संदर्भ
हाल ही में विद्युत मंत्रालय ने वर्ष 2027–2032 के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-III) मानदंड का मसौदा जारी किया है, जिसमें यात्री वाहनों के लिए ईंधन दक्षता तथा कार्बन उत्सर्जन के अधिक कड़े मानकों का प्रस्ताव किया गया है।
मसौदा कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-III) मानकों की प्रमुख विशेषताएँ
- मसौदा CAFE-III मानदंडों का उद्देश्य ईंधन दक्षता में क्रमिक सुधार करना, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी करना तथा भारत के जलवायु परिवर्तन शमन एवं ऊर्जा संरक्षण संबंधी लक्ष्यों का समर्थन करना है।
- प्रयोज्यता: ये मानदंड वर्ष 2027–28 से 2031–32 के दौरान भारत में बिक्री के लिए निर्मित या आयातित M1 श्रेणी के यात्री वाहनों अर्थात् चालक सहित अधिकतम नौ व्यक्तियों (चालक + आठ यात्रियों) की बैठने की क्षमता वाले वाहनों पर लागू होंगे ।
- CAFE-II का प्रतिस्थापन: प्रस्तावित मानदंड वर्तमान CAFE-II मानदंडों का स्थान लेंगे, जिनकी वैधता 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाली है।
- ईंधन दक्षता मानकों को कठोर बनाना: मसौदे में कॉर्पोरेट औसत ईंधन खपत की अनुमेय सीमा को वर्ष 2027–28 में 3.996 लीटर/100 किमी. (94.76 gCO₂/किमी.) से घटाकर वर्ष 2031–32 तक 3.3273 लीटर/100 किमी (78.90 gCO₂/किमी) करने का प्रस्ताव किया गया है।

- अनुपालन का मूल्यांकन: अनुपालन का आकलन दो चरणों में किया जाएगा—पहले तीन-वर्षीय अवधि, उसके बाद दो-वर्षीय अवधि, जिससे वाहन निर्माताओं को एक पूर्वानुमेय विनियामक ढाँचा प्राप्त होगा।
- निम्न-कार्बन ईंधनों की मान्यता: पहली बार इन मानदंडों में एथेनॉल, जैव ईंधन (Biofuels) तथा संपीड़ित बायोगैस (CBG) की कार्बन तटस्थता को मान्यता देने का प्रस्ताव किया गया है, जिसके अंतर्गत अनुपालन मूल्यांकन के दौरान घोषित टेलपाइप CO₂ उत्सर्जन में निर्दिष्ट कटौती की अनुमति होगी।
- कार्बन तटस्थता कारक (CNF)
- वर्तमान एथेनॉल मिश्रण स्तर के लिए 8% कार्बन तटस्थता कारक (CNF) का प्रस्ताव किया गया है।
- संपीड़ित बायोगैस (CBG) तथा अन्य जैव ईंधनों के लिए यह कटौती उस समय प्रचलित वास्तविक मिश्रण स्तर पर निर्भर करेगी।
- प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन: वाहन निर्माता स्वीकृत ईंधन-बचत प्रौद्योगिकियों के लिए अनुपालन लाभ के रूप में अधिकतम 9 gCO₂/किमी तक का दावा कर सकेंगे, बशर्ते प्रत्येक प्रौद्योगिकी के लिए अधिकतम लाभ 1 gCO₂/किमी तक सीमित होगा।
कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानकों के बारे में
- कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक किसी वाहन निर्माता द्वारा एक वित्तीय वर्ष में बेचे गए यात्री वाहनों के पूरे बेड़े (Fleet) के लिए प्राप्त किए जाने वाले औसत ईंधन उपभोग तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन की सीमा निर्धारित करते हैं।
