संदर्भ
भारत, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के अध्यक्ष के रूप में, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष विशेषतः हिंद महासागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्याप्त व्यवधानों से उत्पन्न समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
संबंधित तथ्य
- इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन का वर्ष 2027 का शिखर सम्मेलन संगठन की 30वीं वर्षगाँठ का स्मरण आयोजन होगा।
- हाल ही में हिंद महासागर संवाद का सह-आयोजन इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन और भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में किया गया।
- यह संवाद “ट्रैक 1.5” सम्मेलन के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारी, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और नीतिगत कार्यकर्ता शामिल हुए।
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के बारे में
- स्थापना: इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1997 में की गई थी।
- सदस्य: इसमें 23 सदस्य देश और 12 संवाद साझेदार शामिल हैं, जो क्षेत्रीय सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करते हैं।
- एशिया: भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ईरान, मलेशिया, मालदीव, ओमान, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
- अफ्रीका: केन्या, मेडागास्कर, मोजांबिक, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, कोमोरोस, मॉरीशस, सेशेल्स।
- ओशिनिया: ऑस्ट्रेलिया।
- यूरोप: फ्राँस।
- संवाद साझेदार: चीन, मिस्र, यूरोपीय संघ, जर्मनी, इटली, जापान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, तुर्किए, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
- सचिवालय: एबेन, मॉरीशस।
- प्रशासन: विदेश मंत्रियों की परिषद, जो IORA की सर्वोच्च निर्णय-निर्माण संस्था है, क्षेत्रीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए प्रतिवर्ष बैठक करती है।
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका
- समुद्री सुरक्षा और संरक्षण: समुद्री डकैती, आतंकवाद, तस्करी तथा समुद्री मार्गों के बढ़ते सैन्यीकरण के कारण हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा एक प्रमुख चिंता बन गई है।
- पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास के खतरे समुद्री संचार रेखाओं (SLOCs) की सुरक्षा के महत्त्व को और अधिक रेखांकित करते हैं।
- ‘ब्लू इकोनॉमी’ को सुदृढ़ करना: भारत ब्लू इकोनॉमी को सतत् विकास और क्षेत्रीय समृद्धि का प्रमुख चालक मानता है।
- हिंद महासागर में विशाल समुद्री संसाधन उपलब्ध हैं, जो मत्स्यपालन, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, नौवहन और तटीय आजीविका को समर्थन दे सकते हैं।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु प्रत्यास्थता: हिंद महासागर क्षेत्र चक्रवात, सुनामी, समुद्र-स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन और चरम मौसम घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- जलवायु परिवर्तन विशेषकर लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए अस्तित्वगत खतरा उत्पन्न करता है।
- भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि को आगे बढ़ाना: भारत IORA को अपनी व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ मानता है।
- हिंद महासागर वैश्विक व्यापार, कनेक्टिविटी और भू-राजनीतिक संतुलन का केंद्र है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग शांति और समृद्धि के लिए आवश्यक हो जाता है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ करना: भारत की अध्यक्षता तटीय राज्यों के मध्य एक प्रमुख अभिव्यक्ति के रूप में उसकी भूमिका को मजबूत करती है।
- भारत इस मंच का उपयोग अफ्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और द्वीपीय देशों के साथ जुड़ाव को गहरा करने के लिए कर सकता है।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ करना: IORA के अधिकांश सदस्य विकासशील विश्व से संबंधित हैं और गरीबी, जलवायु संवेदनशीलता, खाद्य असुरक्षा, सीमित अवसंरचना तथा समुद्री खतरों जैसी साझा चुनौतियों का सामना करते हैं।
