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लद्दाख मैग्मैटिक आर्क

18 Mar 2026

संदर्भ

हाल ही में वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने लद्दाख मैग्मैटिक आर्क के 130 मिलियन वर्ष के विकासक्रम को समझाया है।

अधोगमन (Subduction) के बारे में

  • परिभाषा: अधोगमन एक भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें एक विवर्तनिक प्लेट दूसरी के नीचे चली जाती है और अभिसारी प्लेट सीमा पर पृथ्वी के मैंटल में धँस जाती है।
  • तंत्र: यह तब होता है, जब एक महासागरीय प्लेट, अधिक सघन होने के कारण, हल्की महाद्वीपीय या महासागरीय प्लेट से टकराती है और नीचे की ओर मैंटल में धकेल दी जाती है।
  • मुख्य विशेषताएँ: प्लेट सीमा पर गहरे महासागरीय गर्तों का निर्माण होता है।
    • अधोगमनशील प्लेट के ऊपर मैंटल के पिघलने से मैग्मैटिक आर्क का निर्माण होता है।
    • प्लेटों के बीच घर्षण और तनाव के कारण अधोगमन क्षेत्र में भूकंप आते हैं।
  • महत्त्व: यह प्लेट विवर्तनिकी और पर्वत निर्माण को संचालित करता है।
    • यह लद्दाख मैग्मैटिक आर्क जैसे मैग्मैटिक आर्क के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
    • यह भूपर्पटीय पदार्थों को पुनः मैंटल में लौटाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • उदाहरण: नियो-टेथिस महासागर का यूरेशियन प्लेट के नीचे उत्तर की ओर अधोगमन लद्दाख मैग्मैटिक आर्क के निर्माण का कारण बना।

संबंधित तथ्य

  • इस अध्ययन ने अधोगमन प्रक्रियाओं और भारतीय प्लेट तथा यूरेशियन प्लेट के बीच टक्कर के संबंध में नए दृष्टिकोण प्रदान किए हैं।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • अधोगमन तंत्र: लद्दाख मैग्मैटिक आर्क का निर्माण नियो-टेथिस महासागर की महासागरीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट के किनारे के नीचे उत्तर की ओर अधोगमन के कारण हुआ।
  • कार्यप्रणाली: इस अध्ययन में चट्टानों के भू-रासायनिक और समस्थानिक विश्लेषण का उपयोग करके विवर्तनिक और मैग्मैटिक इतिहास का पुनर्निर्माण किया गया।
  • तुलनात्मक विश्लेषण: शोधकर्ताओं ने निम्नलिखित से प्राप्त आँकड़ों की तुलना की—
    • द्रास–निदार द्वीपीय आर्क समुच्चय (पूर्व-टक्कर अवस्था)
    • लद्दाख बैथोलिथ (पूर्व-से-समकालीन संघट्ट अवस्था; कोहिस्तान-लद्दाख बैथोलिथ का भाग)
    • टक्कर के बाद निर्मित मैफिक डाइक
  • मैग्मैटिक नियंत्रण: दीर्घकालिक मैग्मैटिक विकास नियो-टेथिस महासागर की भू-गतिकी द्वारा नियंत्रित रहा।
  • मैग्मैटिक अवस्थाएँ: मैग्मैटिज्म के तीन प्रमुख चरण पहचाने गए:-
    • 160–110 मिलियन वर्ष: प्रारंभिक आर्क (पूर्व-टक्कर) मैग्मैटिज्म
    • 103–45 मिलियन वर्ष: सक्रिय आर्क (समकालीन टक्कर) मैग्मैटिज्म
    • 45 मिलियन वर्ष से कम: टक्कर के बाद का मैग्मैटिज्म।
  • भू-रासायनिक संकेत: प्रत्येक चरण में विशिष्ट भू-रासायनिक विशेषताएँ पाई गईं, जो परिवर्तित विवर्तनिकी परिस्थितियों को दर्शाती हैं।
  • स्लैब गतिकी: इसका विकास अधोगमनशील स्लैब की गतिकी से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है, जिसमें निम्नलिखित के बीच अंतःक्रिया शामिल है—
    • अधोगमनशील महासागरीय स्लैब
    • सेमी आर्क मैंटल वेज
    • ऊपर स्थित महाद्वीपीय भूपर्पटी
  • निष्कर्ष: यह अध्ययन अधोगमन से टक्कर तक की प्रक्रियाओं का एक स्थायी प्रमाण प्रस्तुत करता है, जो लद्दाख मैग्मैटिक आर्क के निर्माण और विकास की व्याख्या करता है।

