संदर्भ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे तथा अन्य नॉर्डिक साझेदारों को शामिल करते हुए पाँच देशों की यात्रा पर हैं, जिसका उद्देश्य रणनीतिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकीय सहयोग को सुदृढ़ करना है।
संबंधित तथ्य
- द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन: भारत और नीदरलैंड्स ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया।
- रणनीतिक साझेदारी एक औपचारिक, दीर्घकालिक राजनयिक संबंध होता है, जो संप्रभु देशों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच साझा दीर्घकालिक हितों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होता है।

- समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर: दोनों देशों ने 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जो जल प्रबंधन, कृषि, स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, अर्द्धचालक, गतिशीलता और महत्त्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं।
- अर्द्धचालक निर्माण सहयोग के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स लिथोग्राफी (ASML) के बीच एक महत्त्वपूर्ण समझौता किया गया।
- चोल-कालीन कलाकृतियों की वापसी: नीदरलैंड्स ने 14 वर्षों के राजनयिक प्रयास के बाद चोल-कालीन ‘आनैमंगलम्’ ताम्र-पत्र भारत को वापस किए, जो बढ़ते सांस्कृतिक सहयोग को दर्शाता है।
- भारत-नॉर्डिक सहभागिता: इस यात्रा में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भागीदारी भी शामिल है, जिसमें नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड शामिल हैं।
- स्वीडिश नागरिक सम्मान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस” प्रदान किया गया, जो द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रयासों की मान्यता है।
भारत–नीदरलैंड्स संबंधों के बारे में
- भारत और नीदरलैंड्स के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग के आधार पर सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंध हैं।
- संबंधों की ऐतिहासिक उत्पत्ति: द्विपक्षीय संबंधों की शुरुआत 17वीं शताब्दी में हुई, जब डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के साथ वाणिज्यिक संबंध स्थापित किए।
- राजनयिक संबंध: भारत की स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1947 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए गए।
भारत और नीदरलैंड्स के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन: नीदरलैंड्स अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से बाढ़ नियंत्रण, नदी पुनर्जीवन और सतत् जल प्रबंधन में भारत का समर्थन करता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा और हरित संक्रमण: दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और सतत् अवसंरचना परियोजनाओं में सहयोग करते हैं।
- हाल के समझौता ज्ञापनों ने स्वच्छ ऊर्जा और महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।
- अर्द्धचालक और उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग: अर्द्धचालक सहयोग संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, विशेष रूप से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स–ASML साझेदारी के माध्यम से।
- इसमें उन्नत विनिर्माण, नवाचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ भी शामिल हैं।
- कृषि और खाद्य प्रसंस्करण: दोनों देश कृषि प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण और सतत् कृषि पद्धतियों में सहयोग करते हैं।
- समुद्री और लॉजिस्टिक्स सहयोग: नीदरलैंड्स समुद्री व्यापार प्रणालियों में अपनी विशेषज्ञता के कारण भारत के बंदरगाह आधुनिकीकरण और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना विकास में समर्थन करता है।
- सुदृढ़ द्विपक्षीय व्यापार: भारत और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2023–24 में लगभग 27 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा।
- नीदरलैंड्स यूरोप में भारत के सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है और भारत के वस्तु निर्यात का 5% से अधिक हिस्सा रखता है।
- भारत के प्रमुख निर्यात: भारत पेट्रोलियम उत्पाद, औषधियाँ, रसायन, मशीनरी और वस्त्र नीदरलैंड्स को निर्यात करता है।
- विदेशी निवेश भागीदार: नीदरलैंड्स भारत में लॉजिस्टिक्स, प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रमुख विदेशी निवेशकों में से एक है।
- नीदरलैंड्स भारत में चौथा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक है, जिसके संचयी निवेश प्रवाह वर्ष 2000 से अब तक 55 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हैं।
- भारतीय प्रवासी उपस्थिति: नीदरलैंड्स यूरोप में (यूनाइटेड किंगडम के बाद) दूसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय का केंद्र है, जिसकी संख्या 2,40,000 से अधिक है।
- यह समुदाय दो मुख्य समूहों से मिलकर बना है—ऐतिहासिक रूप से स्थापित इंडो-सूरीनाम (हिंदुस्तानी) समुदाय तथा तेजी से बढ़ती आधुनिक भारतीय प्रवासी और अंतरराष्ट्रीय छात्र।
- सांस्कृतिक और विरासत सहयोग: चोल-कालीन ताम्र-पत्रों की वापसी सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत कलाकृतियों की पुनर्वापसी में बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
‘समझौता ज्ञापनों’ का संभावित महत्त्व
- भारत के अर्द्धचालक पारितंत्र को सुदृढ़ करना: अर्द्धचालक समझौते भारत के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप विनिर्माण केंद्र बनने के उद्देश्य को समर्थन दे सकते हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा और स्थायित्व को सुदृढ़ करना: नवीकरणीय ऊर्जा और महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत कर सकता है तथा आयात निर्भरता को कम कर सकता है।
- प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना: उन्नत प्रौद्योगिकी और नवाचार में साझेदारी आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत की प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को समर्थन देती है।
- यूरोप में रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार: यह रणनीतिक साझेदारी बदलते भू-राजनीतिक और आपूर्ति-शृंखला पुनर्संरेखण के बीच यूरोप के साथ भारत की सहभागिता को सुदृढ़ करती है।
- जलवायु और जल संबंधी शासन में सुधार: जल प्रबंधन में डच विशेषज्ञता भारत के जलवायु अनुकूलन, बाढ़ शमन और शहरी सततता पहलों को समर्थन दे सकती है।
- सांस्कृतिक कूटनीति को गहन बनाना: चोल-कालीन कलाकृतियों की वापसी भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और विरासत वस्तुओं की वैश्विक पुनर्वापसी प्रयासों को सुदृढ़ करती है।
निष्कर्ष
भारत–नीदरलैंड्स रणनीतिक साझेदारी आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकीय सहयोग, सांस्कृतिक कूटनीति और उभरती भूराजनीतिक प्राथमिकताओं के बीच बढ़ते अभिसरण को दर्शाती है।