- उद्देश्य: ईंधन दक्षता में वृद्धि, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन एवं जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा व जलवायु प्रतिबद्धताओं को बढ़ावा देना।
- कार्यान्वयन: इन मानकों का कार्यान्वयन ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency- BEE) द्वारा विद्युत मंत्रालय के परामर्श से किया जाता है।
- अनुपालन सिद्धांत: अनुपालन का आकलन प्रत्येक निर्माता के सभी वाहनों की औसत ईंधन खपत एवं उत्सर्जन के आधार पर किया जाता है, जिससे समग्र उत्सर्जन में कमी और वाहन डिजाइन में लचीलापन सुनिश्चित होता है।
- भारत में CAFE मानकों की शुरुआत CAFE-I (वर्ष 2017–2022) तथा CAFE-II (वर्ष 2022–2027) से हुई थी; CAFE-III इसका तीसरा चरण होगा, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप क्रमिक रूप से कठोर होते नियामक ढाँचे को दर्शाता है।
भारत में CAFE मानकों की तुलना
| मापदंड |
CAFE-I |
CAFE-II |
मसौदा CAFE-III |
| कार्यान्वयन अवधि |
वर्ष 2017–18 से 2021–22 |
वर्ष 2022–23 से 2026–27 |
वर्ष 2027–28 से 2031–32 (प्रस्तावित) |
| प्रमुख उद्देश्य |
बेड़ा-स्तरीय (Fleet-Level) ईंधन दक्षता मानकों की शुरुआत |
ईंधन दक्षता एवं CO₂ उत्सर्जन मानकों को अधिक कठोर बनाना। |
अधिक कठोर ईंधन दक्षता मानकों तथा निम्न-कार्बन ईंधनों की मान्यता के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में कमी को गति देना। |
| ईंधन उपभोग / CO₂ लक्ष्य |
प्रथम बेड़ा-औसत (Fleet-Average) सीमाएँ लागू की गईं। |
CAFE-I की तुलना में अधिक कठोर |
वर्ष 2027–28 में 3.996 लीटर/100 किमी. (94.76 gCO₂/km) से घटाकर वर्ष 2031–32 तक 3.3273 लीटर/100 किमी. (78.90 gCO₂/km) करने का प्रस्ताव। |
| वैकल्पिक ईंधनों की मान्यता |
प्रावधान नहीं था |
सीमित मान्यता |
कार्बन तटस्थता कारक (CNF) के माध्यम से एथेनॉल, जैव ईंधनों तथा संपीडित जैव गैस (CBG) को मान्यता। |
CAFE एवं अन्य संबंधित विनियमों के बीच अंतर
| पहलू |
CAFE मानक |
भारत स्टेज-VI (BS-VI) मानक |
FAME योजना |
| उद्देश्य |
ईंधन दक्षता में सुधार करना तथा CO₂ उत्सर्जन को कम करना। |
वाहनों के निकास उत्सर्जन (टेलपाइप उत्सर्जन) से होने वाले वायु प्रदूषण में कमी |
विद्युत वाहनों (EVs) को अपनाने को बढ़ावा देना। |
| मुख्य फोकस |
ईंधन उपभोग तथा कार्बन उत्सर्जन |
वाहन उत्सर्जन मानक (PM, NOx, HC, CO) |
मांग-आधारित प्रोत्साहन तथा EV चार्जिंग अवसंरचना |
| प्रकृति |
निर्माताओं के लिए नियामक ईंधन-दक्षता मानक |
वाहनों एवं ईंधनों के लिए उत्सर्जन नियंत्रण विनियम |
सरकारी प्रोत्साहन योजना |
| प्रयोज्यता |
यात्री वाहन निर्माता (बेड़ा-औसत मानकों के आधार पर) |
सभी लागू वाहन श्रेणियाँ |
EV खरीदार, निर्माता तथा चार्जिंग पारितंत्र |
| प्रमुख परिणाम |
CO₂ उत्सर्जन में कमी तथा ईंधन दक्षता में सुधार |
प्रदूषकों में कमी के माध्यम से बेहतर वायु गुणवत्ता |
EV का तीव्र प्रसार तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी। |