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संक्षिप्त समाचार

17 Jul 2026

व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेशन नेटवर्क 

हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने वन नेशन, वन टाइम पहल के अंतर्गत बंगलूरू के जक्कूर में व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी आधारित नेटवर्क प्रदर्शन का उद्घाटन किया है।

व्हाइट रैबिट-आधारित भारतीय मानक समय (IST) वितरण नेटवर्क के बारे में

  • भारतीय मानक समय (IST) वितरण नेटवर्क एक स्वदेशी प्रणाली है, जो पूरे देश में अत्यधिक सटीक भारतीय मानक समय उपलब्ध कराती है , जो व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी का उपयोग करके पूरे देश में आधिकारिक भारतीय मानक समय (IST) का सुरक्षित वितरण करती है तथा GPS जैसे विदेशी समय स्रोतों पर निर्भरता को कम करती है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के अंतर्गत कार्यान्वित, जिसमें उपभोक्ता मामले मंत्रालय के वैधानिक मापविज्ञान प्रभाग (Legal Metrology Division) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
    • इसका विकास राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), बीएसएनएल (BSNL) तथा सेबी (SEBI) के सहयोग से किया गया है।
    • यह समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) मानकों के अनुरूप रहते हुए अत्यधिक सटीक एवं समकालिक (Synchronized) भारतीय मानक समय (IST) उपलब्ध कराता है।
  • संभावित प्रभाव
    • यह बैंकिंग, शेयर बाजारों, दूरसंचार, विद्युत ग्रिड, रक्षा तथा डिजिटल गवर्नेंस की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ करता है।
    • यह साइबर हमलों, स्पूफिंग तथा डेटा से छेड़छाड़ से महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा करते हुए पूरे देश में समय के एकसमान समकालिकीकरण (Time Synchronization) को सुनिश्चित करता है।

व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (WR) के बारे में

  • व्हाइट रैबिट (WR) एक ओपन-सोर्स, ईथरनेट-आधारित उच्च-परिशुद्धता समय निर्धारण एवं समकालिकीकरण (समय-सामंजस्य) प्रौद्योगिकी है, जिसे यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN) द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह सिंक्रोनस ईथरनेट (SyncE) तथा IEEE 1588 प्रिसीजन टाइम प्रोटोकॉल (PTP) को संयोजित कर बड़े वितरित नेटवर्कों में उप-नैनोसेकंड (पिकोसेकंड-स्तरीय) समकालिकीकरण () प्राप्त करती है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • नियतात्मक समय-सामंजस्य के साथ सब-नैनोसेकंड स्तर की समय सटीकता प्रदान करती है।
    • एक ही ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से वास्तविक समय डेटा तथा सटीक समय/आवृत्ति संकेतों का एक साथ संचार करती है।
    • उच्च विस्तार-क्षमता के साथ लंबी दूरी तक हजारों नेटवर्क नोड्स का समर्थन करती है।
    • यह ओपन-सोर्स, मानक-आधारित तथा दोष-सहिष्णु (अर्थात् किसी घटक के विफल होने पर भी कार्य करने में सक्षम) प्रणाली है, जिससे वैकल्पिक नेटवर्क मार्गों का उपयोग तथा उच्च विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
  • अनुप्रयोग
    • वित्तीय बाजार: उच्च-आवृत्ति व्यापार तथा लेन-देन के सटीक सटीक समय-सामंजस्य के लिए।
    • दूरसंचार: सुरक्षित क्लॉक वितरण (Secure Clock Distribution) तथा GNSS/GPS समय प्रणाली के लिए विश्वसनीय बैकअप प्रदान करने हेतु।
    • स्मार्ट विद्युत ग्रिड: वितरित विद्युत नेटवर्कों के समकालिक संचालन के लिए।
    • वैज्ञानिक अनुसंधान: कण त्वरकों (Particle Accelerators), रेडियो टेलिस्कोप्स तथा बड़े अनुसंधान प्रतिष्ठानों में।
    • क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ: क्वांटम संचार नेटवर्कों तथा क्वांटम कंप्यूटिंग प्रणालियों के सटीक समय-सामंजस्य  के लिए।

