख उद्देश्य लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ना। वित्तीय सुरक्षा, प्रत्यास्थता एवं समृद्धि में सुधार करना।
सफलता के मापदंड बैंक खातों की संख्या, डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं की संख्या, ऋण तक पहुँच एवं बीमा कवरेज।

बचत, निवेश, पेंशन की पर्याप्तता, ऋण प्रबंधन, बीमा सुरक्षा, वित्तीय प्रत्यास्थता तथा भविष्य के प्रति वित्तीय आत्मविश्वास।

मुख्य प्रश्न क्या लोगों की वित्तीय सेवाओं तक पहुँच है? क्या वित्तीय सेवाएँ लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार ला रही हैं?
दृष्टिकोण आपूर्ति-पक्ष आधारित (बैंक खाते खोलना एवं बैंकिंग अवसंरचना का विस्तार)। माँग एवं परिणाम आधारित (लोगों को सूचित वित्तीय निर्णय लेने तथा संपत्ति सृजन में सक्षम बनाना)।
उदाहरण कोई व्यक्ति जन धन खाता तो खोलता है, किंतु उसका नियमित उपयोग नहीं करता है। वही व्यक्ति नियमित बचत करता है, बीमा करवाता है, पेंशन में अंशदान देता है तथा वित्तीय आपात स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होता है।

अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) के परिप्रेक्ष्य में वित्तीय समावेशन एवं वित्तीय सक्षमता 

  • अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) यह प्रतिपादित करता है कि मात्र संसाधनों का स्वामित्व व्यक्ति के कल्याण को सुनिश्चित नहीं करता है।
  • व्यक्ति में उन संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने की क्षमता भी होनी चाहिए।
  • इसी प्रकार, केवल बैंक खाता धारक होना वित्तीय कल्याण सुनिश्चित नहीं करता, जब तक कि व्यक्ति अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार हेतु वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं का सक्रिय रूप से उपयोग न करे।
  • अतः वित्तीय समावेशन अवसर उपलब्ध कराता है, जबकि वित्तीय सक्षमता उन अवसरों को सार्थक परिणामों में परिवर्तित करने में सक्षम बनाती है।

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वित्तीय सक्षमता का महत्त्व

  • वित्तीय प्रत्यास्थता: व्यक्तियों एवं परिवारों को चिकित्सीय आपात स्थितियों, रोजगार से वंचित होने अथवा प्राकृतिक आपदाओं जैसे अप्रत्याशित तनावों का सामना वित्तीय संकट में आए बिना करने में सक्षम बनाती है।
  • अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी: सुलभ एवं विनियमित औपचारिक ऋण तक पहुँच को बढ़ाकर उच्च ब्याज दर वाले अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता घटाती है तथा ऋण के जाल से संरक्षण प्रदान करती है।
  • बचत एवं संपत्ति सृजन: नियमित बचत के माध्यम से निवेश तथा संपत्ति निर्माण को बल मिलता है, जिससे व्यक्ति शिक्षा, आवास स्वामित्व एवं उद्यमिता जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।
  • सेवानिवृत्ति सुरक्षा: पेंशन एवं सेवानिवृत्ति बचत को प्रोत्साहित कर सेवानिवृत्ति के पश्चात् वृद्धावस्था में वित्तीय आत्मनिर्भरता तथा गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करती है।
  • बेहतर वित्तीय एवं मानसिक कल्याण: वित्तीय तनाव एवं अनिश्चितता को कम कर, व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन में आत्मविश्वास बढ़ाती है तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाती है।
  • घरेलू बचत में वृद्धि: घरेलू बचत को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में संगठित कर उत्पादक निवेशों एवं आर्थिक विकास के लिए पूँजी की उपलब्धता बढ़ाती है।
  • वित्तीय बाजारों का सुदृढीकरण: बैंकिंग, बीमा, पेंशन तथा निवेश उत्पादों के उपयोग का विस्तार कर वित्तीय बाजारों को अधिक व्यापक, दक्ष एवं समावेशी बनाती है।

