UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

‘सिंथेटिक बायोलॉजी’ का आधार

2 Jun 2026

संदर्भ

सिंथेटिक बायोलॉजी अब वैज्ञानिकों को कृत्रिम जीवन रूपों का डिजाइन करने की अनुमति देती है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग होता है। यह चिकित्सा एवं उद्योग क्षेत्र में बड़े अवसर उत्पन्न करती है, साथ ही जैव-सुरक्षा, नैतिक तथा पर्यावरणीय चिंताओं को भी गंभीर रूप से बढ़ाती है।

हालिया प्रमुख निष्कर्ष

  • जटिलता संबंधी विरोधाभास: आनुवंशिक परीक्षणों से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी जीव की जटिलता उसके कुल जीनों की संख्या पर निर्भर नहीं करती है।
    • उदाहरण के लिए, एक छोटा एककोशिकीय जीवाणु लगभग 4,300 जीन रखता है, एक मानव में लगभग 22,000 प्रोटीन-कोडिंग जीन होते हैं, जबकि एक सूक्ष्म जल पिस्सू (डैफ्निया) में लगभग 31,000 जीन पाए जाते हैं—जो मानव से भी अधिक हैं।
  • सस्ती एवं तीव्र प्रौद्योगिकी: DNA अनुक्रमण (जीन रीडिंग) की गति अत्यंत तेज हो गई है, जबकि इसकी लागत में भारी कमी आई है।
    • जो कार्य पहले मानव जीनोम परियोजना के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय टीम को 10 वर्षों से अधिक समय एवं 3 अरब डॉलर की लागत से पूरा करना पड़ता था, वही अब एक छोटे प्रयोगशाला में कुछ घंटों में और कुछ सौ डॉलर में किया जा सकता है।
  • कंप्यूटर की भूमिका: वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि एक पूर्ण जीवाणु जीनोम को डिजिटल कंप्यूटर फाइल के माध्यम से रासायनिक रूप से निर्मित किया जा सकता है।
    • इस मानव-निर्मित DNA को एक जीवित कोशिका में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया, जिसमें उसका प्राकृतिक DNA हटा दिया गया था, जिससे विश्व का पहला डिजिटल रूप से निर्मित जीव तैयार हुआ।

4 2

सिंथेटिक बायोलॉजी के बारे में

सिंथेटिक बायोलॉजी वह क्षेत्र है, जिसमें अभियांत्रिकी सिद्धांतों को जीव विज्ञान पर लागू कर नए जैविक घटकों, उपकरणों तथा प्रणालियों का निर्माण एवं डिजाइन तैयार की जाती है। इसे दो प्रमुख विधियों में विभाजित किया जाता है:

  • टॉप-डाउन सिंथेटिक बायोलॉजी (जीनोम प्रतिस्थापन): इस विधि में एक मौजूदा जीवित कोशिका को लिया जाता है और उसके प्राकृतिक DNA को पूर्णतः मानव-निर्मित, रासायनिक DNA शृंखलाओं से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, ताकि कोशिका के व्यवहार या उत्पादन क्षमता को परिवर्तित किया जा सके।
  • बॉटम-अप सिंथेटिक बायोलॉजी (प्रोटोसेल): इस विधि में किसी भी पूर्व-विद्यमान जीव का उपयोग नहीं किया जाता। इसके स्थान पर वैज्ञानिक निर्जीव रसायन से एक सरल कोशिका को पूर्णतः प्रारंभ से निर्मित करने का प्रयास करते हैं।
    • प्रयोगशालाओं में प्रोटोसेल का निर्माण फैटी-एसिड वेसिकल्स (सूक्ष्म वसा बुलबुले) के माध्यम से किया जाता है, जो स्वाभाविक रूप से बंद संरचना का निर्माण करते हैं, तथा उपयुक्त परिस्थितियों में उस आनुवंशिक सामग्री की प्रतिकृति बनाते हैं, तथा अंततः दो भागों में विभाजित हो जाते हैं।

कोर जेनेटिक्स बनाम जैविक जटिलता

  • DNA—जीव का मूल आधार: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (DNA) जीनोम का मुख्य निर्माण खंड है। यह चार-अक्षरीय रासायनिक बेसएडेनिन (A), थाइमिन (T), गुआनिन (G), तथा साइटोसिन (C) का उपयोग करता है।
  • ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स की भूमिका: वास्तविक जैविक जटिलता कुल जीनों की संख्या के बजाय जीन नियंत्रण द्वारा संचालित होती है।
    • DNA के नियामक क्षेत्र लाइट स्विच की तरह कार्य करते हैं। ये वे विशेष स्थान होते हैं जहाँ ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स नामक नियंत्रण प्रोटीन जुड़ते हैं और विशिष्ट जीनों को कार्यशील” (On) या बंद” (Off) करते हैं।
    • यह परस्पर क्रिया यह निर्धारित करती है कि कोशिका के भीतर कौन-सा प्रोटीन, कब, कहाँ और कितनी मात्रा में बनेगा।