जगन्नाथ रथ यात्रा 

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हाल ही में ओडिशा के पुरी में आयोजित 149वीं भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि इसके उत्सव भारत एवं विदेशों में भी मनाए गए।

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में 

  • जगन्नाथ रथ यात्रा, जिसे रथ महोत्सव (Festival of Chariots) भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सर्वाधिक पूजनीय उत्सवों में से एक है।
  • वार्षिक आयोजन: यह उत्सव प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (हिंदू पंचांग के आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन) को मनाया जाता है।
  • यह भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र तथा देवी सुभद्रा की पुरी, ओडिशा स्थित जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर (लगभग 3 किमी.) तक की वार्षिक औपचारिक यात्रा का स्मरण कराता है, जहाँ वे कई दिनों तक प्रवास करते हैं और इसके पश्चात् बहुदा यात्रा के दौरान वापस लौटते हैं, जिससे नौ-दिवसीय उत्सव पूर्ण होता है।
  • प्रमुख देवता
    • भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण का एक स्वरूप)
    • भगवान बलभद्र (भगवान जगन्नाथ के ज्येष्ठ भ्राता)
    • देवी सुभद्रा (भगवान जगन्नाथ एवं भगवान बलभद्र की बहन)।
  • रथों की प्रमुख विशेषताएँ
    • लकड़ी के पवित्र तीन रथ: प्रत्येक वर्ष पारंपरिक विधियों तथा पवित्र लकड़ी का उपयोग कर तीन विशाल लकड़ी के रथों का नवीन निर्माण किया जाता है, जो नवीकरण एवं परंपरा की निरंतरता का प्रतीक हैं।
    • प्रत्येक देवता के लिए अलग रथ: भगवान जगन्नाथ के लिए नंदीघोष (लाल एवं पीले रंग की छत्रछाया), भगवान बलभद्र के लिए तलध्वज (लाल एवं हरे रंग की छत्रछाया) तथा देवी सुभद्रा के लिए दर्पदलन (देवदलन) (लाल एवं काले रंग की छत्रछाया) निर्धारित हैं।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बारे में

  • ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर चार धाम तीर्थस्थलों में से एक है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी ईसवी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा कराया गया था, जिसे बाद में अनंगभीम देव तृतीय के शासनकाल में पूर्ण किया गया।
  • मंदिर शैली: यह मंदिर कलिंग स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो नागर शैली का एक क्षेत्रीय रूप है तथा अपनी ऊँची वक्ररेखीय देउल (शिखर) के लिए प्रसिद्ध है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • मंदिर संरचना: मंदिर परिसर में देउल (गर्भगृह के ऊपर स्थित शिखर), गर्भगृह, जगमोहन (सभा मंडप) तथा भोग मंडप (भोग अर्पण मंडप) शामिल हैं। इसके शीर्ष पर भगवान विष्णु का पवित्र नीलचक्र स्थापित है, जो आठ तीलियों वाला चक्र है।
    • चार पवित्र प्रवेश द्वार: मंदिर के चारों दिशाओं में चार प्रमुख प्रवेश द्वार हैं— सिंह द्वार (पूर्व), हस्ती द्वार (उत्तर), व्याघ्र द्वार (पश्चिम) तथा अश्व द्वार (दक्षिण)।
    • निर्माण: मंदिर का निर्माण खोंडालाइट पत्थर से बिना गारे (Mortar) के किया गया है तथा पत्थरों के खंडों को लोहे की डॉवेल (Iron Dowels) द्वारा आपस में जोड़ा गया है।

मालवन – एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (Malvan – Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft)

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भारतीय नौसेना 22 जुलाई, 2026 को आईएनएस मालवन  को भारतीय नौसेना में शामिल (कमीशन) करेगी।