भारत में वित्तीय सक्षमता प्राप्त करने की चुनौतियाँ

  • बैंक खातों का अपर्याप्त उपयोग: बड़ी संख्या में बैंक खाता धारक निष्क्रिय बने हुए हैं अथवा उनका उपयोग केवल सरकारी लाभों के हस्तांतरण के लिए ही करते हैं, जिससे बचत, निवेश एवं ऋण तक पहुँच में उनकी भूमिका सीमित रह जाती है।
    • उदाहरण: लगभग 56.04 करोड़ प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) खातों में से लगभग 13.04 करोड़ (लगभग 23%) खाते निष्क्रिय हैं, अर्थात् इनमें पिछले दो वर्षों से ग्राहक द्वारा कोई वित्तीय लेन-देन नहीं प्रदर्शित हुआ है।
  • संवेदनशील वर्गों में निम्न घरेलू बचत: निम्न-आय वाले परिवारों में नियमित बचत करने की वित्तीय क्षमता सीमित होती है, जिससे वे आय विषमताओं एवं आकस्मिक परिस्थितियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने रहते हैं।
  • सीमित पेंशन कवरेज: असंगठित क्षेत्र के अधिकांश श्रमिक अभी भी औपचारिक पेंशन प्रणाली से अछूते हैं, जिससे वृद्धावस्था में उनकी वित्तीय सुरक्षा प्रभावित होती है।
  • अपर्याप्त बीमा कवरेज: सरकार समर्थित बीमा योजनाओं उपस्थित होने के पश्चात् भी स्वास्थ्य, जीवन एवं फसल बीमा का कवरेज अभी भी अपर्याप्त है, जिससे परिवार आकस्मिक एवं गंभीर वित्तीय हानियों के प्रति संवेदनशील बने रहते हैं।
    • उदाहरण: भारत में बीमा प्रसार (सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में बीमा प्रीमियम का प्रतिशत- Insurance Penetration) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 3.7% है, जो वैश्विक औसत 7.3% का लगभग आधा है। इसमें जीवन बीमा का योगदान 2.7% तथा गैर-जीवन बीमा (जैसे स्वास्थ्य, मोटर, फसल एवं संपत्ति बीमा) का योगदान मात्र 1.0% तक सीमित है।
      • यह अपर्याप्त बीमा कवरेज स्वास्थ्य आपात स्थितियों अथवा कृषि संबंधी संकट के समय परिवारों को गंभीर वित्तीय संकट में डाल देता है।
  • अनौपचारिक ऋण पर निरंतर निर्भरता: सुलभ एवं किफायती औपचारिक ऋण की सीमित उपलब्धता तथा वित्तीय जागरूकता के अभाव के कारण निर्धन नागरिक एवं किसान अब भी साहूकारों एवं अन्य अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भर हैं, जिससे ऋणग्रस्तता  का जोखिम बढ़ जाता है।
  • डिजिटल धोखाधड़ी एवं साइबर जोखिमों में वृद्धि: वित्तीय सेवाओं के तीव्र डिजिटलीकरण के साथ साइबर धोखाधड़ी, फिशिंग हमलों तथा वित्तीय ठगी की घटनाओं में बढोतरी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास प्रभावित होता है।
    • उदाहरण: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय संस्थानों ने 10,000 से अधिक धोखाधड़ी के मामलों (लगभग ₹48,021 करोड़) की सूचना दी। यद्यपि रियल-टाइम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण के कारण डिजिटल भुगतान एवं कार्ड संबंधी धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है, फिर भी उच्च-मूल्य अग्रिम (Advances) से संबंधित धोखाधड़ी कुल वित्तीय हानि का प्रमुख कारण बनी हुई है।
  • निम्न वित्तीय साक्षरता: भारत के अधिकांश नागरिकों में बचत, निवेश, बीमा, पेंशन तथा डिजिटल वित्तीय उत्पादों के प्रभावी प्रबंधन से संबंधित ज्ञान एवं कौशल का अभाव है, जिससे वित्तीय समावेशन के अपेक्षित परिणाम अभी भी लंबित हैं।
    • उदाहरण: OECD-PISA की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में लगभग 20% 15 वर्षीय विद्यार्थियों में बुनियादी वित्तीय साक्षरता का अभाव है विश्व के 15-वर्षीय विद्यार्थियों में से लगभग 20% विद्यार्थी, बुनियादी वित्तीय साक्षरता से वंचित हैं, जिसके कारण वे डिजिटल वित्त, मोबाइल भुगतान तथा ऑनलाइन सुरक्षा जोखिमों का सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं हैं।
  • लैंगिक एवं क्षेत्रीय असमानताएँ: महिलाएँ, प्रवासी श्रमिक तथा दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग बैंक खात धारक होने के बावजूद वित्तीय सेवाओं का निरंतर उपयोग करने में अनेक बाधाओं का सामना करते हैं, जिससे समावेशी आर्थिक भागीदारी सीमित रह जाती है।