5 2

सिंथेटिक बायोलॉजी का महत्त्व

  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: उन्नत जीन डिजाइन वैज्ञानिकों को विशेष कोशिका निर्माण करने में सक्षम बनाता है। ये कोशिकाएँ लक्षित औषधि, नए टीके तथा फेनिलकेटोनूरिया जैसे गंभीर आनुवंशिक विकारों के उपचार विकसित कर सकती हैं।
  • पर्यावरण शुद्धीकरण एवं स्वच्छ ऊर्जा: कृत्रिम कोशिकाओं को इस प्रकार डिजाइन किया जा सकता है कि वे कार्बन को अवशोषित करें, विषैले औद्योगिक रासायनिक अपशिष्टों को स्वच्छ करें, तथा गैर-खाद्य पौधों से सीधे स्वच्छ जैव-ईंधन का उत्पादन करें।
  • जीवन की अवस्थाओं की मैपिंग: जीनोम अनुक्रमों का संकलन पृथ्वी के इतिहास की एक अत्यंत विस्तृत इतिहास-पुस्तक के समान कार्य करता है।
    • यह दर्शाता है कि विभिन्न पशु एवं पौधे कैसे आपस में संबंधित हैं, विकासवादी शाखाएँ कैसे विभाजित हुईं, तथा लंबे समय में उत्परिवर्तन के माध्यम से जीवों में कैसे परिवर्तन होते हैं, जिससे जीवाश्म की कमी को पूरा किया जा सकता है।

प्रमुख चिंताएँ

  • स्वतंत्र प्रतिकृति का जोखिम: सामान्य मशीनों या नाभिकीय ऊर्जा संयंत्रों के विपरीत, जैविक जीव डिजिटल डेटा को एक स्व-प्रतिकृति उत्पाद (जो स्वयं बढ़ता है) के रूप में परिवर्तित कर सकते हैं।
    • एक बार इन्हें प्रकृति में छोड़ देने पर, ये स्वतंत्र रूप से प्रजनन कर सकते हैं, जिससे इन्हें नियंत्रित करना लगभग असंभव हो सकता है।
  • विकासीय जाल: प्रकृति में छोड़े गए कृत्रिम जीव रूप स्वाभाविक रूप से वन्य पौधों एवं जीवों के साथ मिश्रित हो जाएँगे। समय के साथ, ये जीव प्राकृतिक चयन के प्रभाव से अनियंत्रित उत्परिवर्तन से गुजरेंगे।
    • यह स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुँचा सकता है तथा पारिस्थितिकी संतुलन को अप्रत्याशित रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • जैव-सुरक्षा एवं द्वि-उपयोग जोखिम: जीन निर्माण की प्रक्रिया के अत्यंत सस्ती एवं सरल होने के कारण, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ इसके संयुक्तीकरण से अत्यधिक खतरनाक,  स्वनिर्मित रोगाणुओं के निर्माण का जोखिम बढ़ गया है।

आगे की राह

  • लचीले नियम एवं निगरानी: सरकारों को पुराने एवं धीमे सुरक्षा कानूनों से आगे बढ़ना होगा। उन्हें तेज, स्मार्ट सुरक्षा जाँच तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है, जो जीन डिजाइन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में तीव्र प्रगति के साथ तालमेल बना सके।
  • अंतरराष्ट्रीय जैव-सुरक्षा समझौते: चूँकि जैविक रोगाणु राष्ट्रीय सीमाओं का पालन नहीं करते, इसलिए वैश्विक समझौतों एवं संधियों की तत्काल आवश्यकता है, जो व्यावसायिक DNA ऑर्डर की निगरानी करें तथा खतरनाक रोगाणुओं के अवैध निर्माण को रोक सकें।
  • सुरक्षित पृथक्करण प्रथाएँ: सिंथेटिक बायोलॉजी के प्रारंभिक वास्तविक उपयोगों को सख्ती से बंद औद्योगिक टैंकों के भीतर सीमित रखा जाना चाहिए।
    • जो भी कृत्रिम जीव रूप बाहरी वातावरण में छोड़े जाने हेतु बनाए जाएँ, उनमें आनुवंशिक ‘किल-स्विच’ अंतर्निहित होना चाहिए, ताकि वे प्रयोगशाला के बाहर प्रजनन न कर सकें।
‘सिंथेटिक बायोलॉजी’ का आधार

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.