आईएनएस मालवन के बारे में

  • आईएनएस मालवन भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित माहे-श्रेणी (Mahe-class) का दूसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है, जिसे उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • निर्माता: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि।
  • स्वदेशी सामग्री: 80% से अधिक, जो आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रतिबिंबित करती है।
  • भूमिका: उथले तटीय जल क्षेत्रों में शत्रु देशों की पनडुब्बियों का पता लगाने तथा उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • क्षमताएँ: प्रभावी तटीय (Littoral) अभियानों के लिए तीव्र गतिशीलता, सटीकता तथा दीर्घकालिक संचालन क्षमता का संयोजन करता है।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट 

अमेरिकी रक्षा विभाग ने 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सक्रिय-सेवा सैन्य कर्मियों के लिए वार्षिक टेस्टोस्टेरोन जाँच अनिवार्य कर दी है।

अमेरिकी सेना द्वारा टेस्टोस्टेरोन जाँच के पीछे का तर्क

  • सैन्य तत्परता को सुदृढ़ करना: वार्षिक जाँच का उद्देश्य आयु-संबंधित टेस्टोस्टेरोन की कमी की पहचान करना है, जो आधुनिक युद्ध अभियानों के लिए आवश्यक शारीरिक शक्ति, सहनशक्ति, संज्ञानात्मक क्षमता तथा मनोवैज्ञानिक दृढ़ता को प्रभावित कर सकती है।
  • स्वास्थ्य परिणामों में सुधार: प्रारंभिक पहचान से पात्र सैन्य कर्मी स्वैच्छिक रूप से टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) का विकल्प चुन सकते हैं, जिससे संचालनात्मक क्षमता बनाए रखने, हार्मोन-संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने तथा दीर्घकालिक सैन्य प्रभावशीलता को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है।

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के बारे में

  • टेस्टोस्टेरोन टेस्ट एक रक्त परीक्षण है, जो शरीर में टेस्टोस्टेरोन, अर्थात् प्रमुख पुरुष लैंगिक हार्मोन, के स्तर को मापता है।
  • इसका उपयोग हार्मोनल असंतुलन का निदान करने, प्रजनन क्षमता एवं यौन विकास का मूल्यांकन करने तथा पुरुषों एवं महिलाओं दोनों में हार्मोन-संबंधी चिकित्सीय स्थितियों की निगरानी के लिए किया जाता है।
  • संबंधित प्रमुख तथ्य:
    • टेस्ट के प्रकार: इसमें कुल टेस्टोस्टेरोन (Total Testosterone) का परीक्षण किया जाता है, जिसमें रक्त में उपस्थित मुक्त (Free) तथा प्रोटीन (मुख्यतः SHBG एवं एल्ब्यूमिन) से बंधित दोनों प्रकार के टेस्टोस्टेरोन सम्मिलित होते हैं।
      • इसके अतिरिक्त मुक्त टेस्टोस्टेरोन (Free Testosterone) का परीक्षण किया जाता है, जो किसी प्रोटीन से बँधा नहीं होता और शरीर में जैविक रूप से सक्रिय होता है। साथ ही जैव-उपलब्ध टेस्टोस्टेरोन (Bioavailable Testosterone) का भी आकलन किया जाता है, जिसमें मुक्त टेस्टोस्टेरोन तथा एल्ब्यूमिन से कमजोर रूप से बँधा टेस्टोस्टेरोन शामिल होता है, क्योंकि दोनों ऊतकों द्वारा आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं।
    • सामान्य स्तर: वयस्क पुरुषों में सामान्यतः 280–1,100 ng/dL तथा वयस्क महिलाओं में 15–70 ng/dL होता है, हालाँकि संदर्भ मान विभिन्न प्रयोगशालाओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
  • अनुप्रयोग:
    • पुरुष हाइपोगोनेडिज्म (Hypogonadism) एवं बाँझपन का निदान: यह परीक्षण कम टेस्टोस्टेरोन (हाइपोगोनेडिज्म) का निदान करने में सहायता करता है, विशेषकर उन पुरुषों में जिनमें कामेच्छा में कमी, स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction), बाँझपन, थकान अथवा मांसपेशियों के द्रव्यमान में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
    • महिलाओं में हार्मोनल विकारों का पता लगाना: यह पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), बाँझपन, अनियमित मासिक धर्म चक्र तथा एंड्रोजन की अधिकता के कारण होने वाले अत्यधिक चेहरे के बाल या आवाज के भारी होने जैसी स्थितियों के निदान में सहायक है।
    • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) की निगरानी: यह परीक्षण टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) प्रारंभ करने से पहले आधारभूत हार्मोन स्तर (Baseline Hormone Levels) निर्धारित करता है तथा उपचार के दौरान सुरक्षित चिकित्सीय स्तर बनाए रखने और दुष्प्रभावों को न्यूनतम करने हेतु निगरानी करता है।
    • यौवनारंभ संबंधी विकारों का मूल्यांकन: ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) तथा फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग  हार्मोन (FSH) परीक्षणों के साथ मिलकर यह बच्चों एवं किशोरों में असमय अथवा विलंबित यौवनारंभ के कारणों का निर्धारण करने में सहायता करता है।

