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कृषि में उर्वरक और ईंधन आपूर्ति संकट

27 Apr 2026

संदर्भ

पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण उर्वरक और ईंधन की आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान ने भारत के जीवाश्म ईंधन-निर्भर कृषि मॉडल की कमजोरियों को उजागर किया है।

उर्वरक और ईंधन आपूर्ति को प्रभावित करने वाले हालिया संघर्ष

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान: इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक उर्वरक व्यापार का लगभग एक-तिहाई प्रभावित हुआ, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में आपूर्ति बाधित हुई।
  • प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं द्वारा निर्यात प्रतिबंध: रूस (लगभग 20% वैश्विक उर्वरक व्यापार) और चीन ने उर्वरक निर्यात सीमित कर दिया, जिससे कमी और बढ़ गई।
  • इनपुट लागत में वृद्धि: वैश्विक आपूर्ति तनावों के कारण उर्वरक और ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई।
  • ऊर्जा निर्भरता का झटका: भारत अपनी प्राकृतिक गैस (उर्वरक उत्पादन के लिए) का 50% से अधिक आयात करता है, जिससे संवेदनशीलता बढ़ती है।

भारत की जीवाश्म ईंधन-आधारित कृषि इनपुट पर निर्भरता

  • उर्वरक-प्रधान खेती: NPK उर्वरकों की खपत वर्ष 1950-51 में 69,800 टन से बढ़कर 2024-25 में 32.9 मिलियन टन हो गई।
  • उच्च-संकेंद्रित उर्वरकों की ओर झुकाव: यूरिया (46% नाइट्रोजन) का प्रभुत्व है, जिसकी खपत 38.8 मिलियन टन है, जिससे पारंपरिक कम-पोषक तत्व वाले पदार्थों का उपयोग क्रमशः घटता गया है।

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  • यांत्रिकीकरण पर निर्भरता: ट्रैक्टरों की संख्या 12 मिलियन से अधिक हो गई है, जिसने जुताई करने वाले पशुओं की जगह ले ली गई है और डीजल पर निर्भरता बढ़ गई है।
    • वर्ष 2024–25 में कृषि कार्यों में कुल ऊर्जा/कार्य क्षमता में पशुओं का योगदान घटकर मात्र 2.3% रह गया है।
  • पेट्रो-रसायन आधारित इनपुट: कीटनाशक पेट्रोलियम से प्राप्त विलायकों और पायसीकरण पर निर्भर करते हैं।

किसानों पर प्रभाव

  • इनपुट उपलब्धता में बाधा: आपूर्ति में व्यवधान के कारण फसल के महत्त्वपूर्ण चरणों में उर्वरक और ईंधन की उपलब्धता घटती है।
  • कृषि लागत में वृद्धि: डीजल (ट्रैक्टर के लिए लगभग 6–7 लीटर/घंटा) और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत में वृद्धि होती है।
  • कृषि संकट: बढ़ती लागत और अनिश्चित आय के कारण लाभ घटता है, विशेषकर छोटे किसानों के लिए।
  • खाद्य सुरक्षा पर खतरा: आयातित इनपुट पर निर्भरता से कृषि उत्पादन की स्थिरता प्रभावित होती है।

आगे की राह

  • जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैव-इनपुट और पारंपरिक तरीकों को अपनाना।
  • संसाधन दक्षता में सुधार: सूक्ष्म सिंचाई, परिशुद्ध कृषि और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना।
  • घरेलू क्षमता सुदृढ़ करना: स्वदेशी उर्वरक उत्पादन और वैकल्पिक पोषक स्रोतों को बढ़ाना।

निष्कर्ष

कृषि में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना आवश्यक है, ताकि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुदृढ़ता, सततता और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कृषि में उर्वरक और ईंधन आपूर्ति संकट

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