संदर्भ
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने भारत–इंडोनेशिया द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 6–11 जुलाई, 2026 के दौरान इंडोनेशिया की यात्रा की।
शिखर सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएँ
- इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा बिंतांग आदिपूर्ण (Bintang Adipurna), जो इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, प्रदान किया गया।
- यह सम्मान भारत–इंडोनेशिया द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय शांति, सहयोग एवं समृद्धि को बढ़ावा देने में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया।

- रक्षा सहयोग: ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तथा अस्त्र (Astra) बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAMs) के निर्यात से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत के रक्षा निर्यात के महत्त्वपूर्ण विस्तार को दर्शाते हैं।
- दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा विनिर्माण, सैन्य आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।
- भारत, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) में इंडोनेशियाई अधिकारियों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल के बारे में
- विकास: ब्रह्मोस (BrahMos), भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा रूस की NPO माशिनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroyenia) के मध्य एक संयुक्त उपक्रम है।
- प्रकार: यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भूमि, समुद्र, पनडुब्बी तथा वायु मंचों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल एक निर्देशित मिसाइल होती है, जो वायुमंडल के भीतर मैक 1–5 की गति से निरंतर प्रणोदन (आमतौर पर रैमजेट) तथा वायुगतिकीय उत्थापन का उपयोग करते हुए अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य पर प्रहार करती है।
- प्रमुख विशेषताएँ: यह निम्न ऊँचाई पर उड़ान भरती है, जिससे इसका अवरोधन कठिन हो जाता है। यह स्थलीय एवं समुद्री लक्ष्यों के विरुद्ध पारंपरिक अथवा परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है।
- मारक क्षमता: 290 किमी. से अधिक (नवीन संस्करणों की मारक क्षमता इससे अधिक बताई गई है)।
- गति: मैक 2.8 तक, जिससे यह विश्व की सर्वाधिक तीव्र परिचालन क्रूज मिसाइलों में से एक है।
- क्षमताएँ: यह सटीक प्रहार क्षमता, उच्च उत्तरजीविता से युक्त है तथा स्थलीय एवं समुद्री दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है।
- महत्त्व: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया गया, जिससे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर वैश्विक विश्वास और सुदृढ़ हुआ।
अस्त्र (Astra) Mk-1 मिसाइल के बारे में
- विकासितकर्ता: इसका स्वदेशी विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है।
- प्रकार: यह एक बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) है, जिसे दृश्य सीमा से परे शत्रु विमानों को लक्ष्य बनाने के लिए विकसित किया गया है।
- बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) एक निर्देशित वायु-से-वायु मिसाइल है, जिसे पायलट की दृश्य सीमा (सामान्यतः 20 किमी. से अधिक) से परे शत्रु विमानों को उन्नत रडार-निर्देशित लक्ष्यीकरण के माध्यम से नष्ट करने के लिए विकसित किया जाता है।
- प्रमुख विशेषताएँ: इसमें सक्रिय रडार, अर्द्ध-सक्रिय रडार अथवा अवरक्त साधक (Seeker) का उपयोग किया जाता है। इसके अनेक संस्करण फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता से युक्त हैं तथा यह कम दूरी की लड़ाई से पहले ही शत्रु विमानों को निष्क्रिय करने में सक्षम बनाती है।
- मारक क्षमता: प्रक्षेपण परिस्थितियों के अनुसार लगभग 80–110 किमी.।
- प्रणोदन प्रणाली: यह ठोस रॉकेट मोटर द्वारा संचालित होती है।
- परिचालन स्थिति: इसे भारतीय वायु सेना (IAF) में सम्मिलित किया जा चुका है तथा Su-30MKI लड़ाकू विमान के साथ एकीकृत किया गया है।
- भावी संस्करण: अधिक मारक क्षमता वाली अस्त्र (Astra) Mk-2 विकास एवं उड़ान परीक्षणों के अंतिम चरण में है तथा इसे रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
भारत के लिए इसका महत्त्व
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा: ये समझौते आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत भारत को एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्यातक बनाने के उद्देश्य को सुदृढ़ करते हैं।
- भारत पहले ही फिलीपींस के साथ 375 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल अनुबंध कर चुका है तथा वियतनाम, मलेशिया एवं अन्य देशों के साथ भी इसी प्रकार के समझौतों की दिशा में प्रयासरत है।
