संदर्भ
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान क्रू मॉड्यूल प्रणालियों के तीन महत्त्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं, जिससे भारत के प्रथम मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चालक दल की सुरक्षा, मॉड्यूल पृथक्करण तथा सुरक्षित रिकवरी (Recovery) से संबंधित प्रमुख प्रौद्योगिकियों का सफल परीक्षण हुआ।

इसरो द्वारा संपन्न प्रमुख परीक्षण
- क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम (CMUS): इसरो ने ‘क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम’ (CMUS) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जो समुद्र में अवतरण के बाद यदि क्रू मॉड्यूल विपरीत स्थिति में उतरता है, तो उसे स्वतः सीधी अवस्था में स्थापित कर देता है।
- महत्त्व: सीधी अवस्था चालक दल की सुरक्षा, त्वरित बचाव अभियान तथा अवतरण के बाद मॉड्यूल में समुद्री जल के प्रवेश को रोकने के लिए अत्यावश्यक है।
- क्रू सर्विस अंबिलिकल (CSU-2) पृथक्करण परीक्षण: इसरो ने क्रू सर्विस अंबिलिकल-2 (CSU-2) का सफल पृथक्करण प्रदर्शित किया, जो क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से जोड़ता है।
- उद्देश्य: यह प्रणाली उड़ान के दौरान दोनों मॉड्यूलों के मध्य विद्युत, डेटा तथा अन्य आवश्यक सेवाओं का आदान-प्रदान करती है और वायुमंडलीय पुनःप्रवेश से पूर्व इसका सुरक्षित पृथक्करण अनिवार्य होता है।
- परिणाम: परीक्षण ने उचित पृथक्करण, क्रू मॉड्यूल की संरचनात्मक स्थिरता तथा इंटरफेस प्रणालियों की अखंडता की पुष्टि की।
- एपेक्स कवर पृथक्करण परीक्षण: इसरो ने एपेक्स कवर (रॉकेट का शीर्ष सुरक्षात्मक आवरण) के पृथक्करण के दौरान क्रू मॉड्यूल की संरचनात्मक अखंडता का सफलतापूर्वक सत्यापन किया।
- उद्देश्य: एपेक्स कवर प्रक्षेपण एवं कक्षीय उड़ान के दौरान पैराशूट तथा उससे संबद्ध पुनर्प्राप्ति प्रणालियों की सुरक्षा करता है। पैराशूट के खुलने से पूर्व इसका पृथक्करण अनिवार्य होता है।
- परिणाम: इस सफल परीक्षण ने विश्वसनीय पृथक्करण की पुष्टि की, जिससे पैराशूट प्रणाली का उचित रूप से खुलना तथा क्रू मॉड्यूल का सुरक्षित अवतरण सुनिश्चित हुआ।

PWOnlyIAS विशेष
क्रू मॉड्यूल (Crew Module–CM) के बारे में
- क्रू मॉड्यूल (CM) एक मानव-निवास योग्य अंतरिक्ष यान है, जिसमें मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री रहते हैं तथा वायुमंडलीय पुनःप्रवेश के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जाता है।
- कार्य
- अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दाबयुक्त (Pressurised) एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना।
- जीवन-समर्थन प्रणाली, नेविगेशन, संचार तथा चालक दल नियंत्रण प्रणालियों को समाहित करना।
- वायुमंडलीय पुनःप्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- समुद्र में सुरक्षित अवतरण तथा अवतरण के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना।
गगनयान मिशन के बारे में
- गगनयान भारत का प्रथम मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसका उद्देश्य तीन सदस्यीय भारतीय चालक दल को निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit–LEO) में भेजने तथा उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता का प्रदर्शन करना है।
- प्रक्षेपण: इस कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2018 में की गई थी तथा इसका क्रियान्वयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा किया जा रहा है।
- मिशन प्रोफाइल: इस मिशन के अंतर्गत अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किमी. की ऊँचाई पर निम्न पृथ्वी कक्षा में तीन दिनों तक स्थापित किया जाएगा, जिसके उपरांत उनका समुद्र में सुरक्षित अवतरण कराया जाएगा।
- उद्देश्य: मानव अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित स्वदेशी क्षमताओं का विकास करना, जिसमें चालक दल की सुरक्षा, जीवन-समर्थन प्रणालियाँ, क्रू एस्केप सिस्टम, पुनःप्रवेश प्रौद्योगिकियाँ तथा पुनर्प्राप्ति अभियान शामिल हैं।
गगनयान के अन्य प्रमुख घटक
- मानव-प्रमाणित प्रक्षेपण यान (HLVM3): LVM3 का संशोधित संस्करण, जिसे मानवयुक्त मिशनों के लिए निर्धारित कठोर मानव-प्रमाणीकरण मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।
