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वंदे मातरम संबंधी दिशा-निर्देश

12 Feb 2026

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संदर्भ

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आधिकारिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और औपचारिक अवसरों पर भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन और वादन के लिए प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

संवैधानिक स्थिति

  • न तो राष्ट्रीय गीत और न ही राष्ट्रीय गान का संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है।
  • इनकी स्थिति 24 जनवरी, 1950 को अपनाए गए संविधान सभा के प्रस्तावों से प्राप्त होती है।

मुख्य दिशा-निर्देश

  • वादन का क्रम: जब किसी कार्यक्रम में दोनों का वादन हो, तो वंदे मातरम् का वादन जन गण मन से पहले होगा।
  • अवधि: सरकार ने वंदे मातरम् के छह पदों वाले आधिकारिक संस्करण को निर्धारित किया है, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) है।
  • अनिवार्य खड़े होना: आधिकारिक परिवेश में जब भी राष्ट्रीय गीत गाया या बजाया जाए, उपस्थित सभी नागरिकों के लिए सावधान की मुद्रा में खड़ा होना आवश्यक है।
  • आधिकारिक वादन के अवसर
    • ध्वजारोहण समारोह।
    • राष्ट्रपति/राज्यपाल के आगमन/प्रस्थान के समय।
    • राष्ट्रपति/राज्यपाल के संबोधन से पहले/बाद।
    • राष्ट्रीय परेड, अलंकरण समारोह (जैसे- पद्म पुरस्कार)।
  • गायन संबंधी दिशा-निर्देश
    • सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रम: परेड समारोहों को छोड़कर, सांस्कृतिक या औपचारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय आधिकारिक संस्करण के सामूहिक गायन को प्रोत्साहित किया गया है।
    • औपचारिक राजकीय समारोहों को छोड़कर, सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर तथा प्रस्थान से ठीक पहले राष्ट्रीय गीत सामूहिक रूप से गाया जाना चाहिए।
    • शैक्षणिक संस्थान
      • विद्यालयों को विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना विकसित करने हेतु दिन की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से करने की सलाह दी गई है।
      • शैक्षणिक संस्थानों को राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
  • छूट एवं विशेष प्रावधान
    • सिनेमा हॉल: राष्ट्रीय गान के विपरीत, वंदे मातरम् को सिनेमाघरों में नहीं बजाया जाएगा।
    • डॉक्यूमेंट्री में उपयोग: यदि समाचार-रील या वृत्तचित्रों में इसका उपयोग किया जाता है, तो व्यवधान से बचने के लिए दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।

राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) के बारे में

  • लेखक: वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, और यह मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
  • रचना: इसकी रचना 1870 के दशक में हुई थी और बाद में इसे उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में प्रकाशित किया गया।
  • स्वीकृति: संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम् को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया।
  • भाषा: यह गीत मूल रूप से संस्कृत और बंगाली में लिखा गया था।
  • न्यायिक व्याख्या: एम. के. रमेश बनाम भारत संघ (2006) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि वंदे मातरम् का गायन कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, बल्कि नैतिक रूप से वांछनीय है और यह स्पष्ट किया कि सच्ची देशभक्ति स्वैच्छिक सम्मान से आती है, न कि जबरन पालन से।

राष्ट्रीय गान (जन गण मन) के बारे में

  • लेखक: राष्ट्र गान जन गण मन रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था और इसे 24 जनवरी, 1950 को अपनाया गया।
  • इसे पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।
  • भाषा: यह गान अत्यधिक संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा गया है।
  • अवधि: पूर्ण संस्करण की अवधि 52 सेकंड है, जबकि संक्षिप्त संस्करण लगभग 20 सेकंड का होता है।
  • कानूनी संरक्षण: राष्ट्रीय गान को ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ के तहत संरक्षण प्राप्त है और इसका अपमान कानूनन दंडनीय है।
    • उल्लंघन पर तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  • न्यायिक व्याख्या: बिजोए इमैनुएल मामला (1986) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सम्मानपूर्वक मौन में खड़ा रहता है, तो उसे राष्ट्रीय गान गाने के लिए बाध्य करना अनुच्छेद-19(1)(a) का उल्लंघन है।
वंदे मातरम संबंधी दिशा-निर्देश

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