- इंडो-पैसिफिक में सामरिक प्रभाव: इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग मलक्का जलडमरूमध्य के आस-पास भारत की सामरिक उपस्थिति को सुदृढ़ करता है, जो विश्व के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- यह महासागर (MAHASAGAR) विजन की भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाता है तथा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ करना: ब्रह्मोस (BrahMos) तथा अस्त्र (Astra) के निर्यात से स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन होता है, जिससे घरेलू रक्षा विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को बल मिलता है।
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- समुद्री सहयोग: समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) तथा इंडो-पैसिफिक में सहयोग को सुदृढ़ किया गया, ताकि स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
- इंडोनेशिया, सूचना साझाकरण एवं समुद्री निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए भारत के सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) में एक संपर्क अधिकारी तैनात करेगा।
- महत्त्वपूर्ण खनिज साझेदारी: महत्त्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, प्रसंस्करण तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
- यह साझेदारी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इंडोनेशिया के पास विश्व के सबसे बड़े निकेल भंडारों में से एक है तथा वह ताँबा, बॉक्साइट एवं टिन का भी प्रमुख उत्पादक है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, सेमीकंडक्टरों तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक हैं।
- प्रौद्योगिकी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा: शैक्षिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलूरू (IIM Bangalore) का एक विदेशी परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
- दूरसंचार, जिसमें वायरलेस संचार एवं क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ सम्मिलित हैं, के साथ-साथ औषधियों एवं चिकित्सीय उत्पादों की आपूर्ति में भी सहयोग का विस्तार किया गया।
- सांस्कृतिक सहयोग: दोनों देशों ने योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर (Prambanan Temple) परिसर, जो विश्व के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है, के संयुक्त संरक्षण एवं पुनर्स्थापन पर सहमति व्यक्त की।
- इस पहल का उद्देश्य भारत एवं इंडोनेशिया की साझा सभ्यतागत विरासत का संरक्षण करते हुए सांस्कृतिक कूटनीति, धरोहर संरक्षण तथा पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रम्बानन मंदिर (Prambanan Temple) परिसर की संयुक्त यात्रा की भी घोषणा की, जो दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है।
भारत के लिए इसका महत्त्व
- सामरिक साझेदारी को सुदृढ़ करना: रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करते हुए व्यापक सामरिक साझेदारी (2018) को सुदृढ़ करता है।
- भारत की इंडो-पैसिफिक परिकल्पना को आगे बढ़ाना: एक्ट ईस्ट नीति तथा इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI) को सुदृढ़ करते हुए, हिंद एवं प्रशांत महासागरों को जोड़ने वाले महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित एक प्रमुख समुद्री साझेदार के साथ सहयोग को मजबूत करता है।
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा: भारत के रक्षा निर्यात का विस्तार करता है तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA), क्षमता निर्माण एवं क्षेत्रीय सुरक्षा में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करते हुए एक स्थिर इंडो-पैसिफिक में योगदान देता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना: ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक गतिशीलता, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सामरिक उद्योगों के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों तक भारत की पहुँच को सुदृढ़ करता है, जिससे आपूर्ति शृंखला संबंधी संवेदनशीलताओं में कमी आती है।
- आर्थिक एवं जन-से-जन संबंधों को गहरा करना: शिक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, सांस्कृतिक धरोहर एवं पर्यटन में व्यापक सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए दोनों देशों के मध्य दीर्घकालिक आर्थिक एकीकरण एवं सभ्यतागत संबंधों को सुदृढ़ करता है।
निष्कर्ष
भारत–इंडोनेशिया द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन 2026 व्यापक सामरिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी तथा सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्रों में सहयोग को सशक्त बनाते हुए स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को और अधिक सुदृढ़ करता है।