संदर्भ
हाल ही में तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन (मेलबर्न, 2026) में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कई महत्त्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
संबंधित तथ्य
- इन ऐतिहासिक समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, असैन्य परमाणु सहयोग, व्यापार, महत्त्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो दोनों देशों के मध्य सुदृढ़ होते व्यापक सामरिक साझेदारी को प्रतिबिंबित करते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया ने कोकोस (कीलिंग) द्वीपसमूह पर भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के समर्थन हेतु एक अस्थायी अंतरिक्ष ट्रैकिंग टर्मिनल का आधिकारिक रूप से संचालन प्रारंभ किया है।
भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के बारे में
- यह भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों के मध्य आयोजित होने वाला सर्वोच्च स्तरीय द्विपक्षीय संस्थागत संवाद है।
- वर्ष 2020 में द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक सामरिक साझेदारी (CSP) में उन्नयन के बाद इसकी स्थापना हुई, ताकि रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक दिशा प्रदान की जा सके।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम
- सामरिक एवं भू-राजनीतिक सहयोग
- हिंद-प्रशांत सहयोग
- दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत, UNCLOS के पालन तथा यथास्थिति में एकतरफा परिवर्तन के विरोध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग
- आतंकवाद के प्रतिरोध हेतु द्विपक्षीय सहयोग एवं खुफिया समन्वय को सुदृढ़ बनाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
- क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दे
- संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से वैश्विक संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया गया तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति समर्थन पुनः व्यक्त किया गया है।
- रक्षा एवं सुरक्षा नवाचार
- रक्षा नवाचार
- दोनों देशों के रक्षा उद्योगों, स्टार्ट-अप्स एवं नवाचार पारितंत्रों को जोड़ने हेतु भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार गलियारे का शुभारंभ किया गया।
- समुद्री सुरक्षा
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता को सुदृढ़ करने, नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने तथा जहाज निर्माण, जहाज की मरम्मत एवं रखरखाव में सहयोग बढ़ाने हेतु समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अपनाया गया है।
- साइबर एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ
- ऑस्ट्रेलिया–भारत साइबर, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ एवं आपूर्ति शृंखला साझेदारी (PACTS) का शुभारंभ किया गया, जिसका केंद्र साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर अनुसंधान, डिजिटल क्षमता तथा विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाएँ हैं।
- व्यापार एवं निवेश
- व्यापार
- व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर वार्ताओं में तेजी लाने तथा द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर प्रगति को गति देने पर सहमति बनी है।
- साथ ही, ECTA के अंतर्गत गैर-शुल्कीय बाधाओं को कम करने तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित कर उपलब्धियों का विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
- ऊर्जा एवं महत्त्वपूर्ण संसाधन सुरक्षा
- असैन्य परमाणु सहयोग
- वर्ष 2014 के असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया है। इससे शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा हेतु ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम का आयात तथा भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा मिलेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा
- प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत गुजरात में रूफटॉप सोलर प्रशिक्षण अकादमी स्थापित करने पर सहमति निर्मित हुई है, जिससे महिलाओं एवं युवाओं में तकनीकी कौशल का विकास होगा तथा नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा मिलेगा।
- महत्त्वपूर्ण खनिज
- महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनी है, ताकि लचीली आपूर्ति शृंखलाएँ, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ एवं सामरिक उद्योगों को समर्थन मिल सके।
- त्रिपक्षीय प्रौद्योगिकी साझेदारी
- ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (ACITI) संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं नवाचार के क्षेत्र में सहयोग सुदृढ़ होगा।
- शिक्षा, कौशल एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान
- शिक्षा