वित्तीय सक्षमता में सुधार हेतु फिनटेक (FinTech) की भूमिका

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वित्तीय परामर्श: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बजट निर्माण, बचत, निवेश, सेवानिवृत्ति योजना एवं ऋण प्रबंधन के संबंध में व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय परामर्श प्रदान कर सूचित वित्तीय निर्णय लेने में सहायता करती है।
  • उत्तरदायी डिजिटल ऋण व्यवस्था: फिनटेक प्लेटफॉर्म वैकल्पिक आँकड़ों एवं AI-आधारित ऋण मूल्यांकन का उपयोग कर त्वरित, वहनीय एवं उत्तरदायी ऋण उपलब्ध कराते हैं, साथ ही अत्यधिक ऋणग्रस्तता के जोखिम को भी कम करते हैं।
  • वित्तीय सक्षमता स्कोर: डिजिटल प्लेटफॉर्म बचत, व्यय पैटर्न, ऋण स्तर तथा पुनर्भुगतान व्यवहार के आधार पर वित्तीय सक्षमता स्कोर तैयार करते हैं, जिससे व्यक्ति अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन एवं उसमें सुधार कर सकते हैं।
  • डिजिटल पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा नामांकन: फिनटेक कागजरहित एवं मोबाइल-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) एवं अटल पेंशन योजना (APY) में नामांकन तथा अंशदान को सरल बनाता है, जिससे असंगठित एवं गिग श्रमिकों के बीच इन योजनाओं का कवरेज बढ़ता है।
  • व्यक्तिगत बचत एवं निवेश समाधान: AI-संचालित अनुप्रयोग व्यक्ति की आय, व्यय एवं वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर अनुकूलित बचत लक्ष्य, स्वचालित निवेश तथा संपत्ति प्रबंधन रणनीतियों की अनुशंसा करते हैं।
  • धोखाधड़ी की पहचान एवं साइबर सुरक्षा: उन्नत विश्लेषण, मशीन लर्निंग तथा रियल-टाइम लेन-देन निगरानी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर साइबर धोखाधड़ी को रोकने तथा डिजिटल वित्तीय सेवाओं में विश्वास को सुदृढ़ करने में सहायता करती है।

