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भारत-कनाडा के मध्य व्यापार एवं निवेश मंच की शुरुआत

29 May 2026

संदर्भ

हाल ही में भारत और कनाडा ने कनाडा–भारत व्यापार एवं निवेश मंच की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग को गहरा करना तथा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए वार्ताओं को समर्थन देना है।

संबंधित तथ्य

  • भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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मंच की प्रमुख विशेषताएँ

  • CEPA फास्ट ट्रैक (CEPA Fast-Track): दोनों देशों ने वर्ष 2026 के अंत तक एक “महत्त्वाकांक्षी एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी” CEPA को अंतिम रूप देने के लिए कठोर समय-सीमा निर्धारित की है। यह समझौता बाजार पहुँच में सुधार, द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि के संस्थानीकरण तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण पर केंद्रित है।
  • नया व्यापार मंच (The New Trade Forum): नव स्थापित कनाडा–भारत व्यापार एवं निवेश मंच एक स्थायी संस्थागत प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जो दोनों देशों के व्यापारिक नेतृत्व, नवप्रवर्तकों एवं संस्थागत निवेशकों को जोड़ने का कार्य करेगा।
  • संवेदनशील क्षेत्रों के प्रति दृष्टिकोण: भारत और कनाडा विवादास्पद क्षेत्रों से बचते हुए पारस्परिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जैसे कि महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, कृषि-खाद्य क्षेत्र, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा गतिशीलता।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) के बारे में

  • अर्थ: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) एक समग्र रूप से एकीकृत द्विपक्षीय या बहुपक्षीय संधि है।
    • यह पारंपरिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की तुलना में कहीं अधिक व्यापक एवं बहुआयामी होता है।
  • शामिल स्तंभ: यह केवल भौतिक वस्तुओं पर शुल्क घटाने तक सीमित न रहकर विभिन्न आर्थिक स्तंभों को समाहित करता है।
  • मुख्य घटक
    • वस्तु व्यापार: निर्मित एवं कृषि उत्पादों पर सीमा शुल्क का उन्मूलन या कमी।
    • सेवाओं में व्यापार: आईटी, बैंकिंग, आतिथ्य एवं स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नियामकीय बाधाओं को कम करना।
    • निवेश: द्विपक्षीय निवेशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पूँजी प्रवाह हेतु संस्थागत ढाँचा विकसित करना।
    • अन्य नियामकीय स्तंभ: इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), प्रतिस्पर्द्धा नीति, सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ, विवाद निपटान तंत्र तथा व्यावसायिक योग्यता के पारस्परिक मान्यता समझौते (MRAs) शामिल होते हैं।

भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग

  • CEPA वार्ताओं की पुनः शुरुआत: भारत और कनाडा ने G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर वार्ताओं को पुनः प्रारंभ किया।
  • व्यापार लक्ष्य
    • भारत ने वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि कनाडा ने 70 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा है।
    • वर्ष 2024 में भारत–कनाडा के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 22.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
  • CEPA में शामिल क्षेत्र: यह समझौता निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल करेगा:
    • वस्तुएँ एवं सेवाएँ
    • निवेश
    • कृषि
    • डिजिटल व्यापार
    • गतिशीलता एवं सतत् विकास। 
  • कूटनीतिक पुनर्संतुलन: वर्ष 2023 में हरदीप सिंह निज्जर मुद्दे के कारण स्थगित व्यापार वार्ताएँ अब संबंधों में सुधार, उच्चायुक्तों की पुनः नियुक्ति तथा नागरिक परमाणु ऊर्जा एवं यूरेनियम आपूर्ति में सहयोग के पुनरारंभ के साथ फिर से शुरू हुई हैं।

क्षेत्र  तथ्य 
महत्त्वपूर्ण खनिज बैटरियों, EVs, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों के संदर्भ में कनाडा प्रमुख है।
ऊर्जा सहयोग में LNG, तेल, स्वच्छ ऊर्जा, यूरेनियम, हाइड्रोजन, जैव ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य शृंखलाएँ शामिल हैं।
प्रवासी एवं गतिशीलता कनाडा में भारतीय मूल की बड़ी आबादी है; छात्र और पेशेवर गतिशीलता लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करती है।
निवेश कनाडाई पेंशन फंड और संस्थागत निवेशक भारत के लिए दीर्घकालिक पूँजी के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।
इंडो-पैसिफिक कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत को व्यापार विविधीकरण और आपूर्ति-शृंखला लचीलेपन के लिए एक प्रमुख भागीदार माना गया है।