- भारत की अध्यक्षता उसे वैश्विक दक्षिण के देशों के मध्य पारस्परिक विकास और क्षमता निर्माण पर आधारित सहयोग को बढ़ावा देने में सक्षम बनाती है।
- एक प्रमुख समुद्री शक्ति बनने की भारत की आकांक्षा के अनुरूप: हिंद महासागर के केंद्र में भारत की भौगोलिक स्थिति उसे प्राकृतिक समुद्री लाभ प्रदान करती है।
- IORA के माध्यम से भारत स्वयं को एक महत्त्वपूर्ण समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
- महत्त्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा में सहायता: हिंद महासागर वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है, जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य, बाब-अल-मंडेब और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संकीर्ण मार्गों से गुजरने वाली महत्त्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति शामिल है।
- क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सतत् विकास को समर्थन: भारत की अध्यक्षता सहयोगात्मक सुरक्षा और शांतिपूर्ण क्षेत्रीय सहभागिता पर बल देती है, न कि टकराव या गुटबंदी की राजनीति पर।
- IORA के माध्यम से भारत सदस्य देशों के बीच सतत् विकास, जलवायु प्रत्यास्थता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के समक्ष चुनौतियाँ
- कमजोर संस्थागत संरचना: इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन के पास यूरोपीय संघ या आसियान जैसे संगठनों की तुलना में मजबूत संस्थागत ढाँचा और निर्णय-निर्माण अधिकार का अभाव है।
- हिंद महासागर में बढ़ते समुद्री खतरों के बावजूद, IORA के पास सामूहिक समुद्री सुरक्षा उपायों को लागू करने की सीमित क्षमता है।
- सीमित वित्तीय संसाधन: IORA सदस्य देशों के स्वैच्छिक योगदान पर अत्यधिक निर्भर करता है, जिससे इसकी क्षेत्रीय पहलों को लागू करने की क्षमता सीमित हो जाती है।
- कई प्रस्तावित ब्लू इकोनॉमी और जलवायु प्रत्यास्थता परियोजनाएँ अपर्याप्त वित्तीय सहायता के कारण अधूरी रह जाती हैं।
- प्रवर्तन तंत्र का अभाव: IORA मुख्यतः एक परामर्शात्मक निकाय के रूप में कार्य करता है और सदस्य देशों पर बाध्यकारी प्रवर्तन शक्तियों का अभाव है।
- समुद्री सहयोग या अवैध मत्स्यन जैसे मुद्दों पर सहमति बनने के बाद भी उसका क्रियान्वयन पूरी तरह देशों की इच्छा पर निर्भर करता है।
- हिंद महासागर में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा: प्रमुख शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
- चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य समुद्री प्रभाव तथा सैन्य उपस्थिति को लेकर प्रतिस्पर्द्धा क्षेत्रीय सहयोग को जटिल बनाती है।
- चीन की बढ़ती उपस्थिति: चीन का बंदरगाह विकास और नौसैनिक पहुँच के माध्यम से बढ़ता रणनीतिक तथा आर्थिक प्रभाव क्षेत्रीय देशों के लिए चिंता का विषय है।
- हंबनटोटा बंदरगाह और ग्वादर बंदरगाह में उसकी भागीदारी को प्रायः उसकी “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के रूप में देखा जाता है।
- समुद्री सुरक्षा खतरे: हिंद महासागर समुद्री डकैती, तस्करी और समुद्री आतंकवाद जैसे खतरों का सामना करता है, जो व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
- उदाहरण: अदन की खाड़ी में सोमाली समुद्री डकैती ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरे में डाला और भारत सहित कई देशों को नौसैनिक गश्त बढ़ाने के लिए बाध्य किया।
- हिंद महासागर का नौसैनिक सैन्यीकरण: प्रमुख शक्तियाँ क्षेत्र में अपने नौसैनिक तैनाती और सैन्य अवसंरचना को बढ़ा रही हैं।
- डिएगो गार्सिया का एक अमेरिकी सैन्य अड्डे के रूप में रणनीतिक महत्त्व हिंद महासागर में सैन्यीकरण की वृद्धि को दर्शाता है।
- विविध राजनीतिक और आर्थिक हित: IORA में शामिल देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएँ, आर्थिक क्षमता और राजनीतिक प्रणालियाँ भिन्न-भिन्न हैं, जिससे सर्वसम्मति बनाना कठिन हो जाता है।
