PWOnlyIAS विशेष
विजन महासागर (MAHASAGAR) के बारे में
- घोषणा: वर्ष 2025 में भारत द्वारा वैश्विक दक्षिण (Global South) तथा इंडो-पैसिफिक के लिए एक विस्तारित समुद्री परिकल्पना के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- पूर्ण रूप: ‘क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति’ (MAHASAGAR)।
- सागर (SAGAR) का विकास: सागर (SAGAR) अर्थात् क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की परिकल्पना का विस्तार हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) से व्यापक इंडो-पैसिफिक तक करता है, जो भारत के विकसित होते समुद्री एवं सामरिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
- प्रमुख स्तंभ: समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित एवं सहनशील आपूर्ति शृंखलाओं, संपर्क, ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy), आपदा सहनशीलता, क्षमता निर्माण, सतत् विकास तथा समावेशी क्षेत्रीय साझेदारियों को प्रोत्साहित करता है।
- सामरिक उद्देश्य: अंतरराष्ट्रीय विधि, विशेषकर समुद्र के विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) पर आधारित स्वतंत्र, खुले, समावेशी, सुरक्षित एवं नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक की भारत की परिकल्पना को सुदृढ़ करना।
भारत की इंडो-पैसिफिक नीति के बारे में
- इंडो-पैसिफिक एक भू-सामरिक एवं भू-आर्थिक क्षेत्र है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट, हिंद महासागर से प्रशांत महासागर तक विस्तृत है तथा एशिया, अफ्रीका एवं ओशिनिया की अर्थव्यवस्थाओं एवं सुरक्षा हितों को जोड़ता है।
- भारत की इंडो-पैसिफिक नीति एक सामरिक परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, संपर्क, आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देते हुए स्वतंत्र, खुले, समावेशी, नियम-आधारित, सुरक्षित एवं समृद्ध इंडो-पैसिफिक को प्रोत्साहित करना है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- स्वतंत्र, खुला एवं समावेशी इंडो-पैसिफिक: नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय विधि (UNCLOS, 1982) के सम्मान, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तथा किसी विशिष्ट देश को लक्ष्य बनाए बिना समावेशी क्षेत्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
- आसियान की केंद्रीयता (ASEAN): दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) को इंडो-पैसिफिक संरचना का आधार मानते हुए इंडो-पैसिफिक पर आसियान दृष्टिकोण (AOIP) का समर्थन करता है।
- समुद्री सुरक्षा: समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA), समुद्री डकैती-रोधी प्रयासों, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव तथा ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) में सहयोग को सुदृढ़ करता है।
- नियम-आधारित व्यवस्था: अंतरराष्ट्रीय विधि, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर में नौवहन एवं उड़ान की स्वतंत्रता का समर्थन करता है।
- संपर्क एवं आर्थिक सहयोग: सहनशील आपूर्ति शृंखलाओं, व्यापार, डिजिटल संपर्क, महत्त्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा तथा उच्च गुणवत्ता वाली अवसंरचना को प्रोत्साहित करता है।
- प्रमुख स्तंभ
- सागर (SAGAR): क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास, 2015 में घोषित भारत की समुद्री परिकल्पना, जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्रीय सहयोग पर केंद्रित है।
- महासागर (MAHASAGAR): क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति, वर्ष 2025 में घोषित भारत की विस्तारित समुद्री परिकल्पना, जो भारत की समुद्री परिकल्पना का विस्तार हिंद महासागर से व्यापक इंडो-पैसिफिक तक करती है।
- एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy): दक्षिण-पूर्व एशिया तथा व्यापक इंडो-पैसिफिक के साथ सामरिक, आर्थिक एवं संपर्क संबंधों को सुदृढ़ करती है।
- हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI): वर्ष 2019 में प्रारंभ, जिसका केंद्र समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, समुद्री संसाधन, क्षमता निर्माण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा व्यापार संपर्क है।
- प्रमुख साझेदार
- क्वाड (Quad): भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ समुद्री सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, आपूर्ति शृंखलाओं, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) में सहयोग।
- दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN): आर्थिक, संपर्क तथा समुद्री पहलों के माध्यम से व्यापक सहभागिता, साथ ही आसियान की केंद्रीयता का समर्थन।
- हिंद महासागर के साझेदार: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों, जिनमें श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, इंडोनेशिया तथा फ्राँस सम्मिलित हैं, के साथ सहयोग को सुदृढ़ करना।
- प्रशांत क्षेत्र के साझेदार: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान तथा प्रशांत द्वीपीय देशों (PICs) के साथ सामरिक संबंधों को सुदृढ़ करना।
भारत के लिए इंडो-पैसिफिक का महत्त्व
- समुद्री व्यापार का केंद्र: इसमें समुद्री संचार मार्ग (SLOCs) सम्मिलित हैं, जिनसे होकर भारत का अधिकांश व्यापार, ऊर्जा आयात तथा वाणिज्यिक नौवहन संचालित होता है।
- सामरिक सुरक्षा: समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्थिरता तथा महत्त्वपूर्ण समुद्रतलीय अवसंरचना की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- आर्थिक महत्त्व: यह भारत की आर्थिक वृद्धि, ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy), वैश्विक मूल्य शृंखलाओं तथा सहनशील महत्त्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन प्रदान करता है।
- भू-राजनीतिक महत्त्व: यह दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN), क्वाड (Quad), हिंद महासागर तटीय देशों तथा प्रशांत द्वीपीय देशों (PICs) के साथ भारत की सहभागिता का प्रमुख क्षेत्र है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग एवं सामरिक साझेदारियाँ सुदृढ़ होती हैं।
- वैश्विक दक्षिण के साथ सहभागिता: यह समावेशी एवं माँग-आधारित समुद्री सहयोग के माध्यम से वैश्विक दक्षिण (Global South) के विश्वसनीय विकास साझेदार एवं सशक्त आवाज के रूप में भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण मंच है।
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