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विक्रम-1: भारत का प्रथम निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान

20 Jul 2026

संदर्भ:

स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के अंतर्गत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय प्रक्षेपण यान तथा देश का पहला सफल निजी कक्षीय प्रक्षेपण स्थापित किया है।

संबंधित तथ्य

  • यह मिशन भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारितंत्र तथा हाल के अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों की सफलता में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
  • स्काईरूट ऑर्बिट (Orbit) में रॉकेट प्रक्षेपित करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने में सक्षम निजी कंपनी वाला तीसरा देश बन गया है।

विक्रम-1 के बारे में

  • भारत का पहला निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान: विक्रम-1 भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय-श्रेणी का प्रक्षेपण यान है, जो उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की स्वदेशी निजी क्षेत्र की क्षमता का प्रदर्शन करता है।
  • मिशन आगमन: विक्रम-1 का प्रथम कक्षीय मिशन, जो भारत के निजी कक्षीय प्रक्षेपण युग की शुरुआत का प्रतीक है।
  • प्रक्षेपण यान की विशिष्टताएँ: यह तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जो 450 किमी. निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 350 किलोग्राम तक के पेलोड स्थापित करने में सक्षम है।
  • उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ: इसमें पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना, ठोस ईंधन प्रणोदन प्रणाली तथा स्वदेशी रूप से विकसित 3D- प्रिंटेड लिक्विड इंजन है, जो इसे हल्का, अधिक मजबूत और लागत-कुशल बनाता है।
  • मिशन पेलोड: इसने सफलतापूर्वक स्काईरूट के स्कोप (SCOPE) उपग्रह, डीक्यूब्ड (DCUBED) के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड, ग्राहा स्पेस के सोलारास एस3 (SOLARAS S3) उपग्रह तथा कॉस्मोसर्व स्पेस की एम्ब्रेस (Embrace) रोबोटिक आर्म (कक्षीय मलबा हेतु) का कक्षीय नियोजन किया है।
  • प्रतीकात्मक पेलोड: इसमें ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक पुष्प कलाकृति तथा 18 कैरेट स्वर्ण सूक्ष्म रॉकेट भी शामिल था, जिस पर डॉ. सी. वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियाँ अंकित थीं।
  • नामकरण का महत्त्व: इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है।
    • कलाम: ठोस प्रणोदन प्रणाली
    • रमन: द्रव प्रणोदन प्रणाली
    • धवन: क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार:

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: इसने संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य शृंखला को गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) के लिए खोल दिया, जिससे उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निजी भागीदारी सक्षम हुई।

स्काईरूट एयरोस्पेस के बारे में:

  • स्थापना: 2018 में इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका द्वारा स्थापित किया गया था।
  • मुख्यालय: हैदराबाद, तेलंगाना।
  • विजन: वैश्विक लघु उपग्रह (Small Satellite) बाजार के लिए लागत-कुशल, विश्वसनीय और आवश्यकता-आधारित प्रक्षेपण यान विकसित करना तथा भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।

प्रमुख प्रक्षेपण यान:

  • विक्रम-S (2022): भारत का पहला निजी रूप से विकसित उप-कक्षीय (Suborbital) रॉकेट।
  • विक्रम-1 (2026): भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय (Orbital) प्रक्षेपण यान।

  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe): IN-SPACe निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एकल-खिड़की नियामक एवं प्रोत्साहक के रूप में कार्य करता है तथा इसरो (ISRO) के अवसंरचना, प्रौद्योगिकियों, परीक्षण सुविधाओं और विशेषज्ञता तक पहुँच उपलब्ध कराता है।
  • NSIL के माध्यम से व्यावसायीकरण: न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), इसरो की वाणिज्यिक शाखा के रूप में कार्य करता है, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों, प्रक्षेपण सेवाओं और उपग्रह मिशनों का व्यावसायीकरण करता है।
  • वित्तीय सहायता:
    • IN-SPACe सीड फंड योजना: ₹1 करोड़ तक का अनुदान।
    • ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड।
    • ₹500 करोड़ का प्रौद्योगिकी अंगीकरण कोष (TAF), जो नवाचार और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देता है।
  • उदारीकृत FDI नीति:
    • उपग्रह निर्माण एवं संचालन में 74% तक स्वचालित मार्ग से FDI
    • प्रक्षेपण यानों और स्पेसपोर्ट में 49% तक स्वचालित मार्ग से FDI
    • उपग्रह घटकों एवं उप-प्रणालियों के निर्माण में 100% स्वचालित मार्ग से FDI

भारत के निजी अंतरिक्ष पारितंत्र की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • अंतरिक्ष स्टार्ट-अप: 1 (2014) से बढ़कर 400+ (2026)
  • अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की, जिसके वर्ष 2030 तक 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर तथा वर्ष 2040 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • विक्रम-S (2022): भारत का पहला निजी रूप से विकसित उप-कक्षीय रॉकेट
  • अग्निकुल कॉसमॉस (2024): भारत के पहले निजी प्रक्षेपण स्थल (‘धनुष’) से रॉकेट प्रक्षेपित करने वाली पहली निजी कंपनी
  • विक्रम-1 (2026): भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय प्रक्षेपण यान तथा पहला सफल निजी कक्षीय प्रक्षेपण
  • SSLV प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (2026): हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को IN-SPACe से स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्राप्त हुआ, जिससे उद्योग-नेतृत्व वाले उत्पादन को सक्षम बनाया गया।
विक्रम-1: भारत का प्रथम निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान

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