संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+) रिपोर्ट 2025–26 जारी की।

UDISE+ रिपोर्ट 2025–26 के प्रमुख निष्कर्ष
- शिक्षकों की संख्या में वृद्धि: वर्ष 2025–26 में शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर 1,02,73,020 हो गई, जो वर्ष 2022–23 की तुलना में 8.3% की वृद्धि को दर्शाती है।
- छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में सुधार: छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) आधारभूत स्तर पर 10, प्रारंभिक स्तर पर 12, मध्य स्तर पर 17 तथा माध्यमिक स्तर पर 21 हो गया।
- ये सभी अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 द्वारा अनुशंसित 30:1 के अनुपात से उल्लेखनीय रूप से बेहतर हैं।
- ड्रॉपआउट दर में कमी: प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर वर्ष 2024–25 के 2.3% से घटकर 2025–26 में 1.8% हो गई, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह 8.2% से घटकर 7.0% रह गई।
- मध्य स्तर पर यह दर 3.5% से मामूली बढ़कर 3.6% हुई, किंतु समग्र रूप से ड्रॉपआउट का स्तर पूर्व वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम बना हुआ है।
- विद्यार्थी प्रतिधारण में सुधार: मध्य स्तर पर विद्यार्थी प्रतिधारण दर 82.8% से बढ़कर 83.7% तथा माध्यमिक स्तर पर 47.2% से बढ़कर 51.9% हो गई है।
- सकल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार: माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया, जो माध्यमिक शिक्षा तक पहुँच में सुधार को दर्शाता है।
- मध्य स्तर का GER लगभग स्थिर रहते हुए 89.6% रहा, जो निरंतर भागीदारी को प्रतिबिंबित करता है।
- संक्रमण दर में सुधार: आधारभूत स्तर से प्रारंभिक स्तर तक संक्रमण दर बढ़कर 99.2%, प्रारंभिक स्तर से मध्य स्तर तक 93.8% तथा मध्य स्तर से माध्यमिक स्तर तक 88.3% हो गई है।
- एकल-शिक्षक एवं शून्य-नामांकन विद्यालयों में कमी: एकल-शिक्षक विद्यालयों की संख्या लगभग 3% घटकर 1,04,125 से 1,00,843 हो गई।
- शून्य-नामांकन विद्यालयों की संख्या लगभग 29% घटकर 7,993 से 5,663 रह गई।
- डिजिटल अवसंरचना में सुधार: कंप्यूटर सुविधा वाले विद्यालयों का अनुपात 64.7% से बढ़कर 69.9% हो गया।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले विद्यालयों का अनुपात 63.5% से बढ़कर 67.4% हो गया है।
- विद्यालयी आधारभूत अवसंरचना में सुधार: 95.0% विद्यालयों में विद्युत, 99.5% में सुरक्षित पेयजल, 98.5% में बालिकाओं के लिए शौचालय, 97.2% में बालकों के लिए शौचालय तथा 96.9% में हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध है।
- पुस्तकालयों की उपलब्धता बढ़कर 90.5% हो गई, जबकि वर्षा जल संचयन सुविधाएँ बढ़कर 29.9% हो गईं।
- खेल मैदान वाले विद्यालयों का अनुपात 83.0% से मामूली घटकर 81.9% रह गया।
- समावेशी शिक्षा की दिशा में प्रगति: रैंप एवं हैंडरेल से युक्त विद्यालयों का अनुपात 54.9% से बढ़कर 58.2% हो गया।
- महिला प्रतिनिधित्व में सुधार: शिक्षकों के कुल कार्यबल में महिला शिक्षकों की हिस्सेदारी 54.9% रही, जबकि पिछले वर्ष यह 54.2% थी।
- बालिकाओं का नामांकन 48.3% से बढ़कर 48.4% हो गया, जो शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में क्रमिक प्रगति को दर्शाता है।
एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+) के बारे में
- यह शिक्षा प्रबंधन सूचना प्रणाली (EMIS) है, जिसे शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित किया गया है।
- यह विद्यालयी शिक्षा का आधिकारिक राष्ट्रीय डेटाबेस है।

- शुभारंभ एवं कवरेज: इसका शुभारंभ वर्ष 2018–19 में UDISE के उन्नत संस्करण के रूप में किया गया। यह भारत के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों से पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) से कक्षा XII तक का वार्षिक डेटा एकत्रित करता है।
- प्रत्येक विद्यालय को पहचान एवं ट्रैकिंग के लिए 11 अंकों का विशिष्ट UDISE कोड प्रदान किया जाता है।
- यह 14.8 लाख से अधिक विद्यालयों, 1.02 करोड़ शिक्षकों तथा 26 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को शामिल करता है।
- डेटा संग्रहण: यह विद्यालय प्रोफाइल, विद्यार्थी नामांकन, शिक्षकों, अधिगम संकेतकों तथा विद्यालयी अवसंरचना से संबंधित व्यापक जानकारी एकत्रित करता है, जिसमें कक्षाएँ, विद्युत, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सुविधाएँ, इंटरनेट कनेक्टिविटी, खेल मैदान तथा सुगम्यता संबंधी सुविधाएँ शामिल हैं।
- प्रमुख शैक्षिक संकेतक: UDISE+ सकल नामांकन अनुपात (GER), शुद्ध नामांकन अनुपात (NER), छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), ड्रॉपआउट दर, प्रतिधारण दर, संक्रमण दर, लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) तथा अवसंरचना संकेतकों जैसे महत्त्वपूर्ण संकेतक तैयार करता है, जिनके माध्यम से विद्यालयी शिक्षा प्रणाली के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है।
एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) के बारे में
- एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) भारत का आधिकारिक डिजिटल मंच है, जिसका प्रबंधन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य 14 लाख से अधिक विद्यालयों से संबंधित आँकड़ों का संग्रहण एवं प्रबंधन करना है।
- समग्र डेटा ट्रैकिंग: वर्तमान में UDISE+ के रूप में उन्नत यह मंच विद्यार्थी नामांकन, शिक्षक प्रोफाइल तथा विद्यालयी भौतिक अवसंरचना (जैसे- कक्षाएँ, कंप्यूटर एवं शौचालय) सहित महत्त्वपूर्ण संकेतकों की केंद्रीय रूप से निगरानी करता है।
