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20 Jul 2026

वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (WAICO)

चीन ने शंघाई में आयोजित विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (World Artificial Intelligence Conference- WAIC) 2026 के दौरान वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (WAICO) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ-केंद्रित एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क को बढ़ावा देना है।

वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (WAICO) के बारे में

  • वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (WAICO) चीन के नेतृत्व वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने तथा ग्लोबल एआई गवर्नेंस के लिए एक वैकल्पिक ढाँचा विकसित करने हेतु की गई है।
  • स्थापना: इसे 16 जुलाई, 2026 को चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (WAIC) के दौरान आधिकारिक रूप से स्थापित किया गया है।
    • WAIC 2026 का आयोजन चीन के शंघाई में “इंटेलिजेंट पार्टनर्स, को-क्रिएटिंग द फ्यूचर” (Intelligent Partners, Co-Creating the Future) विषय के अंतर्गत किया गया है।
  • मुख्यालय: शंघाई, चीन।
  • प्रमुख भागीदार
    • संस्थापक सदस्य: इसमें कुल 29 सदस्य हैं, जिनमें चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, कजाखस्तान तथा अन्य वैश्विक दक्षिण के देश शामिल हैं।
    • भारत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
    • अंतरराष्ट्रीय सहभागिता: संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में समर्थित है तथा ब्रिक्स (BRICS), आसियान (ASEAN), अफ्रीकी संघ (AU) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे क्षेत्रीय समूहों के साथ सहयोग करता है।
  • उद्देश्य
    • समावेशी एआई विकास को बढ़ावा देना: विकासशील देशों में एआई तक पहुँच, क्षमता निर्माण और नवाचार को बढ़ाकर वैश्विक एआई विभाजन को कम करना।
    • ग्लोबल एआई गवर्नेंस को सुदृढ़ करना: सहयोग, डिजिटल संप्रभुता और उत्तरदायी एआई उपयोग पर आधारित बहुपक्षीय एआई गवर्नेंस ढाँचा विकसित करना।
    • एआई नवाचार को बढ़ावा देना: सदस्य देशों के बीच प्रौद्योगिकी साझाकरण, अनुसंधान सहयोग तथा ओपन-सोर्स एआई विकास को प्रोत्साहित करना।
  • प्रमुख पहल
    • एआई क्षमता निर्माण: चीन 5,000 एआई प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराएगा तथा साझेदार देशों में एआई सहयोग केंद्र स्थापित करेगा।
    • ओपन-सोर्स एआई इकोसिस्टम: ओपन-सोर्स एआई मॉडल, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा सहयोगात्मक एआई अनुसंधान के साझाकरण को प्रोत्साहित करता है।
    • ग्लोबल साउथ सहयोग: ब्रिक्स (BRICS), आसियान (ASEAN), अफ्रीकी संघ (AU), लैटिन अमेरिकी देशों तथा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के साथ एआई साझेदारियों का विस्तार कर डिजिटल क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
    • वैकल्पिक एआई गवर्नेंस ढाँचा: बहुपक्षीय एआई मानकों को बढ़ावा देते हुए एकपक्षीय प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों का विरोध करता है तथा डिजिटल संप्रभुता की वकालत करता है।

कोलोबस कॉन्गोएन्सिस 

(Colobus Congoensis)

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वैज्ञानिकों ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में कोलोबस कॉन्गोएन्सिस  (Colobus congoensis) नामक बंदर की एक नई प्रजाति की पहचान की है, जो कांगो बेसिन की समृद्ध किंतु संकटग्रस्त जैव विविधता को रेखांकित करती है।