- क्रू एस्केप सिस्टम (CES): प्रक्षेपण के दौरान किसी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में सक्षम प्रणाली।
- इसरो ने ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ के सत्यापन हेतु TV-D1 परीक्षण यान मिशन (2023) का सफल संचालन किया।
- पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन-समर्थन प्रणाली (ECLSS): ऑक्सीजन आपूर्ति, तापमान, आर्द्रता, दाब तथा कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन को नियंत्रित कर चालक दल के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखती है।
- ऑर्बिटल मॉड्यूल: इसमें क्रू मॉड्यूल तथा सर्विस मॉड्यूल सम्मिलित होते हैं, जो मिलकर उस अंतरिक्ष यान का निर्माण करते हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में ले जाता है।
- रिकवरी संबंधी अभियान (Recovery Operations): बंगाल की खाड़ी में अवतरण के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित रिकवरी भारतीय नौसेना एवं इसरो के समन्वित अभियान द्वारा की जाएगी।
गगनयान मिशन का महत्त्व
- भारत की सामरिक क्षमता को सुदृढ़ बनाता है: यह भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करता है, जो स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन संचालित करने में सक्षम हैं।
- प्रौद्योगिकीय नवाचार को प्रोत्साहन: यह पदार्थ विज्ञान, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, जीव विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में प्रौद्योगिकीय प्रगति को गति प्रदान करता है।
- औद्योगिक पारितंत्र को सुदृढ़ बनाता है: यह भारतीय उद्योगों, एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स तथा शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी को बढ़ावा देकर उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास को प्रोत्साहित करता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार: यह चालक दल प्रशिक्षण, अंतरिक्ष चिकित्सा तथा भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों जैसे क्षेत्रों में वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग को सुदृढ़ करता है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रेरित करता है: यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (STEM) शिक्षा तथा अनुसंधान के प्रति युवाओं की रुचि और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करता है।
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परीक्षणों का महत्त्व
- चालक दल की सुरक्षा में वृद्धि: इन परीक्षणों ने सुरक्षित पुनःप्रवेश, मॉड्यूल पृथक्करण, पैराशूट तैनाती तथा अवतरण के बाद स्थिरता सुनिश्चित करने वाली महत्त्वपूर्ण प्रणालियों का सत्यापन किया, जिससे मिशन संबंधी जोखिमों में उल्लेखनीय कमी आई।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को सुदृढ़ीकरण: इन प्रणालियों का सफल परीक्षण भारत के प्रथम स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
- स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाना: ये परीक्षण मानव-प्रमाणित जटिल अंतरिक्ष प्रणालियों के स्वदेशी विकास में भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
- मिशन की विश्वसनीयता में वृद्धि: वास्तविक परिस्थितियों में सम्पन्न अर्हता परीक्षणों ने गगनयान मिशन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है।
- भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को समर्थन: गगनयान के लिए विकसित प्रौद्योगिकियाँ भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) तथा संभावित मानवयुक्त चंद्र मिशनों सहित भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की आधारशिला सिद्ध होंगी।
निष्कर्ष
‘क्रू मॉड्यूल’ की महत्त्वपूर्ण प्रणालियों का सफल अर्हता परीक्षण गगनयान मिशन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो सुरक्षित एवं विश्वसनीय मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में इसरो की प्रगति को सुदृढ़ करता है। यह भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को और मजबूत बनाते हुए दीर्घावधि मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियानों सहित भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।