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भारत की शिक्षा प्रणाली के समक्ष चुनौतियाँ
- अधिगम परिणाम: आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) में निरंतर अंतर तथा राज्यों के मध्य अधिगम परिणामों की असमानता शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताएँ: शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों, विभिन्न राज्यों तथा सामाजिक रूप से वंचित समूहों के बीच, विशेषकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच के संदर्भ में, उल्लेखनीय असमानताएँ विद्यमान हैं।
- माध्यमिक शिक्षा: सुधार के बावजूद माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) (71.7%), प्रतिधारण दर (51.9%) तथा संक्रमण दर (88.3%) यह संकेत देते हैं कि अनेक विद्यार्थी विद्यालयी शिक्षा पूर्ण करने से पूर्व ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
- डिजिटल विभाजन: लगभग 30% विद्यालयों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि लगभग एक-तिहाई विद्यालयों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव है, जिससे डिजिटल शिक्षा तक समान पहुँच बाधित होती है।
- समावेशी शिक्षा: केवल 58.2% विद्यालयों में हैंडरेल सहित रैंप उपलब्ध हैं, जो दिव्यांग बच्चों (CwDs) के लिए बेहतर सुगम्यता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- अवसंरचनात्मक अंतराल: अनेक विद्यालयों में अभी भी पर्याप्त पुस्तकालय, खेल मैदान, प्रयोगशालाएँ, स्मार्ट कक्षाएँ तथा वर्षा जल संचयन सुविधाओं का अभाव है, जिससे समग्र अधिगम वातावरण प्रभावित होता है।
- शिक्षकों की उपलब्धता: सुधार के बावजूद, विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशिक्षित विषय-विशेष शिक्षकों की कमी अभी भी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
सरकारी पहल
- राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) (2008): आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों में ड्रॉपआउट दर को कम करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- समग्र शिक्षा (2018): पूर्व-प्राथमिक से कक्षा XII तक समानता, गुणवत्ता, अवसंरचना विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा तथा समावेशी शिक्षा को समर्थन प्रदान करने वाली एकीकृत विद्यालयी शिक्षा योजना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 (2020): 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संरचना, शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN), बहुविषयक अधिगम तथा दक्षता-आधारित शिक्षा की शुरुआत की।
- पीएम ई-विद्या (PM eVIDYA) (2020): दीक्षा, स्वयं प्रभा टीवी चैनलों, रेडियो तथा ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से डिजिटल अधिगम को बढ़ावा देती है।
- निपुण भारत मिशन (2021): कक्षा III के अंत तक सभी बच्चों के लिए आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है।
- विद्यांजलि कार्यक्रम (2021): विद्यालयी शिक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु सामुदायिक सहभागिता एवं स्वैच्छिक योगदान को प्रोत्साहित करता है।
- पीएम पोषण (2021) (पूर्व में मध्याह्न भोजन योजना, 1995): पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराकर नामांकन, उपस्थिति, प्रतिधारण तथा पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करता है।
- पीएम श्री विद्यालय (2022): आधुनिक अवसंरचना एवं नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिकल्पना को लागू करने वाले आदर्श विद्यालयों के रूप में चयनित विद्यालयों का विकास करता है।
भारत में शिक्षा से संबंधित विधिक एवं संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद-15(3), 15(4) एवं 15(5): राज्य को महिलाओं, बच्चों, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों (SC) तथा अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रावधान करने का अधिकार प्रदान करते हैं।
- अनुच्छेद-21A: 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार की गारंटी देता है।
- बच्चों का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009: अनुच्छेद-21A को क्रियान्वित करते हुए निःशुल्क शिक्षा, पड़ोस के विद्यालय, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), शिक्षक योग्यताओं, विद्यालयी अवसंरचना तथा समावेशी प्रवेश नीति से संबंधित मानदंड निर्धारित करता है।
- अनुच्छेद-29 एवं अनुच्छेद-30: अल्पसंख्यकों के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करते हैं, जिनमें शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना एवं प्रशासन का अधिकार भी शामिल है।
- अनुच्छेद-41: राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद-45: छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद-46: अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) तथा अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद-51A(k): 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना माता-पिता अथवा अभिभावकों का मौलिक कर्तव्य बनाता है।
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निष्कर्ष
UDISE+ रिपोर्ट 2025–26 शिक्षा तक पहुँच, प्रतिधारण, डिजिटल अवसंरचना तथा लैंगिक समावेशन में प्रगति को दर्शाती है, किंतु अधिगम परिणामों, समानता तथा माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा सतत विकास लक्ष्य (SDG)-4 की प्राप्ति के लिए समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में निरंतर निवेश आवश्यक है।