संदर्भ
चीनी शोधकर्ताओं ने नाभिकीय अपशिष्ट जल से ट्रिटियम के कुशल पृथक्करण के लिए एक नया मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) विकसित किया है। यह नाभिकीय अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
ट्रिटियम संबंधी समस्या के बारे में
- ट्रिटियम हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है, जिसमें एक प्रोटॉन एवं दो न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं।
- यह प्राकृतिक रूप से अत्यल्प मात्रा में पाया जाता है तथा नाभिकीय रिएक्टरों में भी उत्पन्न होता है।

- पृथक करना कठिन: ट्रिटियम, ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ट्रिटिएटेड वाटर का निर्माण करता है, जो रासायनिक रूप से सामान्य जल (H₂O) के लगभग समान होता है।
- इसी कारण पारंपरिक पृथक्करण विधियाँ अत्यधिक ऊर्जा-गहन तथा कम दक्ष सिद्ध होती हैं।
- पर्यावरणीय महत्त्व: यद्यपि ट्रिटियम निम्न-ऊर्जा बीटा विकिरण उत्सर्जित करता है, फिर भी शरीर के भीतर प्रवेश करने पर यह स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
- फुकुशिमा नाभिकीय संयंत्र जैसे स्रोतों से उत्पन्न ट्रिटिएटेड वाटर की बड़ी मात्रा के सुरक्षित निपटान से पूर्व उसका समुचित उपचार आवश्यक होता है।
नए अनुसंधान की प्रमुख विशेषताएँ
- उन्नत पृथक्करण प्रौद्योगिकी: शोधकर्ताओं ने मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) आधारित एक एक्टिव पैकिंग मैटेरियल विकसित किया, जिसमें स्टेनलेस स्टील मेश पर NH₂-MIL-101(Cr)[NH₂-MIL-101(Cr) जो अमीनो समूह युक्त क्रोमियम-आधारित मेटल] की परत चढ़ाकर ट्रिटियम के पृथक्करण की दक्षता में वृद्धि की गई।
- पृथक्करण की कार्यविधि: यह मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क सूक्ष्म स्पंज की भाँति कार्य करते हुए सतही क्षेत्रफल को 32 गुना बढ़ा देता है।
- इसके क्रोमियम–ऑक्सीजन क्लस्टर, आइसोटोप एक्सचेंज की प्रक्रिया के माध्यम से रेडियोधर्मी ट्रिटियम का सामान्य हाइड्रोजन के साथ चयनात्मक विनिमय करते हैं, जिससे पृथक्करण की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- प्रदर्शन: इस प्रौद्योगिकी ने प्रति मीटर 42.5 थियोरेटिकल प्लेट्स (आसवन या पृथक्करण तकनीक में प्रति मीटर जितनी अधिक थियोरेटिकल प्लेट्स होंगी, पृथक्करण उतना ही प्रभावी होगा) का प्रदर्शन किया, जो वर्तमान की सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध सामग्री की तुलना में लगभग 134 गुना अधिक दक्ष है।
- यह फुकुशिमा जैसे रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल के उपचार हेतु एक आशाजनक समाधान प्रदान करती है तथा सुरक्षित एवं सतत् नाभिकीय ऊर्जा प्रबंधन को प्रोत्साहित करती है।
मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) के बारे में
- मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क अत्यधिक छिद्रयुक्त क्रिस्टलीय पदार्थ हैं, जिनका निर्माण धातु आयनों/क्लस्टरों तथा कार्बनिक अणुओं (लिंकर्स) को परस्पर जोड़कर किया जाता है।
- वर्ष 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन तथा ओमर एम. यागी को मेटल–ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क के विकास में उनके अग्रणी योगदान के लिए संयुक्त रूप से प्रदान किया गया था।
- प्रमुख विशेषताएँ
- अत्यधिक उच्च छिद्रयुक्तता: इनका आंतरिक सतही क्षेत्रफल अत्यंत विशाल होता है, जो पारंपरिक छिद्रयुक्त पदार्थों की तुलना में कहीं अधिक होता है।
- उच्च अनुकूलनशील संरचना: इनके छिद्रों के आकार तथा रासायनिक गुणों को विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सटीक रूप से अभिकल्पित किया जा सकता है।
- चयनात्मक अधिशोषण: ये गैसों, समस्थानिकों, प्रदूषकों अथवा अन्य लक्षित अणुओं का चयनात्मक रूप से अधिशोषण करने में सक्षम होते हैं।
- हल्के एवं स्थिर: अपेक्षाकृत कम भार के बावजूद इनकी अधिशोषण क्षमता अत्यधिक होती है।
- व्यापक अनुप्रयोग: इनका उपयोग गैस भंडारण, कार्बन कैप्चर, कैटालिसिस, ड्रग डिलीवरी (शरीर में अपेक्षित स्थान पर नियंत्रित मात्रा में दवा पहुचाने में सहायक), जल शोधन तथा नाभिकीय अपशिष्ट उपचार जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
निष्कर्ष
यह उपलब्धि दर्शाती है कि उन्नत पदार्थ रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं, जिससे नाभिकीय सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा सतत्, स्वच्छ एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी ऊर्जा प्रणालियों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।