जुरासिक से इओसीन काल के बारे में

  • समयावधि: जुरासिक से इओसीन काल की अवधि 201.3 मिलियन वर्ष पूर्व से 33.9 मिलियन वर्ष पूर्व तक है।
  • जुरासिक काल (201.3–145 मिलियन वर्ष)
    • गोंडवानालैंड के विखंडन और नियो-टेथिस महासागर के खुलने की विशेषता थी।
    • द्वीपीय आर्क में व्यापक मैग्मैटिक गतिविधियाँ संपादित हुई।
    • समुद्री अवसादन व्यापक रूप से हुआ, जिससे जीवाश्म-समृद्ध परतों का संरक्षण हुआ।
  • क्रेटेशियस काल (145–66 मिलियन वर्ष)
    • भारतीय प्लेट का उत्तर की ओर निरंतर संचलन हुआ।
    • अधोगमन से संबंधित मैग्मैटिक आर्क का निर्माण हुआ, जैसे- लद्दाख आर्क।
    • टेथिस क्षेत्र में चूना पत्थर, बलुआ पत्थर और शेल का व्यापक निक्षेपण हुआ।
  • पैलियोजीन काल (66–33.9 मिलियन वर्ष), जिसमें इओसीन शामिल है:
    • भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर का समय दर्शाता है।
    • नियो-टेथिस महासागर का विनाश।
    • बैथोलिथ का निर्माण, समकालीन मैग्मैटिज्म तथा हिमालय के प्रारंभिक उत्थान की शुरुआत हुई।
  • महत्त्व: यह समयावधि उत्तर-पश्चिमी हिमालय में अधोगमन, आर्क मैग्मैटिज्म और महाद्वीपीय टक्कर की संपूर्ण प्रक्रिया का अभिलेख सुरक्षित रखती है।

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क (LMA) के बारे में

  • परिभाषा: LMA ट्रांस-हिमालय में आग्नेय चट्टानों की एक पट्टी है, जिसका निर्माण जुरासिक से इओसीन काल (201.3 मिलियन वर्ष पूर्व से 33.9 मिलियन वर्ष पूर्व) के दौरान हुआ।
  • स्थान: यह लद्दाख क्षेत्र में स्थित है और हिमालय में ‘इंडस स्यूचर जोन’ के साथ विस्तृत है।
  • निर्माण: इसका निर्माण नियो-टेथिस महासागर की महासागरीय प्लेट के यूरेशियन किनारे के नीचे उत्तर की ओर अधोगमन के कारण हुआ।
    • प्रारंभिक चरण में यह क्षेत्र नियो-टेथिस महासागर से उभरते मैग्मैटिक द्वीपों की एक शृंखला जैसा था।
    • द्रास–निदार द्वीपीय आर्क समुच्चय की चट्टानें इस अवस्था के प्रमाण संरक्षित रखती हैं।
      • इनके रासायनिक संकेत बताते हैं कि मैग्मा मुख्यतः मैंटल से उत्पन्न हुआ, जिसमें अधोगमनशील महासागरीय प्लेट के साथ नीचे खींचे गए अवसादों का सीमित योगदान था।
  • चट्टानों के प्रकार: इसमें मुख्यतः ग्रेनाइट, डियोराइट तथा मैग्मैटिक चट्टानें पाई जाती हैं, जो पूर्व मैग्मैटिक गतिविधियों को दर्शाती हैं।
  • विवर्तनिक महत्त्व: यह एक प्राचीन अधोगमन क्षेत्र को दर्शाता है और प्लेट विवर्तनिकी प्रक्रियाओं के प्रमाण प्रदान करता है।
  • खनिज क्षमता: यह ताँबा और सोना जैसे धात्विक खनिज निक्षेपों से संबंधित है।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह हिमालय के विकास तथा महाद्वीपीय टक्कर प्रक्रियाओं को समझने में सहायक है।