- UGC ने फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को बंगलूरू में परिसर स्थापित करने हेतु आशय-पत्र (Letter of Intent) तथा विक्टोरिया विश्वविद्यालय को गुरुग्राम में परिसर स्थापित करने हेतु अनुमोदन-पत्र (Letter of Approval) जारी किया, जिससे उच्च शिक्षा सहयोग को और सुदृढ़ किया गया।
- कौशल विकास
- पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), भुवनेश्वर (ओडिशा) में खनन क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence for Skilling in Mining) की स्थापना हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
- सांस्कृतिक सहयोग
- ऑस्ट्रेलिया ने तीन प्राचीन भारतीय पुरावशेष जैसे पवित्र नंदी, शुभ काली युक्त त्रिशूल तथा षडानन स्कंद को भारत को लौटाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे सांस्कृतिक विरासत सहयोग को बल मिला है।
- साथ ही, ऑस्ट्रेलिया ने सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया–इंडिया रिलेशंस की मैत्री अनुदान (Maitri Grants) योजना के लिए 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आवंटित करने की घोषणा की, जिससे लोगों-से-लोगों के मध्य संबंधों को और सुदृढ़ किया जा सके।
भारत–ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप (2026)
हाल ही में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में भारत–ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप का शुभारंभ किया।
प्रमुख विशेषताएँ
- खेल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग।
- क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षकों के कौशल विकास को बढ़ावा।
- खेल उद्योग एवं निवेश में सहयोग का विस्तार।
- भारत–ऑस्ट्रेलिया युवा खेल महोत्सव का आयोजन।
- प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से पूर्व व्यापक सहयोग।
- वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी संबंधी भारत की आकांक्षा को समर्थन।
|
भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया का सामरिक महत्त्व
- विश्वसनीय ‘क्वाड’ साझेदार: ‘क्वाड’ (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान एवं अमेरिका) का प्रमुख सदस्य होने के कारण ऑस्ट्रेलिया स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत, समुद्री सुरक्षा तथा प्रत्यास्थ क्षेत्रीय शासन को बढ़ावा देने में भारत का महत्त्वपूर्ण साझेदार है।
- प्रमुख हिंद-प्रशांत समुद्री शक्ति: हिंद महासागर एवं प्रशांत महासागर के संगम पर स्थित होने के कारण ऑस्ट्रेलिया समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) को सुदृढ़ करने तथा नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख स्रोत: ऑस्ट्रेलिया के पास लीथियम, कोबाल्ट, निकेल एवं दुर्लभ मृदा तत्त्वों (Rare Earth Elements) के प्रचुर भंडार हैं, जो विद्युत वाहनों, सेमीकंडक्टरों, बैटरियों तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक हैं और भारत के ऊर्जा संक्रमण को समर्थन प्रदान करते हैं।
- विश्वसनीय यूरेनियम आपूर्तिकर्ता: ऑस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादकों में से एक है। भारत–ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा जीवाश्म-ईंधन रहित विद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
- महत्त्वपूर्ण शिक्षा साझेदार: ऑस्ट्रेलिया, भारतीय विद्यार्थियों के लिए प्रमुख गंतव्यों में से एक है, जिससे उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास में सहयोग बढ़ने के साथ-साथ जन-से-जन संबंध भी सुदृढ़ होते हैं।
- रणनीतिक रक्षा साझेदार: संयुक्त सैन्य अभ्यासों (AUSINDEX, Malabar), लॉजिस्टिक सहयोग, रक्षा नवाचार, समुद्री सुरक्षा तथा अंतर-संचालनीयता के माध्यम से रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
- बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय: ऑस्ट्रेलिया में निवासरत भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के मध्य आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में सेतु की भूमिका निभाता है।
- प्रत्यास्थ आपूर्ति शृंखलाओं का प्रमुख साझेदार: ऑस्ट्रेलिया महत्त्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टरों, स्वच्छ ऊर्जा एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में विश्वसनीय एवं विविधीकृत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण में भारत के साथ सहयोग करता है, जिससे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम होती है।

चुनौतियाँ
- व्यापार वार्ताओं में धीमी प्रगति: आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के सफल क्रियान्वयन के बावजूद, बाजार पहुँच, सेवा क्षेत्र एवं कृषि उत्पादों पर मतभेदों के कारण व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर वार्ता लंबित है
- वित्तीय वर्ष 2024–25 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि भारत के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 8% की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय वर्ष 2025–26 (फरवरी तक) में कुल व्यापार 19.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- व्यापारिक बाधाएँ एवं नियामकीय मुद्दे: गैर-शुल्कीय बाधाएँ, जटिल नियामकीय मानक, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) उपाय तथा विभिन्न प्रमाणीकरण आवश्यकताएँ द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार में बाधक बनी हुई हैं।
