संदर्भ
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) ने पहली बार स्ट्रोक (Stroke) को एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में मान्यता दी, तथा रोकथाम एवं पुनर्वास प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) 2026 के प्रमुख बिंदु
- स्ट्रोक को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में मान्यता: WHA ने स्ट्रोक पर अपना पहला प्रस्ताव (Resolution) पारित किया, जिसमें रोकथाम, तीव्र देखभाल, पुनर्वास एवं दीर्घकालिक समर्थन तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया।
- एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (GAP-AMR), 2026–2036 पर वैश्विक कार्ययोजना का अंगीकरण: सदस्य देशों ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने के लिए एक नया समन्वित ढाँचा अपनाया, जिसमें मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य क्षेत्रों के एकीकृत दृष्टिकोण पर बल दिया गया।
- महामारी तैयारी पर ध्यान: सभा ने कानूनी रूप से बाध्यकारी महामारी समझौते पर वार्ताओं को जारी रखा, जिसका उद्देश्य वैश्विक तैयारी, निगरानी तंत्र एवं स्वास्थ्य संसाधनों की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
- अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR 2005) का सुदृढ़ीकरण: WHA ने संशोधित अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने पर बल दिया, जिससे प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग को सुदृढ़ किया जा सके।
- पुनर्वास एवं स्वास्थ्य तंत्र की तैयारी पर बल: सभा ने सुलभ पुनर्वास अवसंरचना, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर बल दिया, विशेषकर असंक्रामक रोगों (NCDs) के संदर्भ में।
- पूर्व प्रस्ताव के क्रियान्वयन की दिशा में पहल: जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य पर संचार, साझेदारी हेतु एक वैश्विक योजना भी प्रारंभ की गई।
- इसका उद्देश्य WHA77 प्रस्ताव का समर्थन करना तथा COP31 और उससे आगे के कार्यक्रमों की गति बनाए रखना है।
विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) के बारे में
- विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सर्वोच्च निर्णय-निर्माण एवं नीति-निर्धारण संस्था है, जिसमें 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल होते हैं।
- आयोजन: WHA का आयोजन प्रतिवर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में किया जाता है।
- मुख्य कार्य
- WHO के बजट एवं नीतियों का अनुमोदन
- WHO के महानिदेशक की नियुक्ति
- वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं एवं रोग प्रवृत्तियों की समीक्षा
- WHO संविधान के अनुच्छेद-19 के अंतर्गत अभिसमयों एवं समझौतों का अंगीकरण।
- पूर्व समझौते एवं प्रस्ताव
- अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR 2005) में संशोधन
- महामारी समझौते (Pandemic Agreement) पर वार्ताएँ
- नैतिक अंग प्रत्यारोपण संबंधी प्रस्ताव
- असंक्रामक रोगों एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर वैश्विक प्रस्ताव
- जामनगर (गुजरात) में WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना।
PW Only IAS विशेष
स्ट्रोक क्या है?
- स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, जो तब उत्पन्न होती है, जब मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त आपूर्ति बाधित या कम हो जाती है, जिससे मस्तिष्क ऊतकों को ऑक्सीजन एवं पोषक तत्त्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती है।
- यदि इसका तुरंत उपचार न किया जाए, तो यह मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षति, विकलांगता या मृत्यु का कारण बन सकता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्ट्रोक एक तीव्र तंत्रिका संबंधी अवस्था है, जो मस्तिष्कीय रक्त परिसंचरण में व्यवधान के कारण होती है, जिसके लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक बने रहते हैं या मृत्यु का कारण बनते हैं।
- स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक
- उच्च रक्तचाप (Hypertension)
- मधुमेह (Diabetes)
- तंबाकू एवं शराब का सेवन
- मोटापा एवं शारीरिक निष्क्रियता
- वायु प्रदूषण एवं अस्वास्थ्यकर आहार।
- स्ट्रोक के प्रकार
- इस्केमिक स्ट्रोक (Ischaemic Stroke): यह तब होता है, जब रक्त का थक्का मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनी को अवरुद्ध या संकीर्ण कर देता है, जिससे मस्तिष्क ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। यह स्ट्रोक का सबसे सामान्य प्रकार है और प्रायः उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं एथेरोस्क्लेरोसिस से संबंधित होता है।
- हेमरेजिक स्ट्रोक (Haemorrhagic Stroke): यह तब होता है जब मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव होता है और आस-पास की मस्तिष्क कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके प्रमुख कारणों में अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, एन्यूरिज्म एवं सिर की चोट शामिल हैं।
- ट्रांजिएंट इस्कीमिक अटैक (TIA) (Transient Ischaemic Attack – TIA): जिसे “मिनी-स्ट्रोक” भी कहा जाता है, यह मस्तिष्क में रक्त प्रवाह के अस्थायी अवरोध के कारण होता है। इसके लक्षण सामान्यतः कुछ मिनटों या घंटों में समाप्त हो जाते हैं, किंतु यह भविष्य में स्ट्रोक के जोखिम का महत्त्वपूर्ण संकेत होता है।
- भारत में स्ट्रोक का भार: भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,00,000 जनसंख्या पर 108–172 स्ट्रोक मामलों का अनुमान है, जिसमें उच्च मृत्यु दर एवं दीर्घकालिक विकलांगता की समस्या गंभीर बनी हुई है।
|
निष्कर्ष
WHA 2026 के प्रस्ताव , विशेषकर महामारी-उपरांत विश्व के संदर्भ में वैश्विक स्वास्थ्य शासन के समन्वित दृष्टिकोण, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं तथा सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हैं।