UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

भारत की एथेनॉल-मिश्रित ईंधन नीति

13 Jul 2026

संदर्भ

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद केंद्र सरकार, E20 (20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) का मूल्य शुद्ध पेट्रोल से अधिक बनाए रखेगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा, किसान कल्याण, उपभोक्ता हितों तथा संसाधन संधारणीयता के मध्य संतुलन स्थापित करने पर बहस पुनः प्रारंभ हो गई है।

एथेनॉल-मिश्रित ईंधन (EBF) कार्यक्रम के बारे में

  • एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम: पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण किया जाता है, ताकि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाई जा सके तथा कृषि उपज की अतिरिक्त माँग के माध्यम से किसानों की आय को समर्थन प्रदान किया जा सके।
  • प्रारंभ: यह कार्यक्रम वर्ष 2003 में प्रारंभ किया गया था तथा जैव ईंधनों पर राष्ट्रीय नीति (National Policy on Biofuels) के अंतर्गत इसे क्रमिक रूप से विस्तारित किया गया है।
  • वर्तमान लक्ष्य: भारत ने चयनित क्षेत्रों में निर्धारित समय से पूर्व ही 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है तथा इसे पूरे देश में विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • प्रमुख फीडस्टॉक: एथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः गन्ने के शीरे, गन्ने के रस, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न तथा बढ़ते हुए स्तर पर द्वितीय-पीढ़ी (2G) एथेनॉल हेतु कृषि अवशेषों से किया जाता है।

एथेनॉल-मिश्रण कार्यक्रम के उद्देश्य

  • कच्चे तेल के आयात में कमी लाना: आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करना, जिससे ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ हो तथा आयात व्यय में कमी आए।
  • किसानों की आय में समर्थन: कृषि उपज के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना तथा किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाना।
  • स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना, वायु गुणवत्ता में सुधार करना तथा जलवायु संबंधी भारत की प्रतिबद्धताओं में योगदान देना।
  • जैव-अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना: जैव ईंधन उद्योगों, ग्रामीण अवसंरचना तथा कृषि में मूल्य संवर्द्धन में निवेश को प्रोत्साहित करना।

एथेनॉल मिश्रण के लाभ

  • ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना: एथेनॉल मिश्रण भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता के विरुद्ध लचीलापन बढ़ता है।
  • किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान: गन्ना, मक्का तथा फसल अवशेषों की माँग उत्पन्न कर आय के स्रोतों में विविधता लाता है।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: एथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है, जो वाहन उत्सर्जन को कम करने में सहायता करता है तथा वर्ष 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य में योगदान देता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: डिस्टिलरी तथा जैव ईंधन उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसरों का सृजन होता है तथा ग्रामीण औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है: द्वितीय-पीढ़ी (2G) एथेनॉल कृषि अवशेषों का उपयोग कर अपशिष्ट को मूल्य-वर्द्धित ईंधन में परिवर्तित करता है।

6 16

वर्तमान नीति से संबंधित चिंताएँ

  • उपभोक्ताओं पर अधिक बोझ: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कम कीमतों के बावजूद E20 पेट्रोल का मूल्य अधिक बनाए रखने से उपभोक्ताओं, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, पर ईंधन व्यय का अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।
  • जल-गहन फसलों को बढ़ावा: चूँकि वर्तमान में अधिकांश एथेनॉल का उत्पादन गन्ने से किया जाता है, इसलिए यह नीति परोक्ष रूप से भारत की सबसे अधिक जल तथा उर्वरक-गहन फसलों में से एक की कृषि को प्रोत्साहित करती है।
    • उदाहरण: महाराष्ट्र तथा कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना-उत्पादक राज्य अक्सर जल संकट से प्रभावित रहते हैं।
  • कमजोर संसाधन दक्षता: फीडस्टॉक की प्रकृति की अनदेखी कर समान प्रोत्साहन देने से पहले से उपलब्ध प्रसंस्करण अवसंरचना वाले फीडस्टॉक को बढ़ावा मिलता है, जबकि अधिक संसाधन-कुशल फीडस्टॉक का उपयोग सीमित रह जाता है।
  • खाद्य-ईंधन द्वंद्व: मक्का तथा चावल जैसी खाद्य फसलों को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से आपूर्ति संबंधी बाधाओं के दौरान खाद्य उपलब्धता तथा मूल्य स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
  • किसानों की संरचनात्मक समस्याओं पर सीमित प्रभाव: केवल फीडस्टॉक के अधिक मूल्य से छोटी जोतों, कटाई उपरांत हानियों, लचर बाजार पहुँच तथा कम मूल्य संवर्द्धन जैसी चुनौतियों का समाधान नहीं किया जा सकता है।
  • कम ईंधन दक्षता: चूँकि एथेनॉल का ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होता है, इसलिए E20 ईंधन सामान्यतः कम माइलेज प्रदान करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की प्रभावी लागत बढ़ जाती है।

