13वाँ ब्रिक्स शहरीकरण मंच (BRICS Urbanisation Forum)
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भारत अपनी BRICS अध्यक्षता वर्ष 2026 के तहत 11–12 जून, 2026 को नई दिल्ली में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच (BRICS Urbanisation Forum) की मेजबानी करेगा।
ब्रिक्स शहरीकरण मंच के बारे में
- यह ब्रिक्स देशों के लिए एक मंत्रिस्तरीय स्तर का मंच है, जहाँ शहरी विकास से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान, शहरी चुनौतियों पर चर्चा तथा सहयोग को मजबूत किया जाता है।
- विषय: ‘लोगों के लिए शहर: समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग’ (Cities for People: BRICS Cooperation for Inclusive and Resilient Urban Futures)
- अध्यक्षता दृष्टिकोण: ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और संधारणीयता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) तथा ‘मानवता प्रथम’ (Humanity First) की अवधारणा द्वारा निर्देशित।
- फोकस क्षेत्र
- समावेशी शहरीकरण
- जलवायु- और आपदा-रोधी अवसंरचना।
- नगरपालिका शासन को सुदृढ़ करना।
- शहरी प्रबंधन के लिए डिजिटल नवाचार।
- नीतिगत सहयोग: यह मंच सतत् शहरी विकास के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करता है।
- भाग लेने वाले देश: इस मंच में सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे:-
- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया।
- भारत की भूमिका और विरासत
- चौथी बार मेजबानी: वर्ष 2026 का संस्करण इस मंच की भारत द्वारा चौथी मेजबानी को दर्शाता है।
- भारत ने पहली बार वर्ष 2013 में नई दिल्ली में ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी की थी, जिससे शहरीकरण को ब्रिक्स एजेंडा में स्थान मिला।
BRICS 2026 की प्रमुख बैठकें और कार्यक्रम
- ब्रिक्स पर्यटन कार्य समूह: भारत ने प्रथम बैठक की अध्यक्षता की, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के मध्य पर्यटन सहयोग, सतत् पर्यटन और जन संपर्क को मजबूत करना है।
- 11वाँ ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य समूह: सदस्य देशों ने आतंकवाद, कट्टरपंथ, आतंक वित्तपोषण और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सहयोग पर चर्चा की।
- ब्रिक्स महिला कार्य समूह: महिलाओं के सशक्तीकरण, लैंगिक समानता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- ब्रिक्स युवा राजनयिक मंच: युवा राजनयिकों के लिए वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद और ब्रिक्स सहयोग पर चर्चा का मंच।
- ब्रिक्स ADR बैठक: वरिष्ठ अधिकारियों और न्याय मंत्रियों ने मध्यस्थता एवं सुलह को मजबूत करने, क्षमता निर्माण और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र पर चर्चा की।
- ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: वैश्विक और क्षेत्रीय विकास की समीक्षा की गई तथा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।
- ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह: तिरुवनंतपुरम् में आयोजित बैठक में रोजगार सृजन, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य के कार्य से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान दिया गया।
- द्वितीय ब्रिक्स MSME कार्य समूह बैठक: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता वर्ष 2026 के तहत आयोजित, जिसमें ब्रिक्स देशों के MSMEs में प्रौद्योगिकी अपनाने, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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बिहार में कोडीन कफ सिरप का दुरुपयोग
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लगभग एक दशक पहले वर्ष 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद, कोडीन-आधारित कफ सिरप शराब के एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
कोडीन (Codeine) क्या है?