- उदाहरण: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और चीन के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सदस्य देशों के बीच विभाजन उत्पन्न करते हैं।
कूटनीति के प्रकार: एक परिदृश्य
| कूटनीति का प्रकार |
प्रतिभागी |
परस्पर क्रिया का स्वरूप |
आधिकारिक स्थिति |
मुख्य उद्देश्य |
उदाहरण |
| ट्रैक 1 कूटनीति |
सरकार के प्रतिनिधि, मंत्री, राजनयिक, राष्ट्राध्यक्ष |
सरकारों के बीच औपचारिक वार्ता |
पूर्णतः आधिकारिक एवं राज्य-द्वारा नेतृत्व |
निर्णय-निर्माण,संधियाँ, संघर्ष समाधान |
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकारों के मध्य द्विपक्षीय वार्ता। |
| ट्रैक 1.5 कूटनीति |
अधिकारी, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, थिंक टैंक, पूर्व राजनयिक |
अर्द्ध-औपचारिक संवाद (आधिकारिक + अनौपचारिक सहभागिता)। |
आंशिक रूप से आधिकारिक |
नीतिगत परामर्श एवं विश्वास निर्माण |
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन के अंतर्गत आयोजित इंडियन ओशन डायलॉग। |
| ट्रैक 2 कूटनीति |
शिक्षाविद, विद्वान, सेवानिवृत्त अधिकारी, सिविल सोसायटी, थिंक टैंक |
अनौपचारिक एवं गैर-सरकारी चर्चा। |
अनौपचारिक |
विचार उत्पन्न करना, तनाव कम करना, बैकचैनल संचार। |
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) जैसे थिंक टैंकों द्वारा आयोजित चर्चाएँ। |
| ट्रैक 3 कूटनीति |
सिविल सोसायटी समूह, गैर-सरकारी संगठन, जन-से-जन संगठन |
जमीनी स्तर पर सहभागिता |
पूर्णतः अनौपचारिक |
जनविश्वास निर्माण एवं सामाजिक सहयोग |
देशों के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षिक आदान-प्रदान कार्यक्रम |
आगे की राह
- समुद्री शासन को सुदृढ़ करना: इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवाद और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने हेतु सामूहिक समुद्री शासन को मजबूत करना चाहिए।
- उदाहरण: भारत का सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) IORA देशों के बीच समुद्री सूचना साझाकरण के लिए एक मंच के रूप में कार्य कर सकता है।
- आर्थिक सहयोग को बढ़ाना: IORA को क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को गहरा करना चाहिए ताकि हिंद महासागर क्षेत्र की विशाल आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सके।
- भारत का मॉरीशस और सेशेल्स के साथ बंदरगाह विकास में सहयोग समुद्री संपर्कता को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाता है।
- क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना: क्षेत्रीय शांति और स्थिरता हिंद महासागर में निर्बाध व्यापार और समुद्री सहयोग के लिए आवश्यक है।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और UNCLOS के सिद्धांतों के पालन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- लचीली आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण: संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न व्यवधान क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाओं के लचीलेपन संबंधी आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
- उदाहरण: भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों के विरुद्ध अर्थव्यवस्था को सहारा प्रदान करता है।
- IORA में संस्थागत सुधार: IORA को एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन के रूप में उभरने के लिए संस्थागत सुदृढ़ीकरण आवश्यक है।
- उदाहरण: प्रस्तावित IORA नेताओं का शिखर सम्मेलन, 2027 संगठन को नई दिशा और विजन प्रदान कर सकता है।
निष्कर्ष
- एक अधिक सशक्त और प्रभावी इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक क्षमता और सतत् विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
- सहयोगात्मक शासन, संस्थागत सुधार और सुदृढ़ क्षेत्रीय एकीकरण के माध्यम से, IORA इंडो-पैसिफिक संरचना का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है।