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भारत की सांस्कृतिक कूटनीति

23 May 2026

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वर्ष 2026 के पाँच-देशीय दौरे के दौरान भारत के पारंपरिक शिल्प, वस्त्र, कृषि उत्पादों और भौगोलिक संकेतक (GI) टैग वाले उत्पादों का उपयोग सांस्कृतिक कूटनीति के उपकरणों के रूप में किया।

उपहारों से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • इटली: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मूगा रेशम का स्टॉल और शिरुई लिली रेशम का स्टॉल भेंट किए गए, जो गरिमा, विरासत और साझा कलात्मक परंपराओं का प्रतीक हैं।
    • इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला को मार्बल इनले वर्क बॉक्स तथा पंडित भीमसेन जोशी और एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी दी गईं।
  • नीदरलैंड: किंग विलेम-अलेक्जेंडर को जयपुर ब्लू पॉटरी भेंट की गई, जो भारत-नीदरलैंड सिरेमिक परंपराओं के संबंध को दर्शाती है।
    • क्वीन मैक्सिमा को मीनाकारी और कुंदन झुमके दिए गए, जो राजस्थान की शाही आभूषण कला को प्रदर्शित करते हैं।
    • डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन को मधुबनी पेंटिंग (मछली की आकृति) दी गई, जो मिथिला लोक परंपरा का प्रतीक है।
  • नॉर्वे: नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे को ऑर्किड प्रेस्ड पेंटिंग्स और ऑर्किड पेपरवेट भेंट किए गए, जो सिक्किम की हिमालयी जैव विविधता को दर्शाते हैं।
    • किंग हेराल्ड V को ओडिशा की तारकासी चाँदी की नाव का मॉडल दिया गया।
    • क्वीन सोन्या को ताला पटचित्र (पाम-लीफ कला) भेंट की गई।
  • स्वीडन: स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन को लद्दाखी ऊनी स्टॉल, लोकटक चाय और शांतिनिकेतन मैसेंजर बैग दिए गए, जो पूर्वोत्तर विरासत को दर्शाते हैं।
  • आइसलैंड: आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडोटिर को तेनजिंग नोर्गे की एवरेस्ट आइस ऐक्स की प्रतिकृति भेंट की गई, जो पर्वतारोहण इतिहास का सम्मान करती है।
  • फिनलैंड: फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ऑर्पो को कमल तलाई पिछवाई पेंटिंग (नाथद्वारा परंपरा) भेंट की गई।
  • डेनमार्क: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन को बिदरी सिल्वर वर्क द्वारा निर्मित फूलदान दिया गया, जो दक्कन धातु शिल्प को दर्शाता है।
  • संयुक्त अरब अमीरात: यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान को रोगन पेंटिंग, केसर आम और मेघालय के अनानास भेंट किए गए, जो भारत की शिल्प और कृषि समृद्धि को दर्शाते हैं।
    • यू.ए.ई. के क्राउन प्रिंस को कोफ्तगारी खंजर और मिथिला मखाने भेंट किए गए, जो भारत की सैन्य और कृषि विरासत को प्रदर्शित करते हैं।
    • यू.ए.ई. की क्वीन मदर को महेश्वरी रेशम और मणिपुर का चक-हाओ काला चावल भेंट किए गए।
  • FAO महानिदेशक: क्यू डोंग्यू को विविध भारतीय चावल किस्में और मिलेट बार्स भेंट किए गए, जो भारत की कृषि जैव विविधता और पोषक अनाज को बढ़ावा देते हैं।

