अन्य देशों की निर्यात रणनीति
- चीन
- विनिर्माण का पैमाना और मूल्य शृंखला उन्नयन: चीन की निर्यात रणनीति बड़े पैमाने पर विनिर्माण, औद्योगिक सब्सिडी, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण तथा उच्च-मूल्य क्षेत्रों जैसे विद्युत वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रोबोटिक्स और अर्द्धचालकों की ओर अग्रसर होने पर केंद्रित है।
- मेड इन चाइना 2025 नीति का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण में चीन की प्रतिस्पर्द्धात्मकता और वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाना था।
- वियतनाम
- मुक्त व्यापार समझौता-आधारित बाजार पहुँच: वियतनाम ने मुक्त व्यापार समझौतों, कम लागत वाले विनिर्माण और निर्यात-उन्मुख प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का उपयोग कर इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, जूते तथा उपभोक्ता वस्तुओं का एक प्रमुख केंद्र बनने में सफलता प्राप्त की है।
- इसकी निर्यात रूपरेखा में बाजार विविधीकरण, पारंपरिक बाजारों में वियतनामी वस्तुओं का विस्तार और नए संभावित बाजारों में प्रवेश पर जोर दिया गया है।
- जर्मनी
- गुणवत्ता, ब्रांडिंग और ‘मित्तेलश्टैंड’ नामक निर्यातकों का समर्थन: जर्मनी की निर्यात सफलता उच्च गुणवत्ता वाले अभियांत्रिकी उत्पादों, ‘मित्तेलश्टैंड’ नामक सशक्त सूक्ष्म एवं मध्यम निर्यातकों, व्यावसायिक कौशल और सक्रिय निर्यात संवर्द्धन पर आधारित है।
- जर्मन सरकार विदेशी व्यापार मेलों, बाजार सूचना, वाणिज्य मंडलों के माध्यम से परामर्श सेवाओं और निर्यात ऋण गारंटी (हर्मीस कवर) के माध्यम से निर्यातकों का समर्थन करती है।
- दक्षिण कोरिया
- रणनीतिक क्षेत्रीय विशेषीकरण: दक्षिण कोरिया वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी क्षेत्रों जैसे अर्द्धचालक, ऑटोमोबाइल, जहाज निर्माण, बैटरियाँ और इलेक्ट्रॉनिक्स पर ध्यान केंद्रित करता है।
- इसका व्यापार मंत्रालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, अर्द्धचालक, जहाज निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तथा प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा देता है, जो एक क्षेत्र-विशिष्ट निर्यात रणनीति को दर्शाता है।
- जापान
- प्रौद्योगिकी और ब्रांड विश्वसनीयता: जापान का निर्यात मॉडल सटीक विनिर्माण, उच्च अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद विश्वसनीयता और सशक्त वैश्विक ब्रांडों पर आधारित है।
- यह ऑटोमोबाइल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और उच्च-स्तरीय घटकों जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहाँ गुणवत्ता और दीर्घकालिक विश्वास निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बनाए रखते हैं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- नवाचार-प्रेरित निर्यात: अमेरिका की निर्यात रणनीति प्रौद्योगिकी नेतृत्व, बौद्धिक संपदा, उच्च-मूल्य सेवाएँ, रक्षा निर्यात, एयरोस्पेस, सॉफ्टवेयर, औषधियाँ और उन्नत विनिर्माण पर आधारित है।
- इसकी प्रतिस्पर्द्धात्मकता सशक्त विश्वविद्यालयों, गहरे पूँजी बाजारों, अनुसंधान एवं विकास व्यय और डिजिटल मंचों में वैश्विक प्रभुत्व से आती है।
- सिंगापुर
- व्यापार केंद्र और लॉजिस्टिक्स उत्कृष्टता: सिंगापुर ने अपनी निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता विश्व-स्तरीय बंदरगाहों, कुशल सीमा शुल्क, कम व्यापार बाधाओं, उच्च गुणवत्ता वाले लॉजिस्टिक्स और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ एकीकरण के माध्यम से विकसित की है।
- इसकी रणनीति बड़े घरेलू बाजार पर आधारित न होकर पुनः-निर्यात, वित्त, शिपिंग और सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित होने पर आधारित है।
- बांग्लादेश
- श्रम-प्रधान निर्यात पर ध्यान: बांग्लादेश ने परिधान और वस्त्र क्षेत्र पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें कम श्रम लागत, बड़े पैमाने के औद्योगिक समूह और वरीयता प्राप्त बाजार पहुँच का उपयोग किया गया है।
- इसकी निर्यात रणनीति दर्शाती है कि क्षेत्रीय एकाग्रता तीव्र निर्यात वृद्धि उत्पन्न कर सकती है, हालाँकि इससे सीमित निर्यात बास्केट पर निर्भरता भी बढ़ती है।
- मलेशिया और थाईलैंड
- वैश्विक मूल्य-शृंखला एकीकरण: इन देशों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स समूह, ऑटोमोबाइल आपूर्ति-शृंखलाएँ और आसियान व्यापार एकीकरण का उपयोग कर वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में प्रवेश किया है। इनका मॉडल दर्शाता है कि घरेलू उद्योगों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जोड़ना निर्यात वृद्धि के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
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