- उच्च लॉजिस्टिक एवं संपर्क लागत: दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी के कारण परिवहन लागत, आपूर्ति शृंखला की जटिलताएँ एवं शिपिंग समय बढ़ जाता है, जिससे व्यापारिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता प्रभावित होती है।
- सीमित रक्षा औद्योगिक सहयोग: रक्षा सहयोग में विस्तार के बावजूद संयुक्त अनुसंधान, विकास-सह-उत्पादन एवं रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग अभी भी सीमित है।
- चीन कारक एवं क्षेत्रीय सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति एवं आक्रामक गतिविधियाँ सामरिक अनिश्चितताएँ उत्पन्न करती हैं, जिसके कारण दोनों देशों को निरोध (Deterrence), कूटनीति एवं क्षेत्रीय स्थिरता के मध्य संतुलन बनाए रखना पड़ता है।
- आपूर्ति शृंखला की संवेदनशीलता: भू-राजनीतिक संघर्षों एवं वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने महत्त्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टरों एवं विनिर्माण आपूर्ति शृंखलाओं की कमजोरियों को उजागर किया है।
- आर्थिक प्राथमिकताओं में अंतर: भारत की आकांक्षा कुशल पेशेवरों की अधिक गतिशीलता एवं सेवा क्षेत्र में बेहतर पहुँच है, जबकि ऑस्ट्रेलिया कृषि उत्पादों के लिए उन्नत बाजार पहुँच को प्राथमिकता देता है, जिससे वार्ताओं में चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
- निर्यात क्षेत्रों में प्रतिस्पर्द्धा: खनिज, कृषि जिंसों एवं शिक्षा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में दोनों देश प्रतिस्पर्द्धी हैं, जिससे गहन आर्थिक एकीकरण की संभावनाएँ कभी-कभी सीमित हो जाती हैं।
आगे की राह
- व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को अंतिम रूप देना: इस समझौते पर वार्ताओं में तेजी लाकर ऐसा समग्र व्यापारिक ढाँचा स्थापित किया जाए, जो बाजार पहुँच का विस्तार करे, गैर-शुल्कीय बाधाओं को कम करे तथा द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा दे।
- द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को अंतिम रूप देना: इस संधि को शीघ्र अंतिम रूप देकर निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए तथा अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के लिए संस्थागत वित्तपोषण तंत्र को सुदृढ़ बनाया जाए।
- रक्षा औद्योगिक साझेदारी को सुदृढ़ करना: विकास सह-उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का विस्तार किया जाए तथा रक्षा उद्योगों एवं स्टार्ट-अप्स के मध्य सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- समुद्री सुरक्षा सहयोग को गहरा करना: समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA), संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों, जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत एवं लॉजिस्टिक सहयोग को सुदृढ़ कर स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत को बनाए रखा जाए।
- उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा एवं महत्त्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाए।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण: लीथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्त्वों तथा अन्य महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित एवं विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं का विकास किया जाए, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, बैटरियों एवं सेमीकंडक्टरों के लिए आवश्यक हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा एवं प्रत्यास्थ आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना
- असैन्य परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन एवं महत्त्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना में सहयोग बढ़ाकर भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को समर्थन दिया जाए।
- क्वाड, सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव (SCRI) तथा अन्य विश्वसनीय साझेदारी ढाँचों का उपयोग कर सीमित वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कम की जाए।
- शिक्षा, नवाचार एवं कौशल विकास को बढ़ावा देना: विश्वविद्यालयों के मध्य सहयोग, अनुसंधान साझेदारी, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं खनन कौशल विकास का विस्तार कर भविष्य के लिए सक्षम मानव संसाधन तैयार किए जाएँ।
- जन-से-जन एवं प्रवासी सहभागिता को सुदृढ़ करना: सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक गतिशीलता, पर्यटन तथा प्रवासी-नेतृत्व वाली व्यावसायिक साझेदारियों को प्रोत्साहित कर भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों की दीर्घकालिक आधारशिला को और मजबूत बनाया जाए।