- प्राकृतिक ओपिऑइड (Opioid) दवा: कोडीन एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला ओपिऑइड है, जो मॉर्फिन से प्राप्त होता है और आमतौर पर खाँसी के इलाज के लिए कफ सिरप में उपयोग किया जाता है।
- चिकित्सीय उपयोग: कोडीन का मुख्य उपयोग खाँसी का उपचार करने वाली दवा और दर्द निवारक के रूप में होता है, विशेषकर लगातार सूखी खाँसी और हल्के से मध्यम दर्द में।
- कार्य प्रणाली: कोडीन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर कार्य करता है और ओपिऑइड रिसेप्टर्स से जुड़कर खाँसी की आवृत्ति को कम करता है तथा दर्द को कम करता है।
- दुष्प्रभाव: निर्धारित मात्रा में भी यह उनींदापन, चक्कर आना, मतली, कब्ज और सुस्ती उत्पन्न कर सकता है।
- दुरुपयोग के स्वास्थ्य जोखिम: अधिक उपयोग से श्वसन संबंधी अवसाद, निर्णय क्षमता में कमी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ और जानलेवा ओवरडोज का खतरा हो सकता है, विशेषकर शराब या अन्य अवसादक पदार्थों के साथ।
- कानूनी स्थिति: कोडीन-आधारित कफ सिरप को बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के तहत ‘नशीले पदार्थ’ (Intoxicants) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- इसके तहत बिना अनुमति बिक्री, अधिग्रहण और वितरण पर जुर्माना, जब्ती और कारावास हो सकता है।
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प्रोजेक्ट उदयक (Project UDAYAK)

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सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 1 जून, 2026 को असम के डूमडूमा में प्रोजेक्ट उदयक (Project UDAYAK) का 37वाँ स्थापना दिवस मनाया, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुरक्षा और नागरिक सड़कों के निर्माण में इसकी भूमिका का सम्मान किया गया।
प्रोजेक्ट उदयक के बारे में
- स्थापना: प्रोजेक्ट उदयक की स्थापना वर्ष 1989 में की गई थी।
- प्रशासनिक नियंत्रण: यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक रणनीतिक क्षेत्रीय शाखा है।
- कार्य क्षेत्र: यह 1,457 किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क का प्रबंधन करता है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी जिले (अनजॉ, लोहित, दिबांग घाटी, लोंगडिंग, तिराप, चांगलांग) और असम के कुछ हिस्से शामिल हैं।
- रणनीतिक भू-राजनीतिक महत्त्व: यह चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और भारत–म्याँमार सीमा पर कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- मुख्य दायित्व: यह भारत–म्याँमार सीमा पर महत्त्वपूर्ण सड़कें और सीमा बाड़बंदी अवसंरचना का निर्माण कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है और सीमा पार गतिविधियों पर नियंत्रण में सहायता करता है।
- हालिया उपलब्धियाँ (2025): इसने 12 पुलों, एक रणनीतिक सड़क और एक हेलीपैड का निर्माण पूरा किया, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों और स्थानीय समुदायों की गतिशीलता में सुधार हुआ।
सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में
- स्थापना: बीआरओ (BRO) की स्थापना वर्ष 1960 में सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क अवसंरचना के विकास और रखरखाव के लिए की गई थी।
- मंत्रालय: यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, जो इसकी रणनीतिक और रक्षा भूमिका को दर्शाता है।
- प्रमुख भूमिका: यह हिमालय और मरुस्थल जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सीमा सड़कें, सुरंगें, पुल और हवाई पट्टियों का निर्माण करता है और उनकी देखभाल करता है।
- रणनीतिक महत्त्व: यह दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क सुनिश्चित करता है, जिससे सैन्य रसद व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
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मलेशिया में 16 वर्ष से कम आयु वालों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित

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मलेशिया ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया एकाउंट्स पर देशव्यापी प्रतिबंध लागू करना शुरू कर दिया है।
प्रतिबंध के कारण
- हानिकारक सामग्री से सुरक्षा: बच्चों को अनुचित, हिंसक, यौन या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री के संपर्क से बचाना।
- साइबरबुलिंग से निपटना: नाबालिगों को प्रभावित करने वाले ऑनलाइन उत्पीड़न और मानसिक शोषण की घटनाओं को कम करना।
- मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का समाधान: बढ़ते प्रमाण बताते हैं कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग का संबंध किशोरों में चिंता, अवसाद, आत्म-सम्मान में कमी से है।
- प्लेटफॉर्म की लत लगाने वाली विशेषताओं को कम करना: अधिकारी उन एल्गोरिद्म और डिजाइन फीचर्स को लेकर चिंतित हैं, जो लंबे समय तक स्क्रीन उपयोग और बाध्यकारी उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
- ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करना: बच्चों से जुड़े ऑनलाइन प्रीडेटर, धोखाधड़ी, शोषण और गोपनीयता उल्लंघनों से सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करना।
- वैश्विक प्रवृत्ति: मलेशिया उन देशों की श्रेणी में शामिल है, जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया, जो आयु-आधारित सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर रहे हैं।
प्रतिबंध के प्रमुख प्रावधान
- अनिवार्य आयु सत्यापन: 8 मिलियन से अधिक मलेशियाई उपयोगकर्ताओं वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मजबूत आयु-सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी और 16 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ताओं को अकाउंट बनाने से रोकना होगा।
- मौजूदा उपयोगकर्ताओं के लिए संक्रमण अवधि: 16 वर्ष से कम आयु के मौजूदा उपयोगकर्ताओं को प्रतिबंध लागू होने से पहले अपना डेटा डाउनलोड, स्थानांतरित या प्रबंधित करने के लिए समय दिया जाएगा।
- अनुपालन न करने पर कठोर दंड: नियमों को लागू न करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर 10 मिलियन रिंगित (लगभग 2.5 मिलियन डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- माता-पिता के लिए कोई दायित्व नहीं: यदि बच्चे आयु-सत्यापन को नजरअंदाज कर सोशल मीडिया तक पहुँच बनाते हैं, तो माता-पिता को दंडित नहीं किया जाएगा।
- ‘सेफ्टी-बाय-डिजाइन’ आवश्यकताएँ: प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ्टी-बाय-डिजाइन’ सुविधाएँ लागू करनी होंगी, जिनमें नशे की लत या अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देने वाले डिजाइन तत्त्वों के विरुद्ध सुरक्षा शामिल होगी।
प्रतिबंध को लेकर चिंताएँ
- अनियंत्रित प्लेटफॉर्म्स की ओर पलायन: आलोचकों का कहना है कि किशोर कम नियंत्रित या असुरक्षित इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
- आयु सत्यापन की प्रभावशीलता: उपयोगकर्ताओं की वैध आयु निर्धारित करना तकनीकी रूप से अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
- शैक्षिक और सामाजिक लाभों तक पहुँच: प्रतिबंधों के कारण सोशल मीडिया से मिलने वाले सकारात्मक अवसर सीमित हो सकते हैं।
- गोपनीयता संबंधी मुद्दे: मजबूत आयु-सत्यापन प्रणालियाँ अतिरिक्त व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने की आवश्यकता को जन्म दे सकती हैं।
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समुद्री जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर भारत–ऑस्ट्रेलिया सहमत

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नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स ने समुद्री एवं रक्षा सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।
मुख्य विशेषताएँ
- उन्नत समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness- MDA): भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री गश्ती विमानों के उपयोग के माध्यम से समुद्री निगरानी और जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- समुद्री सुरक्षा रोडमैप: दोनों देशों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।
- नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता: दोनों पक्षों ने स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन की पुनर्पुष्टि की, जिसमें वर्ष 1982 के सामुद्रिक कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता शामिल है।
- विशिष्ट रक्षा सहयोग: ऑस्ट्रेलिया ने ऑपरेशन रेंडर सेफ, 2026 में भारत की भागीदारी का स्वागत किया, जबकि भारत ने ‘ब्लैक कैरिलन सबमरीन रेस्क्यू’ अभ्यास में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया के आमंत्रण का स्वागत किया।
- हिंद महासागर सहयोग: इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन के अंतर्गत समुद्री सुरक्षा कार्य समूह के सह-नेतृत्त्व के रूप में दोनों देश संयुक्त रूप से चेन्नई में खोज एवं बचाव तथा टेबलटॉप एक्सरसाइज का आयोजन करेंगे।
- रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग: ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 2026 के ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
- विस्तारित सैन्य सहभागिताएँ: दोनों देशों ने रक्षा बलों के मध्य बढ़ती सहभागिताओं की समीक्षा की, जिनमें टैलिस्मन सेबर, मिलन, काकाडू, ऑस्ट्राहिंद, ऑपरेशन रेंडर सेफ और ब्लैक कैरिलन जैसे अभ्यासों में भागीदारी शामिल है।
- वायुसेना सहयोग: दोनों पक्ष अभ्यास ‘पिच ब्लैक’ के दौरान द्विपक्षीय ‘एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग इंप्लीमेंटिंग अरेंजमेंट’ (हवा में ईंधन भरने के कार्यान्वयन समझौते) को शुरू करने और एक-दूसरे के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों में भाग लेने पर सहमत हुए।
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