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क का विकास

प्रारंभिक चरण: द्वीपीय आर्क अवस्था

  • यह क्षेत्र नियो-टेथिस महासागर से उभरते मैग्मैटिक द्वीपों की एक शृंखला के समान था।
  • द्रास–निदार द्वीपीय आर्क समुच्चय की चट्टानें इस अवस्था के प्रमाण संरक्षित रखती हैं।
  • इनके रासायनिक संकेत बताते हैं कि मैग्मा मुख्यतः मैंटल से उत्पन्न हुआ।
  • अधोगमनशील महासागरीय प्लेट के साथ नीचे खींचे गए अवसादों का योगदान बहुत कम था।

प्लेट अभिसरण के दौरान विकास

  • जैसे-जैसे विवर्तनिक प्लेटें अभिसरित होती रहीं, आर्क का विकास होता गया।
  • भूमि की गहराई में ग्रेनाइट के बड़े निकाय निर्मित हुए, जिन्हें लद्दाख बैथोलिथ कहा जाता है।

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  • इन चट्टानों में महाद्वीपीय पदार्थों के अधिक प्रबल रासायनिक संकेत दिखाई देते हैं।
  • यह संकेत देता है कि अवसाद और भूपर्पटी के टुकड़े मैग्मा में पुनर्चक्रित हो रहे थे।

टक्कर के निकट आने का प्रभाव

  • भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच निकट हुई टक्कर ने पूरे तंत्र को पुनः आकार देना शुरू किया।
  • अधोगमनशील प्लेट अधिक अवसादों को मैंटल में लेकर जाने लगी।
  • इससे मैग्मा का संवर्द्धन हुआ और उसकी रासायनिक संरचना में परिवर्तन आया।

टक्कर और हिमालय का उत्थान

  • अंततः दोनों प्लेटें टकराईं और नियो-टेथिस महासागर समाप्त हो गया।
  • इस टक्कर के परिणामस्वरूप हिमालय का उत्थान हुआ।

टक्कर के बाद का मैग्मैटिज्म

  • मुख्य टक्कर के बाद भी पिघला हुआ मैग्मा दरारों के माध्यम से ऊपर की ओर उठता रहा।
  • इसके परिणामस्वरूप मैफिक डाइक (गहरे रंग की मैग्मैटिक चट्टानों की संकीर्ण पट्टियाँ, जो पुरानी संरचनाओं को काटती हैं) का निर्माण हुआ।
  • ये बाद के मैग्मा ऐसे मैंटल स्रोत से आए थे, जो पूर्व विवर्तनिक प्रक्रियाओं द्वारा समृद्ध हो चुका था।

नियो-टेथिस महासागर के बारे में

  • परिभाषा: नियो-टेथिस महासागर एक प्राचीन महासागर था, जो मेसोजोइक से प्रारंभिक सेनोजोइक युग के दौरान भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के मध्य स्थित था।
  • उत्पत्ति: इसका निर्माण गोंडवानालैंड के विखंडन के बाद हुआ, जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकते हुए नई महासागरीय भूपर्पटी का निर्माण करने लगी।
  • विस्तार: जुरासिक और क्रेटेशियस काल के दौरान यह महासागर अत्यधिक विस्तृत हुआ और एक प्रमुख समुद्री बेसिन के रूप में कार्य करता रहा।
  • अधोगमन: इससे महासागरीय स्थलमंडल यूरेशियन प्लेट के नीचे अधोगमित हुआ, जिससे लद्दाख मैग्मैटिक आर्क जैसे मैग्मैटिक आर्क का निर्माण हुआ।
  • समापन: निरंतर अभिसरण के कारण यह महासागर धीरे-धीरे सँकरा होता गया और लगभग 55–50 मिलियन वर्ष पूर्व पूर्णतः समाप्त हो गया।
  • टक्कर: भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर ने नियो-टेथिस महासागर के पूर्ण लोप को चिह्नित किया।
  • प्रमाण: इसके भू-वैज्ञानिक प्रमाणों में ओफियोलाइट्स, समुद्री अवसाद तथा इंडस–त्सांगपो स्यूचर जोन शामिल हैं।
  • महत्त्व: इसके लोप की प्रक्रिया ने हिमालय के उत्थान और निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क

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