संदर्भ
हाल ही में वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका की मैकमर्डो ड्राई वैलीज में स्थित टेलर ग्लेशियर से निकलकर लेक बॉनी में गिरने वाले ब्लड फॉल्स (Blood Falls) के पीछे छिपे एक शताब्दी पुराने रहस्य का समाधान कर लिया है।

मुख्य निष्कर्ष
- स्रोत: ब्लड फॉल्स का उद्गम टेलर ग्लेशियर के नीचे स्थित लौह समृद्ध, अत्यधिक लवणीय ब्राइन के एक प्राचीन जलाशय से होता है।
- तंत्र: ग्लेशियर की गति से उत्पन्न दाब ‘ब्राइन’ को उप-हिमानी मार्गों के माध्यम से प्रवाहित करता है, जिसके बाद यह सतह पर निकलता है।
- लाल रंग: वायु के संपर्क में आने पर घुलित लौह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड (जंग) का निर्माण करता है, जिससे इसे विशिष्ट लाल-भूरा रंग प्राप्त होता है।

- यह हिमीकृत क्यों नहीं है?
- अत्यधिक उच्च लवण सांद्रता जल के हिमांक को कम कर देती है।
- क्वथन के दौरान मुक्त होने वाली गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) भी ब्राइन को द्रव अवस्था में बनाए रखने में सहायक होती है।
- टेलर ग्लेशियर को निरंतर प्रवाहित द्रव जल वाला अब तक का सबसे शीत ज्ञात ग्लेशियर माना जाता है।
- महत्त्व: इस खोज का महत्त्व अंटार्कटिका के अलावा भी है, क्योंकि मंगल अथवा बृहस्पति के उपग्रह यूरोपा जैसे हिमाच्छादित खगोलीय पिंडों की सतह के नीचे भी इसी प्रकार के लवणीय पर्यावरण विद्यमान हो सकते हैं।
ब्लड फॉल्स के बारे में
- स्थान: टेलर ग्लेशियर, मैकमर्डो ड्राई वैलीज, अंटार्कटिका।
- खोज: इसका प्रथम अन्वेषण वर्ष 1911 में ऑस्ट्रेलियाई भू-वैज्ञानिक ग्रिफिथ टेलर द्वारा किया गया था।
- प्रमुख विशेषता: यह अंटार्कटिका में ‘सबग्लेशियल ब्राइन’ के निस्सरण के सर्वाधिक प्रसिद्ध उदाहरणों में से एक है।