संदर्भ
हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा की ट्रायल कोर्ट द्वारा ताजमहल के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश देने से इनकार किए जाने के विरुद्ध दायर याचिका पर केंद्र सरकार एवं भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब माँगा है।
संबंधित तथ्य
- याचिका: याचिका में यह घोषणा करने की माँग की गई है कि ताजमहल ‘तेजो महालय’ मंदिर है और फोटोग्राफी तथा वीडियोग्राफी के साथ न्यायालय की निगरानी में सर्वेक्षण का अनुरोध किया गया है।
- उच्च न्यायालय की कार्यवाही: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिका की स्वीकार्यता और मेरिट पर केंद्र तथा ASI को नोटिस जारी कर उनका जवाब माँगा है।
- ASI का रुख: ASI ने लगातार यह रुख बनाए रखा है कि ताजमहल 17वीं सदी का एक मुगलकालीन मकबरा है। इसके लिए उन्होंने ऐतिहासिक अभिलेखों, शिलालेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और ‘पिएत्रा ड्यूरा’ (Pietra Dura) जैसी निर्माण तकनीकों का हवाला दिया है, जो पूर्व-मध्यकालीन भारत में उपलब्ध नहीं थीं।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थिति
- निर्माण: मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा अपनी पत्नी मुमताज महल (अर्जुमंद बानो बेगम) के मकबरे के रूप में 1632 ईसवी से 1653 ईसवी के मध्य निर्मित कराया गया था।
- वास्तुकार : पारंपरिक रूप से उस्ताद अहमद लाहौरी को इसका श्रेय दिया जाता है।
विवादित स्वामित्व का इतिहास
- शुरुआती वैकल्पिक दावे: 17वीं से 19वीं शताब्दी के दौरान, कुछ यूरोपीय लेखकों ने गलत तरीके से ताजमहल के डिजाइन का श्रेय जेरोनिमो वेरोनियो, मोहम्मद एफेंडी और ऑस्टिन डी बोर्दो जैसे वास्तुकारों को दिया; बाद में इतिहासकारों द्वारा इन दावों को खारिज कर दिया गया था।
- पी.एन. ओक का सिद्धांत: वर्ष 1965 में, पी.एन. ओक ने दावा किया कि ताजमहल मूल रूप से एक राजपूत शासक का महल था, जिसे बाद में वर्ष 1989 में संशोधित करके उन्होंने इसे ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर बताया। उनके इन दावों में विश्वसनीय ऐतिहासिक या पुरातात्विक साक्ष्यों की कमी थी।
- न्यायिक अस्वीकृति: वर्ष 2000 में सर्वोच्च न्यायालय ने पी.एन. ओक की याचिका को खारिज करते हुए इन आरोपों को निराधार बताया था। इसी तरह के दावों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय (2005) और आगरा ट्रायल कोर्ट (2015) ने भी खारिज कर दिया था।
ताजमहल के बारे में
- स्थान: आगरा, उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के दाहिने तट पर अवस्थित है।
- यूनेस्को (UNESCO) मान्यता: मुगल वास्तुकला की एक उत्कृष्ट कृति और असाधारण सार्वभौमिक मूल्य के स्मारक के रूप में वर्ष 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
- संरक्षण स्थिति: प्राचीन स्मारक और पुरातात्त्विक स्थल व अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्त्व का स्मारक घोषित किया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित और रखरखाव किया जाता है।
ताजमहल की मुख्य विशेषताएँ
- स्थापत्य शैली: मुगल वास्तुकला का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण, जो फारसी, तैमूरी, इस्लामी और भारतीय स्थापत्य परंपराओं का मिश्रण है।
- निर्माण सामग्री: मुख्य रूप से सफेद मकराना संगमरमर से निर्मित किया गया है।
- चारबाग परिदृश्य: फ़ारसी शैली के चारबाग (चार भागों वाले) बगीचे के चारों ओर डिजाइन किया गया है, जो स्वर्ग का प्रतीक है।
- केंद्रीय गुंबद: चार छोटी गुंबददार संरचनाओं से घिरा एक प्रमुख दोहरा गुंबद है।
- मीनारें: कोनों पर चार थोड़ी बाहर की ओर झुकी हुई मीनारें समरूपता को बढ़ाती हैं और भूकंप के दौरान संरचनात्मक सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- पिएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura): कीमती और अर्द्ध-कीमती पत्थरों का उपयोग करके जटिल ‘पिएत्रा ड्यूरा’ (पत्थर की पच्चीकारी) के कार्य से सजाया गया है।
- सुलेख (कैलिग्राफी): मुख्य रूप से अमानत खान शिराजी द्वारा निष्पादित सुरुचिपूर्ण कुरानिक कैलिग्राफी शामिल है।
- समरूपता: डिजाइन और संतुलित वास्तु-विन्यास (लेआउट) में अपनी लगभग पूर्ण ज्यामितीय समरूपता के लिए प्रसिद्ध है।
- परिसर: इसमें मुख्य मकबरा, मस्जिद, जवाब (अतिथि गृह), मुख्य द्वार, बगीचे और दृश्य परावर्तित करने वाले सरोवर शामिल हैं।
पिएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) के बारे में
- एक सजावटी पत्थर जड़ाऊ तकनीक है, जिसमें अर्द्ध-कीमती पत्थरों को सटीक रूप से काटकर संगमरमर में तराशकर स्थापित किया जाता है, जिससे सजावटी पुष्प और ज्यामितीय पैटर्न तैयार किए जाते हैं।
- उत्पत्ति: यह तकनीक इटली के पुनर्जागरण के दौरान विकसित हुई और बाद में मुगल वास्तुकला में इसे पूर्णता प्रदान की।
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