कोलोबस कॉन्गोएन्सिस के बारे में

  • कोलोबस कॉन्गोएन्सिस (स्थानीय रूप से लिक्वेली (Likweli) के नाम से जाना जाता है) प्राचीन बंदरों की एक नई पहचानी गई प्रजाति है, जो कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए स्थानिक है।
    • यह पिछले 75 वर्षों में खोजी गई अफ्रीका की पाँचवीं वानर प्रजाति है।
  • खोज: इस प्रजाति का प्रथम साक्ष्य वर्ष 2008 में प्राप्त हुआ था और व्यापक आनुवंशिक, आकृतिकीय तथा ध्वनिक अध्ययनों के बाद वर्ष 2026 में इसे औपचारिक रूप से वैज्ञानिक मान्यता प्रदान की गई।
  • वितरण एवं आवास: यह कांगो बेसिन में लोमामी नदी और कांगो नदी के मध्य लगभग 1,700 वर्ग किमी. के छोटे क्षेत्र तक सीमित है।
    • यह घने वृक्ष-आवरण वाले उच्चभूमि उष्णकटिबंधीय वनों, जिनमें गहरी चिकनी मिट्टी पाई जाती है, में निवास करता है, जिससे यह आवास विखंडन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
    • इसके ज्ञात आवास का अधिकांश भाग लोमामी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • इस बंदर का चमकदार काले रंग का फर, नारंगी-क्रीम रंग के विशिष्ट चेहरे की आकृति, बड़े मुड़े हुए कान, लंबी पूँछ इसकी प्रमुख शारीरिक विशेषताएँ हैं।
    • अन्य कोलोबस बंदरों की तरह इसमें कार्यात्मक अंगूठा नहीं होता, जो वनों की कैनोपी में कुशलतापूर्वक संचरण के लिए एक अनुकूलन है।
    • यह शाकाहारी है और मुख्य रूप से पत्तियों एवं कोमल अंकुरों का सेवन करता है। इसके लिए इसमें गाय जैसे जुगाली करने वाले (Ruminants) पशुओं के समान विशेषीकृत अग्रांत्र किण्वन पाचन तंत्र पाया जाता है।
    • आनुवंशिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि इसका सबसे निकटतम जीवित संबंधी ब्लैक कोलोबस (Colobus satanas) है, जिससे यह लगभग 40–50 लाख वर्ष पूर्व पृथक हुआ था।
  • संरक्षण स्थिति: इसका अभी तक औपचारिक मूल्यांकन नहीं किया गया है और इसे IUCN रेड लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
    • शोधकर्ताओं ने इसके सीमित वितरण, छोटी जनसंख्या, आवास हानि और शिकार के दबाव को देखते हुए इसे IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध करने की अनुशंसा की है।

न्यू वर्ल्ड (New World) और ओल्ड वर्ल्ड (Old World) के बंदर

  • ओल्ड वर्ल्ड (Old World) के बंदर: अफ्रीका और एशिया में पाए जाते हैं। इनकी नासिकाएँ नीचे की ओर होती हैं। इनमें शाखाओं को पकड़ने वाली (Prehensile) पूँछ नहीं होती।
    • उदाहरण: बबून, मैंड्रिल तथा मकॉक।
  • न्यू वर्ल्ड (New World) के बंदर: मध्य एवं दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं। इनकी नासिकाएँ एक-दूसरे से अधिक दूर तथा बगल की ओर होती हैं। इनमें प्रायः शाखाओं को पकड़ने वाली (Prehensile) पूँछ होती है।
    • उदाहरण: हाउलर बंदर, स्पाइडर बंदर तथा कैपुचिन बंदर

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) 

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) हेतु प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के विशेष हस्तक्षेप को बढ़े हुए लक्ष्यों एवं वित्तीय आवंटन के साथ विस्तारित किया है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के बारे में

  • PM-NAPS एक प्रमुख अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना है, जिसे वर्ष 2016 में प्रारंभ किया गया तथा प्रशिक्षु अधिनियम, 1961 के अंतर्गत लागू किया गया।
  • यह स्किल इंडिया मिशन के अंतर्गत कक्षा आधारित अधिगम को कार्यस्थल के व्यावहारिक अनुभव के साथ एकीकृत कर संरचित एवं भुगतानयुक्त कार्यस्थल प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है, जिससे युवाओं की रोजगारयोग्यता में सुधार हो।
  • प्रमुख उद्देश्य
    • उद्योगोन्मुख प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के माध्यम से उच्च कौशलयुक्त कार्यबल का विकास करना।
    • वित्तीय प्रोत्साहन तथा स्टाइपेंड सहायता प्रदान कर नियोक्ताओं को प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
    • औपचारिक शिक्षा और उद्योग की कौशल आवश्यकताओं के मध्य के अंतराल को कम करना तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना।
  • वित्तपोषण: सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से स्टाइपेंड की आंशिक प्रतिपूर्ति तथा नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
    • पूर्वोत्तर क्षेत्र (वित्तीय वर्ष 2026–27) के लिए PM-NAPS के NER घटक के अंतर्गत ₹57.58 करोड़ का वित्तीय आवंटन किया गया है।
  • नोडल मंत्रालय
    • इस योजना का क्रियान्वयन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा किया जाता है।
    • भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष हस्तक्षेप के लिए क्रियान्वयन एजेंसी है।
  • प्रमुख लक्ष्य
    • वित्तीय वर्ष 2026–27 के विशेष हस्तक्षेप का उद्देश्य 30,000 प्रशिक्षुओं को सहायता प्रदान करना है, जिसमें: 15,000 नियुक्तियाँ पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर, 15,000 अवसर क्षेत्र के बाहर, जिनमें सरकारी विभाग तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) शामिल हैं।
    • पूर्वोत्तर में अपने गृह राज्य के भीतर प्रशिक्षुता करने वाले प्रशिक्षु ₹1,500 प्रति माह के अतिरिक्त प्रोत्साहन के भी पात्र होंगे।
  • PM-NAPS उद्योग साझेदारी, जागरूकता कार्यक्रमों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से प्रशिक्षुता पारितंत्र को सुदृढ़ करता है तथा समावेशी विकास, क्षेत्रीय विकास और भारत की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त कार्यबल को बढ़ावा देता है।