सतत् एथेनॉल उत्पादन के लिए वैकल्पिक फीडस्टॉक

  • मक्का: गन्ने की तुलना में कम जल की आवश्यकता होती है, किंतु फिर भी अपेक्षाकृत अधिक उर्वरक के उपयोग पर निर्भर रहता है।
  • मोटे अनाज: अधिक जलवायु-लचीले तथा जल-दक्ष हैं, यद्यपि इनमें स्टार्च की कम मात्रा एथेनॉल उत्पादन को सीमित करती है।
  • स्वीट सोरघम (Sweet Sorghum): गन्ने की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम जल की आवश्यकता होती है, इसकी फसल अवधि कम होती है तथा यह अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
  • कृषि अवशेष: धान, गेहूँ का पुआल, मक्का के डंठल तथा मूँगफली के छिलके द्वितीय-पीढ़ी (2G) एथेनॉल के लिए फीडस्टॉक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे कृषि भूमि पर दबाव कम होता है।

सरकारी पहल

  • एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम (2003): प्रशासित क्रय मूल्यों तथा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा समन्वित कार्यान्वयन के माध्यम से पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को बढ़ावा देता है।
  • जैव ईंधनों पर राष्ट्रीय नीति (2018; संशोधित 2022): 20% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को वर्ष 2030 से अग्रिम कर 2025–26 कर दिया तथा अनुमेय फीडस्टॉक की सीमा का विस्तार किया।
  • प्रधानमंत्री जी-वन (JI-VAN) योजना (2019): कृषि अवशेषों तथा अन्य लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास का उपयोग करने वाली द्वितीय-पीढ़ी (2G) एथेनॉल परियोजनाओं की स्थापना को समर्थन प्रदान करती है।
  • सतत् (SATAT) पहल (2018): कृषि अपशिष्ट तथा जैविक अवशेषों से संपीडित जैव-गैस (CBG) के उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिससे जैव ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र को पूरक समर्थन मिलता है।

आगे की राह

  • फीडस्टॉक विविधीकरण को बढ़ावा देना: समान प्रोत्साहन प्रदान करने के स्थान पर जल एवं संसाधन-दक्ष फीडस्टॉक को प्राथमिकता देने वाले विभेदित प्रोत्साहनों को लागू किया जाए।
  • 2G एथेनॉल का विस्तार करना: व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण, अवशेष संग्रहण अवसंरचना, सुनिश्चित ऑफटेक व्यवस्थाएँ तथा व्यावसायिक स्तर के 2G एथेनॉल संयंत्रों के लिए प्रोत्साहन प्रदान किए जाएँ।
  • जैव ईंधन एवं कृषि नीतियों का एकीकरण: एथेनॉल खरीद को जल संरक्षण, फसल प्रतिरूप विविधीकरण, खाद्य सुरक्षा तथा जलवायु लचीलापन से संबंधित उद्देश्यों के साथ समन्वित किया जाए।
  • किसानों की प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार: मुख्यतः प्रशासित मूल्यों में वृद्धि पर निर्भर रहने के बजाय सिंचाई, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण अवसंरचना तथा बाजार संपर्क में निवेश किया जाए।
  • उपभोक्ता हितों की रक्षा: यह सुनिश्चित किया जाए कि जैव ईंधन मूल्य निर्धारण पारदर्शी तथा संतुलित रहे, ताकि ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति के दौरान उपभोक्ताओं पर असंगत बोझ न पड़े।

निष्कर्ष

भारत का एथेनॉल-मिश्रित ईंधन (EBF) कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा तथा जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है, किंतु इसकी दीर्घकालिक सफलता विविधीकृत फीडस्टॉक, द्वितीय-पीढ़ी (2G) एथेनॉल तथा एकीकृत कृषि-ऊर्जा नीतियों के माध्यम से किसान कल्याण, उपभोक्ता वहनीयता तथा संसाधन संधारणीयता के मध्य संतुलन स्थापित करने पर निर्भर करती है।

भारत की एथेनॉल-मिश्रित ईंधन नीति

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.