| आयाम |
जापान (निवारक मॉडल) |
यूनाइटेड किंगडम (NHS स्वास्थ्य जाँच) |
विश्व स्वास्थ्य संगठन (जीवन-चक्र दृष्टिकोण) |
| संस्थागत ढाँचा |
सरकार और कार्यस्थल-एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली |
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा द्वारा संचालित |
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्देशित |
| लक्षित समूह |
वयस्क, विशेषकर 40–60 वर्ष |
40–74 वर्ष आयु वर्ग के वयस्क |
जीवन के सभी चरणों में संपूर्ण जनसंख्या |
| मुख्य दृष्टिकोण |
निवारक, नियमित पूर्ण-शरीर जाँच (निंगेन डॉक) |
जोखिम-आधारित स्क्रीनिंग और प्रारंभिक हस्तक्षेप |
समग्र, जीवन-चक्र आधारित सतत देखभाल |
| फोकस क्षेत्र |
गैर-संचारी रोग, कैंसर, रजोनिवृत्ति, अस्थि स्वास्थ्य |
हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, किडनी रोग, मानसिक स्वास्थ्य |
निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक + स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक |
| सेवा प्रदाय तंत्र |
कार्यस्थल-आधारित वार्षिक अनिवार्य जाँच और क्लीनिक। |
सामान्य चिकित्सकों और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से प्राथमिक देखभाल। |
सुदृढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक पहुँच। |
| लैंगिक संवेदनशीलता |
मध्य आयु के मुद्दों जैसे रजोनिवृत्ति और वृद्धावस्था को संबोधित करता है। |
सामान्य जनसंख्या पर केंद्रित, महिलाओं को अप्रत्यक्ष लाभ। |
स्पष्ट रूप से लैंगिक और समानता-आधारित ढाँचा। |
| निवारक रणनीति |
नियमित जाँच के माध्यम से प्रारंभिक पहचान |
जोखिम मूल्यांकन + जीवनशैली में सुधार |
प्रत्येक जीवन चरण में प्रारंभिक हस्तक्षेप |
| एकीकरण स्तर |
रोजगार प्रणाली के साथ मजबूत एकीकरण। |
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकृत। |
बहु-क्षेत्रीय समन्वय (स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा)। |
| परिणाम/प्रभाव |
उच्च जीवन प्रत्याशा, कम रोग भार |
गैर-संचारी रोगों से समय-पूर्व मृत्यु में कमी |
समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए वैश्विक नीति ढाँचा |
| भारत के लिए प्रमुख सीख |
मध्य आयु में नियमित स्वास्थ्य जाँच को संस्थागत बनाना। |
जोखिम-आधारित निवारक स्वास्थ्य जाँच अपनाना। |
जीवन-चक्र एवं समानता-आधारित स्वास्थ्य मॉडल की ओर परिवर्तन। |