उत्पादों के बारे में

उत्पाद उत्पादन क्षेत्र GI टैग स्थिति विशेषताएँ
मूगा रेशम असम हाँ प्राकृतिक से सुनहरा रंग; विश्व के सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशों में से एक।
शिरुई लिली रेशम का स्टॉल मणिपुर नहीं दुर्लभ शिरुई लिली से प्रेरित; तांगखुल नागा संस्कृति से संबंधित।
मार्बल इनले वर्क (पच्चीकारी) आगरा, उत्तर प्रदेश हाँ पित्रा द्युरा शिल्पकला; मुगल कलात्मक विरासत; ।
जयपुर ‘ब्लू पॉटरी’ राजस्थान हाँ GI-टैग युक्त सिरेमिक कला; फारसी-भारतीय कलात्मक संगम
मीनाकारी एवं कुंदन आभूषण राजस्थान नहीं रत्नों के साथ ‘एनामेल’ कार्य; शाही आभूषण परंपरा।
मधुबनी पेंटिंग बिहार हाँ ज्यामितीय पैटर्न वाली लोक कला; प्राकृतिक रंग और प्रतीकात्मक आकृतियाँ।
ऑर्किड पेंटिंग सिक्किम नहीं वास्तविक ऑर्किड का उपयोग; पूर्वी हिमालयी जैव विविधता को दर्शाता है।
चाँदी की तारकासी  कटक, ओडिशा हाँ जटिल चाँदी तारकला; सदियों पुरानी ओड़िया शिल्पकला
ताला पट्टचित्र ओडिशा हाँ ताड़-पत्र नक्काशी कला; पौराणिक विषय; पारंपरिक उत्कीर्णन
लद्दाखी पश्मीना शॉल लद्दाख हाँ गर्म शुद्ध ऊन वस्त्र; हिमालयी बुनाई परंपरा
लोकटक चाय मणिपुर नहीं लघु पैमाने पर उत्पादित चाय; लोकटक झील पारितंत्र के आस-पास उगाई जाती है।
शांतिनिकेतन लेदर बैग पश्चिम बंगाल हाँ हस्तनिर्मित चमड़ा शिल्प; विश्व-भारती परंपरा से जुड़ा।
बिदरी सिल्वर वर्क कर्नाटक हाँ काली मिश्रधातु पर चाँदी जड़ाई; फारसी-दक्कनी शिल्पकला।
रोगन पेंटिंग कच्छ, गुजरात हाँ अरंडी तेल पेस्ट से बनी दुर्लभ वस्त्र पेंटिंग; हस्तनिर्मित जटिल डिजाइन।
केसर आम गुजरात हाँ GI-टैग आम; केसरिया गूदा; मीठी सुगंध।
मेघालय अनानास मेघालय हाँ प्राकृतिक रूप से मीठा; कम रेशा; पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है।
कोफ्तगिरी कार्य राजस्थान/दक्कन परंपरा हाँ स्टील पर सोना/चाँदी जड़ाई की धातु कला।
मिथिला मखाने बिहार हाँ उच्च गुणवत्तायुक्त मखाना; पोषण से भरपूर; आर्द्रभूमि में कृषि।
महेश्वरी सिल्क मध्य प्रदेश हाँ हल्का हस्तकरघा वस्त्र; रिवर्सिबल बॉर्डर; आकर्षक बनावट
चक हाओ चावल मणिपुर हाँ सुगंधित काला चावल; एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर
कमल तलाई पिछवाई पेंटिंग राजस्थान नहीं नाथद्वारा की भक्ति कला; कमल सरोवर और कृष्ण परंपरा का चित्रण।
जोहा चावल असम हाँ स्वदेशी सुगंधित चावल; मुलायम बनावट और सुगंध।
कालानमक चावल उत्तर प्रदेश हाँ “बुद्ध चावल” के रूप में प्रसिद्ध; विशिष्ट सुगंध; पारंपरिक धरोहर।
गोविंदभोग चावल पश्चिम बंगाल हाँ प्रीमियम छोटे दाने वाला सुगंधित चावल; बंगाली व्यंजनों में उपयोग।
पालक्कादन मट्टा (लाल चावल) केरल हाँ स्वदेशी लाल चावल; फाइबर और पोषक तत्त्वों से भरपूर।
बासमती चावल ‘इंडो-गंगेटिक’ मैदान हाँ प्रीमियम लंबे दाने वाला सुगंधित चावल; वैश्विक निर्यात महत्त्व।
मिलेट बार्स महाराष्ट्र नहीं मोटे अनाज आधारित खाद्य; जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा।

PW OnlyIAS विशेष

भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के बारे में

  • भौगोलिक संकेतक (GI) ऐसे उत्पादों की पहचान करता है, जिनकी विशेषताएँ या प्रतिष्ठा उनके भौगोलिक मूल स्थान से जुड़ी होती हैं, जिससे प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है और कानूनी संरक्षण मिलता है।
  • कानूनी ढाँचा: वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 तथा इससे संबंधित नियम (जैसे वर्ष 2002 के नियम और हालिया 2025 संशोधन) द्वारा समर्थित है।
    • यह कानूनी संरक्षण प्रदान करता है, दुरुपयोग को रोकता है, उपभोक्ताओं की रक्षा करता है और उत्पादों को उनके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान से जोड़कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, जिसका प्रवर्तन भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा किया जाता है।
  • प्रदान करने वाली संस्था: यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • महत्त्व
    • यह उत्पादों की बाजार पहचान, निर्यात क्षमता और ब्रांडिंग को बढ़ाता है।
    • यह पारंपरिक ज्ञान की रक्षा, स्थानीय कारीगरों को लाभ तथा सतत् क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करता है।

उपहारों का महत्त्व

  • सांस्कृतिक कूटनीति: उपहार भारत की सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित करते हैं और साझेदार देशों के साथ भावनात्मक-सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करते हैं।
  • GI-टैग और स्वदेशी उत्पादों का प्रोत्साहन: यह स्थानीय शिल्प, हस्तकरघा और कृषि विविधता को प्रदर्शित करता है तथा भारतीय कारीगरों और किसानों के लिए वैश्विक पहचान को बढ़ाता है।
  • सॉफ्ट पॉवर को सुदृढ़ करना: पारंपरिक उपहार भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विरासत को कूटनीतिक उपकरण के रूप में स्थापित करते हैं।

निष्कर्ष

यह उपहार पहल भारत की सांस्कृतिक विविधता, शिल्प उत्कृष्टता और कृषि समृद्धि को रेखांकित करती है तथा विरासत, प्रतीकवाद एवं सॉफ्ट पॉवर कूटनीति के माध्यम से संबंधों को मजबूत करती है।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति

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