संदर्भ
वैश्विक तापमान प्रवृत्तियों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भारत रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना कर रहा है, जिससे वर्ष 2026 में यह वैश्विक ताप केंद्र बन गया है। विश्व के 100 सबसे गर्म शहरों में से 95 भारत में हैं, जहाँ तापमान 45°C से अधिक दर्ज किया गया।
वैश्विक तापमान प्रवृत्तियों के प्रमुख बिंदु
- वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान: भारत में विश्व के 100 में से 95 सबसे गर्म शहर स्थित हैं, जो पश्चिम एशिया और अफ्रीका जैसे पारंपरिक गर्म क्षेत्रों से भी अधिक है।
- अधिक प्रभावित क्षेत्र: उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत, जैसे- उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हैं।
- उदाहरण: बाँदा (उत्तर प्रदेश) में लगभग 47.4°C तापमान दर्ज किया गया।

- तापमान प्रवृत्ति: कई शहरों में 43°C–47°C के बीच तापमान दर्ज हो रहा है, जो मानसून पूर्व हीटवेव की तीव्रता को दर्शाता है।
- रात के समय भी तापमान अधिक रहने से ऊष्मा तनाव बढ़ रहा है।
अत्यधिक गर्मी के प्रमुख कारण
- स्थायी उच्च-दाब तंत्र (प्रतिचक्रवात): पश्चिमी भारत के ऊपर शक्तिशाली प्रतिचक्रवात: गर्म वायु के विसरण को अवरुद्ध कर देता है, जिससे ऊर्ध्वाधर परिसंचरण (vertical circulation) बाधित हो जाता है तथा वायुमंडलीय शीतलन की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है, परिणामस्वरूप सतही तापमान में वृद्धि होती है।
- स्वच्छ आकाश और तीव्र सौर विकिरण: स्वच्छ आकाश के कारण प्रत्यक्ष सौर ताप बढ़ता है, जिससे भूमि का तापमान तेजी से बढ़ता है।
- शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएँ: राजस्थान और पाकिस्तान के शुष्क क्षेत्रों से आने वाली गर्म हवाएँ मैदानों में तापमान को और बढ़ाती हैं।
- हिमावरण में कमी: हिमालय और यूरेशिया में कम बर्फ होने से परावर्तन क्षमता (एल्बिडो) घटती है, जिससे क्षेत्रीय तापवृद्धि बढ़ती है।
- महासागरीय एवं जलवायु कारक: अल नीनो-दक्षिणी दोलन-तटस्थ स्थिति और समुद्रों के गर्म होने से वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है, जिससे मानसून पूर्व राहत में देरी होती है।
‘हॉटबॉक्स प्रभाव’ के बारे में
- ‘हॉटबॉक्स प्रभाव’ ऐसी स्थिति को दर्शाता है, जहाँ किसी क्षेत्र के ऊपर गर्म वायु का प्रसार अवरुद्ध हो जाता है, जिससे लगातार उच्च तापमान बना रहता है और शीतलन बहुत कम हो जाता है, ठीक एक बंद डिब्बे (बॉक्स) की तरह।

- मुख्य कारण
- वायुमंडलीय अवरोध (प्रतिचक्रवात) ऊष्मा को बाहर उत्सर्जित होने से रोकता है।
- शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (कंकरीट संरचनाएँ और हरित आवरण की कमी)।
- निम्न वायु संचलन से ऊष्मा का प्रसार नहीं हो पाता है।
- वाष्पीकरण के लिए पर्याप्त आर्द्रता न होने से प्राकृतिक शीतलन सीमित हो जाता है।
- प्रभाव
- जन स्वास्थ्य पर प्रभाव: विशेषकर कमजोर वर्गों में हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण और मृत्यु दर में वृद्धि।
- आर्थिक हानि: श्रम उत्पादकता में कमी के कारण वर्ष 2030 तक लगभग 250 अरब डॉलर तक का संभावित नुकसान।
- ऊर्जा और जल संकट: शीतलन की बढ़ती आवश्यकता से बिजली की माँग में वृद्धि और जल की कमी।
- शहरी दबाव: शहरों में रात के तापमान वृद्धि से जीवन संबंधी योग्यता और अवसंरचना पर दबाव बढ़ता है।
निष्कर्ष
भारत में ‘हॉटबॉक्स’ हीटवेव जलवायु परिवर्तन, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शहरीकरण के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए हीट एक्शन प्लान, सतत् शहरी नियोजन और जलवायु-लचीली नीतियों के माध्यम से त्वरित अनुकूलन आवश्यक है।