भारत के लिए सामरिक महत्त्व

  • महत्त्वपूर्ण खनिज सुरक्षा: कनाडा संसाधनों से समृद्ध है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, बैटरी निर्माण तथा ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन दे सकता है।
  • आपूर्ति-शृंखला विविधीकरण: यह भारत को खनिजों, ऊर्जा इनपुट और प्रौद्योगिकी के लिए एकल-देश स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में सहायता करता है।
  • निवेश प्रवाह: कनाडाई पेंशन फंड और संस्थागत निवेशक प्रमुख वैश्विक निवेशक हैं; भारत अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण में दीर्घकालिक पूँजी आकर्षित कर सकता है।
  • सेवाएँ और गतिशीलता: भारत पेशेवरों, छात्रों और कुशल श्रमिकों के आसान आवागमन के लिए प्रयास कर सकता है।
  • इंडो-पैसिफिक अभिसरण: कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति और भारत का एक्ट ईस्ट/इंडो-पैसिफिक विजन आर्थिक तथा सामरिक सहयोग के लिए अवसर प्रदान करते हैं।

भारत द्वारा निष्पादित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPAs)

भागीदार देश / क्षेत्र मुख्य अंतर्दृष्टि
दक्षिण कोरिया (प्रभावी 2010)
  • OECD देश के साथ भारत का पहला प्रमुख CEPA।
  • वस्तुओं, सेवाओं और निवेश को शामिल करता है।
  • वर्तमान में आधुनिकीकरण समीक्षा के अधीन।
जापान (प्रभावी 2011)
  • 90% से अधिक व्यापारिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त।
  • भारतीय अवसंरचना और विनिर्माण में जापानी FDI को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत रणनीतिक।
  • IPR संरक्षण पर समर्पित अध्याय शामिल।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) (प्रभावी 2022)
  • एक दशक से अधिक समय में भारत द्वारा हस्ताक्षरित पहला CEPA।
  • रत्न एवं आभूषण, वस्त्र और इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण।
  • डिजिटल व्यापार’ पर समर्पित अध्याय और तीसरे देश के माध्यम से व्यापार रोकने हेतु सख्त मूल नियम शामिल।
ओमान (हस्ताक्षरित 2025)
  • पश्चिम एशिया/GCC क्षेत्र में भारत की दूसरी प्रमुख व्यापक आर्थिक उपलब्धि।
  • उर्वरक, ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स में रणनीतिक आपूर्ति-शृंखलाओं को सुरक्षित करने का उद्देश्य।

CEPA बनाम अन्य व्यापक समझौते

समझौते का प्रकार परिभाषा  भारतीय उदाहरण
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मुख्य रूप से सदस्य देशों के बीच शुल्क और व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करने पर केंद्रित।

  • व्यापक समझौतों की तुलना में सीमित क्षेत्र।
भारत-आसियान FTA,

भारत-श्रीलंका FTA

व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) एक व्यापक व्यापार समझौता, लेकिन इसका मुख्य ध्यान वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क में कमी/समाप्ति पर होता है।

  • निवेश और नियामकीय समन्वय अपेक्षाकृत गौण।
भारत-सिंगापुर CECA,

भारत-मलेशिया CECA

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)
  • सबसे अधिक संरचनात्मक रूप से विकसित।
  • वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और नियामकीय
  • अनुपालन (जैसे- IPR, श्रम मानक, प्रतिस्पर्द्धा कानून) पर समान बल।
भारत-जापान CEPA,

भारत-UAE CEPA

व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता (CECPA) विशेष रूप से अनुकूलित आर्थिक साझेदारी शर्तों के लिए प्रयुक्त एक मिश्रित संरचना। भारत-मॉरीशस CECPA
व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) विशिष्ट आर्थिक समूहों के साथ व्यापार के लिए तैयार किया गया विशेष ढाँचा। भारत-EFTA
आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA) आमतौर पर एक अंतरिम या प्रारंभिक व्यापक व्यापार समझौता, जो बाद में पूर्ण CEPA के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA

भारत-कनाडा के मध्य व्यापार एवं निवेश मंच की शुरुआत

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