संदर्भ
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त द्वारा जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System- SRS) रिपोर्ट, 2024 भारत के निरंतर जनसांख्यिकीय परिवर्तन को रेखांकित करती है।
नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के बारे में
- नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) जन्म दर, मृत्यु दर और अन्य प्रजनन क्षमता एवं मृत्यु दर संकेतकों का अनुमान लगाने के लिए भारत की सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण प्रणाली है।
- यह राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनसंख्या की गतिशीलता पर विश्वसनीय वार्षिक डेटा प्रदान करता है।
- किसके द्वारा आयोजित: केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त का कार्यालय (Office of the Registrar General & Census Commissioner, India)।
- शुरुआत: भारत की महत्त्वपूर्ण सांख्यिकी प्रणाली को मजबूत करने के लिए सांख्यिकीय विशेषज्ञों की सिफारिशों पर वर्ष 1969-70 से संचालित किया जा रहा है।
- कवर किए गए प्रमुख क्षेत्र
- प्रजनन क्षमता संकेतक (Fertility Indicators)
- जन्म दर (Birth Rate- BR)
- कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate- TFR)
- आयु-विशिष्ट प्रजनन दर (Age-Specific Fertility Rate – ASFR)।
- मृत्यु दर संकेतक (Mortality Indicators)
- मृत्यु दर (Death Rate – DR)
- शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate – IMR)
- मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio – MMR)।
- जनसंख्या और स्वास्थ्य रुझान (Population and Health Trends)
- जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth)
- जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth)
- ग्रामीण-शहरी जनसांख्यिकीय रुझान (Rural-Urban Demographic Trends)।
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नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) रिपोर्ट, 2024 के मुख्य निष्कर्ष
- जन्म दर (Birth Rate)
- भारत की अशोधित जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) वर्ष 2023 के 18.4 से मामूली रूप से घटकर वर्ष 2024 में 18.3 हो गई।
- ग्रामीण जन्म दर (20.2) शहरी क्षेत्रों (14.7) की तुलना में अधिक बनी रही।
- जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) में सामान्य सुधार हुआ और यह 918 लड़कियाँ प्रति 1000 लड़के (वर्ष 2022-24 का औसत) हो गया।

- प्रजनन क्षमता के रुझान (Fertility Trends)
- भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 पर बनी रही, जो लगातार पाँचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे है।
- शहरी प्रजनन दर 1.5 पर कम बनी रही, जबकि ग्रामीण TFR प्रतिस्थापन स्तर (2.1) पर रहा है।
- घटती प्रजनन क्षमता शहरीकरण, महिलाओं की शिक्षा और बदलते सामाजिक-आर्थिक पैटर्न को दर्शाती है।
- मृत्यु दर (Death Rate)
- अशोधित मृत्यु दर (Crude Death Rate – CDR) वर्ष 2024 में 6.4 पर अपरिवर्तित रही, जो अभी भी कोविड-पूर्व स्तरों से ऊपर है।
- ग्रामीण मृत्यु दर (6.8) शहरी मृत्यु दर (5.6) से अधिक बनी रही।
- शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate- IMR) में मामूली सुधार हुआ और यह प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 25 से घटकर 24 मृत्यु हो गई।
- मृत्यु के मुख्य कारण (Leading Causes of Death)
- गैर-संचारी रोग (Non-communicable diseases) लगभग 60% मौतों के लिए जिम्मेदार रहे हैं।
- हृदय रोग (Cardiovascular diseases) मृत्यु का प्रमुख कारण बना रहा, कुल मौतों में जिसका कारण बढ़कर 32.1% हो गया।
- श्वसन संक्रमण (Respiratory infections) से होने वाली मौतों में कमी आई, लेकिन वे महामारी-पूर्व के स्तर से ऊपर बनी रहीं हैं।
PW OnlyIAS विशेष
अशोधित जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) के बारे में
- अशोधित जन्म दर का तात्पर्य किसी वर्ष में प्रति 1,000 जनसंख्या पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या से है।
- यह जनसंख्या वृद्धि के रुझानों और प्रजनन पैटर्न को मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक महत्त्वपूर्ण जनसांख्यिकीय संकेतक है।

अशोधित मृत्यु दर (Crude Death Rate – CDR) के बारे में
- अशोधित मृत्यु दर का तात्पर्य किसी वर्ष में प्रति 1,000 जनसंख्या पर होने वाली मौतों की संख्या से है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह जनसंख्या के स्वास्थ्य और मृत्यु दर की स्थितियों का एक प्रमुख संकेतक है।

कुल प्रजनन दर (TFR) के बारे में
- कुल प्रजनन दर का तात्पर्य बच्चों की उस औसत संख्या से है, जिसे एक महिला अपने प्रजनन काल (15–49 वर्ष) में जन्म देती है।
- 2.1 की TFR को ‘प्रतिस्थापन दर’ (Replacement Rate) के रूप में जाना जाता है।
- 2.1 की दर पर: जनसंख्या स्थिर बनी रहती है। इसका कारण यह है कि (प्रवासन को छोड़कर) एक महिला और उसका साथी औसतन अपने बराबर की जनसंख्या को प्रतिस्थापित कर देते हैं, बशर्ते उनके बच्चे 15 वर्ष की आयु तक जीवित रहें।
- 2.1 से ऊपर: जनसंख्या आम तौर पर बढ़ती है।
- 2.1 से नीचे: यदि आव्रजन का स्तर इसकी प्रतिपूर्ति नहीं करता है, तो जनसंख्या अंततः कम हो जाएगी।
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निष्कर्ष
भारत का जनसांख्यिकीय परिवर्तन घटती प्रजनन दर और बेहतर होते स्वास्थ्य संकेतकों को दर्शाता है, जिसके लिए मजबूत स्वास्थ्य सेवा, वृद्धों के लिए सहायता, लैंगिक समानता और मानव पूँजी पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।