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) 

भारत के तीव्र गति से विस्तार कर रहे फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) बाजार ने खुदरा निवेशकों की बढ़ती हानियों को लेकर नई चिंताएँ उत्पन्न की हैं, जिसके कारण अधिक सुदृढ़ नियामकीय सुरक्षा उपायों की माँग की जा रही है।

संबंधित तथ्य

  • जुलाई 2025 के सेबी (SEBI) अध्ययन से पता चला कि वित्तीय वर्ष 2022 से प्रारंभ चार वर्षों की अवधि में 90% से अधिक व्यक्तिगत व्यापारियों को भारी हानि हुई।

फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) के बारे में

  • फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O): ऐसे डेरिवेटिव अनुबंध (Derivative Contracts) हैं, जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति, जैसे– इक्विटी, सूचकांक, कमोडिटी अथवा मुद्रा, से प्राप्त होता है। इनका प्रमुख उपयोग हेजिंग (जोखिम से बचाव), सट्टेबाजी (Speculation) तथा मूल्य खोज (Price Discovery) के लिए किया जाता है। 
  • फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) के प्रकार
    • फ्यूचर्स अनुबंध: यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता है, जिसके अंतर्गत किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति को पूर्व-निर्धारित मूल्य पर भविष्य की एक निश्चित तिथि को खरीदने या बेचने का अनुबंध किया जाता है।
    • ऑप्शन अनुबंध: यह खरीदार को पूर्वनिर्धारित मूल्य पर समाप्ति तिथि से पहले या उसी तिथि तक किसी आधारभूत परिसंपत्ति को खरीदने (कॉल ऑप्शन) अथवा बेचने (पुट ऑप्शन) का अधिकार प्रदान करता है, परंतु ऐसा करना उसके लिए अनिवार्य नहीं होता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • प्रतिकूल मूल्य परिवर्तनों के विरुद्ध हेजिंग के माध्यम से जोखिम प्रबंधन को सक्षम बनाता है।
    • लेवरेज (Leverage) प्रदान करता है, जिससे निवेशक कम पूँजी के साथ बड़ी बाजार स्थिति ले सकते हैं।
    • कुशल मूल्य खोज (Efficient Price Discovery) को सुगम बनाता है तथा बाजार की तरलता को बढ़ाता है।
    • इनका व्यापार मानकीकृत होता है तथा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से निपटान (Settlement) किया जाता है।
  • विनियमन: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) भारत के डेरिवेटिव बाजार का विनियमन करता है।
    • SEBI के नियामकीय ढाँचे के अंतर्गत नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) जैसे मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर इनका व्यापार किया जाता है।

पी. वी. सिंधु ने जापान ओपन सुपर 750 खिताब जीता

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पी. वी. सिंधु ने फाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर जापान ओपन सुपर 750 का खिताब अपने नाम किया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2018 के बाद अपना पहला बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) सुपर 750 खिताब जीता है।

प्रमुख बिंदु:

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: पी. वी. सिंधु जापान में प्रमुख बैडमिंटन खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं।
  • तीसरा एलीट BWF वर्ल्ड टूर खिताब: यह सिंधु का तीसरा सुपर 750/1000 स्तर का खिताब है। इससे पहले उन्होंने:
    • चाइना ओपन (2016), BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स (2018) तथा जापान ओपन सुपर 750 (2026) जीता था।

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