विकसित देशों में वित्तीय सक्षमता

  • सार्वभौमिक वित्तीय समावेशन: स्वीडन एवं नॉर्वे जैसे देशों में लगभग सभी वयस्कों के पास बैंक खाते हैं तथा नकदरहित भुगतान प्रणाली व्यापक रूप से प्रचलित है, जिससे औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक सहज पहुँच सुनिश्चित होती है।
  • व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था: नीदरलैंड में विश्व की सबसे मजबूत बहु-स्तरीय पेंशन प्रणाली में से एक है, जबकि सिंगापुर का सेंट्रल प्रोविडेंट फंड (CPF) सेवानिवृत्ति, स्वास्थ्य सेवा एवं आवास बचत को एकीकृत करता है।
  • उन्नत डिजिटल वित्तीय पारितंत्र: यूनाइटेड किंगडम का ओपन बैंकिंग ढाँचा तथा ऑस्ट्रेलिया का कंज्यूमर डेटा राइट (CDR) सुरक्षित डेटा साझाकरण, व्यक्तिगत वित्तीय उत्पादों तथा ऋण तक बेहतर पहुँच को सक्षम बनाते हैं।
  • वित्तीय साक्षरता एवं उपभोक्ता संरक्षण: कनाडा की राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता रणनीति तथा यूनाइटेड किंगडम की मनी एंड पेंशन्स सर्विस (MaPS) सुदृढ़ उपभोक्ता संरक्षण विनियमों के साथ वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देती हैं।
  • वित्तीय सक्षमता पर केंद्रित दृष्टिकोण: संयुक्त राज्य अमेरिका का फाइनेंशियल हेल्थ नेटवर्क तथा कनाडा का फाइनेंशियल वेल-बीइंग इंडेक्स केवल बैंक खाते के स्वामित्व के स्थान पर बचत, ऋण, बीमा, सेवानिवृत्ति प्रबंधन एवं वित्तीय प्रत्यास्थता जैसे संकेतकों के आधार पर वित्तीय सक्षमता का आकलन करते हैं।

आगे की राह

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) को जन धन 2.0 में रूपांतरित करना: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) खातों को पेंशन, बीमा, बचत, ऋण एवं सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के एकीकरण के माध्यम से व्यापक वित्तीय सक्षमता मंच के रूप में विकसित किया जाए।
  • सार्वभौमिक पेंशन एवं बीमा कवरेज सुनिश्चित करना: असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों तथा अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए किफायती पेंशन एवं बीमा योजनाओं का विस्तार कर सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाए।
  • वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करना: विद्यालयों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), बैंकिंग संवाददाताओं तथा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से वित्तीय शिक्षा का विस्तार कर वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उपयोग: AI-आधारित वित्तीय परामर्श सेवाओं तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, Account Aggregator, ULI, डिजीलॉकर) का उपयोग कर व्यक्तिगत, सुरक्षित एवं उत्तरदायी वित्तीय समाधान उपलब्ध कराए जाएँ।
  • उपभोक्ता संरक्षण को सुदृढ़ करना: नियामकीय पर्यवेक्षण, साइबर सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र तथा धोखाधड़ी-निरोधक प्रणालियों को मजबूत कर वित्तीय पारितंत्र में विश्वास बढ़ाया जाए।
  • कल्याणकारी योजनाओं के अभिसरण में सुधार: PMJDY, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), ई-श्रम, PM-किसान, अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के मध्य निर्बाध अंतरसंचालनीयता सुनिश्चित कर लाभों को अधिकतम किया जाए।
  • राष्ट्रीय वित्तीय सक्षमता सूचकांक का विकास: बचत, ऋण, बीमा, पेंशन कवरेज एवं वित्तीय कल्याण जैसे संकेतकों के आधार पर घरेलू वित्तीय प्रत्यास्थता का आकलन करने हेतु एक व्यापक राष्ट्रीय वित्तीय सक्षमता सूचकांक विकसित किया जाए, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा मिले।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी प्रोत्साहन: सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बैंकों, फिनटेक कंपनियों, नियोक्ताओं, बीमा कंपनियों तथा नागरिक समाज के मध्य सहयोग को बढ़ावा देकर उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए वहनीय एवं नवोन्मेषी वित्तीय उत्पादों तक पहुँच का विस्तार किया जाए।

निष्कर्ष

भारत ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है, किंतु विकास के अगले चरण का लक्ष्य वित्तीय सक्षमता सुनिश्चित करना है। बचत, पेंशन, बीमा, उत्तरदायी ऋण व्यवस्था तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर आधारित एक सुदृढ़ वित्तीय पारितंत्र परिवारों को वित्तीय झटकों का सामना करने, संपत्ति सृजन करने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रभावी योगदान देने हेतु सशक्त बनाएगा।

वित्तीय सक्षमता: वित्तीय समावेशन से आगे बढ़कर वित्तीय सुरक्षा की ओर

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