साइक्लोस्पोरियासिस (Cyclosporiasis)

अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (U.S. CDC) अनेक राज्यों में साइक्लोस्पोरियासिस के मामलों में हुई तीव्र वृद्धि की जाँच कर रहा है, जहाँ 1,600 से अधिक पुष्ट संक्रमण दर्ज किए गए हैं।

साइक्लोस्पोरियासिस (Cyclosporiasis) के बारे में

  • साइक्लोस्पोरियासिस एक खाद्य एवं जल-जनित आँत्र रोग है, जो प्रोटोजोआ परजीवी साइक्लोस्पोरा काएटानेन्सिस के कारण होता है।
    • यह मुख्यतः जठराँत्र (Gastrointestinal) तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे दीर्घकालिक अतिसार (दस्त) की बीमारी होती है।
  • कारण: यह रोग साइक्लोस्पोरा काएटानेन्सिस नामक सूक्ष्म परजीवी के सेवन से होता है। संक्रमण के 2 दिन से लेकर 2 सप्ताह से अधिक समय बाद लक्षण प्रकट होते हैं, जिनमें सामान्यतः पानी जैसे दस्त, मतली, थकान, पेट में ऐंठन, भूख में कमी तथा वजन घटना शामिल हैं।
  • संचरण: संक्रमण साइक्लोस्पोरा के संक्रामक ऊसाइस्ट (परजीवी का मोटी भित्ति वाला संक्रामक बीजाणुधानी) से दूषित भोजन अथवा जल के सेवन से होता है, विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जियों तथा सुगंधित जड़ी-बूटियों (Herbs) जैसे ताजा कृषि उत्पादों के माध्यम से।
    • व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण नहीं होता है।
  • रोकथाम
    • ताजे फलों एवं सब्जियों को सेवन से पहले प्रवाहित जल में अच्छी तरह धोएँ।
    • भोजन को पर्याप्त रूप से पकाएँ, क्योंकि लगभग 70°C (158°F) तक गर्म करने पर यह परजीवी नष्ट हो जाता है।
    • उचित हाथ स्वच्छता बनाए रखें तथा सुरक्षित खाद्य-प्रबंधन पद्धतियों का पालन करें।
    • सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें तथा दूषित स्रोतों से प्राप्त भोजन से बचें।
  • उपचार: मानक उपचार ट्राइमेथोप्रिम–सल्फामेथॉक्साजोल (Trimethoprim–Sulfamethoxazole- TMP-SMX) नामक प्रतिजैविक (Antibiotic) है, जिसे सामान्यतः 7–10 दिनों तक दिया जाता है।

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